ईरान में हिजाब पर कानून और होगा काला, अगर दिखे सिर के बाल, तो होगी सालों की जेल.. खतरनाक ड्राफ्ट में क्या है?
Iran New Hijab Law: ईरान में पिछले साल 16 सितंबर को 22 साल की कुर्द लड़की महसा अमीनी की हिजाब 'ठीक से नहीं पहनने' को लेकर गिरफ्तारी, और उसके बाद हुई संदिग्ध मौत को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था। ये विरोध प्रदर्शन कई महीनों तक चलता रहा और इस दौरान, सैकड़ों ईरानी महिलाओं ने हिबाज जलाकर प्रदर्शन किया।
लेकिन, महसा अमिनी की मौत के कारण हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन की एक साल की सालगिरह से कुछ हफ्ते पहले, ईरानी अधिकारी हिजाब पहनने पर एक कठोर नए विधेयक पर विचार कर रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि इस कानून में अभूतपूर्व रूप से कठोर सजा के प्रावधान किए गये हैं।

ईरान में हिबाज पर नया 'क्रूर कानून'
ईरान की इस्लामिक सरकार ने अनुच्छेद-70 के तहत नया मसौदा तैयार किया है, जिसमें हिजाब को लेकर कई नये सख्त प्रावधान किए गये हैं। इसके तहत...
हिजाब पहनने से इनकार करने वाली महिलाओं को 10 सालों की जेल की सजा हो सकती है
नियमों का उल्लंघन करने वाले मशहूर हस्तियों के लिए कठोर नए दंड
ड्रेस कोड का उल्लंघन करने वाली महिलाओं की पहचान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगा
पूरे देश में सार्वजनिक जगहों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होगा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हिजाब नहीं पहनने वाली महिलाओं की पहचान कर कंट्रोल रूम में जानकारी भेजेगा
जिस तरह से गाड़ियों का चालान कटता है, उसी तरह से हिबाज कानून का उल्लंघन करने वाली महिलाओं को नोटिस भेजा जाएगा और फिर उन्हें मुकदमों का सामना करना पड़ेगा।
जो व्यवसाय मालिक हिजाब की आवश्यकता को लागू नहीं करते हैं, उन्हें भारी जुर्माना का सामना करना पड़ेगा।
मशहूर हस्तियों को जुर्माने के तौर पर उनकी संपत्ति का दसवां हिस्सा सरकार सीज कर लेगी
उनकी अंतर्राष्ट्रीय यात्रा और उनके काम करने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है
एक्सपर्ट्स का कहना है, कि सरकार ने जो विधेयक तैयार किया है, वो ईरानियों के लिए एक चेतावनी है, कि पिछले साल देश को हिला देने वाले बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों के बावजूद, इस्लामिक शासन हिजाब पर अपने सख्त रुख से पीछे नहीं हटेगा।
हिजाब को लेकर बनाए गये इस नये विधेयक को इस साल की शुरुआत में ही न्यायपालिका ने विचार के लिए सरकार के पास प्रस्तुत किया था, जिसे फिर संसद में भेजा गया और बाद में कानूनी और न्यायिक आयोग ने इस विधेयक को अनुमोदित किया।

ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी मेहर ने मंगलवार को बताया है, कि इसे संसद के पटल पर पेश करने से पहले इस रविवार को इसे गवर्नर्स बोर्ड के सामने रखा जाएगा।
न्यूज एजेंसी मेहर के मुताबिक, ईरान की संसद में अगले दो महीनों में इस विधेयक को अंतिम रूप दे दिया जाएगा और फिर विधेयक पर मतदान कराए जाएंगे। हालांकि, इस्लामिक देश में संसद सिर्फ रबर स्टंप है, लिहाजा इस कानून का पास होना तय है।
सीएनएन की एक रिपोर्ट में, लंदन में चैथम हाउस थिंक-टैंक में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका कार्यक्रम के डायरेक्टर सनम वकील ने कहा है, कि "यह पिछले साल सितंबर के विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ सरकार की स्पष्ट प्रतिक्रिया है।" उन्होंने कहा, कि "शासन प्रतिक्रिया दे रहा है, हिजाब पहनना अब और सख्त कानून के अधीन होगा, और ये कानून काफी खतरनाक होगा।"
आपको बता दें, कि इस कानून में खास तौर पर मशहूर हस्तियों का जिक्र किया गया है, क्योंकि ईरान में पिछले साल हुए प्रदर्शन के दौरान दर्जनों महिला फिल्म स्टार्स और खिलाड़ियों ने हिजाब उतारकर प्रदर्शन का समर्थन किया था, लिहाजा अब उनपर नकेल कसने के लिए नया कानून लाया जा रहा है।

ईरान में हिजाब का इतिहास समझिए
ईरान में हिजाब लंबे समय से विवाद का मुद्दा रहा है। साल 1936 में नेता रेजा शाह ने महिलाओं की आजादी के लिए हिबाज पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन साल 1941 में रेजा शाह के सत्ता से हटने के बाद ये प्रतिबंध हटा लिया गया था।
साल 1983 में 1979 की इस्लामी क्रांति में आखिरी शाह को उखाड़ फेंकने के बाद देश में महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य हो गया।
ईरान पारंपरिक रूप से अपने इस्लामी दंड संहिता के अनुच्छेद 368 को हिजाब कानून मानता है, जिसमें कहा गया है, कि ड्रेस कोड का उल्लंघन करने वालों को 10 दिन से लेकर दो महीने तक की जेल या 50,000 से 500,000 ईरानी रियाल के बीच जुर्माना हो सकता है।
वहीं, नये विधेयक में हिजाब नहीं पहनना और भी ज्यादा गंभीर अपराध होगा, जिसमें पांच से दस साल तक की जेल की सजा के साथ-साथ 360 मिलियन ईरानी रियाल (करीब 6 लाख 80 हजार भारतीय रुपये) का जुर्माना हो सकता है।












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