Iran Political Crisis: ईरान में तख्तापलट? अब्बास अराघची किनारे, लिबरल नेता फेल, जानें सत्ता पर किसका कब्जा
Iran Political Crisis: ईरान की राजनीति में इस समय एक बड़ा भूचाल आया हुआ है। 'द न्यूयॉर्क पोस्ट' की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की कमान अब निर्वाचित सरकार या लिबरल नेताओं के हाथ से निकलकर पूरी तरह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पास चली गई है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची जैसे नरमपंथी नेताओं को किनारे कर दिया गया है।
अब अहमद वाहिदी और मुजतबा खामेनेई के करीबी सहयोगी ही देश के सैन्य और कूटनीतिक फैसले ले रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' पर दिख रहा है, जिसे IRGC ने अमेरिकी दबाव के विरोध में बंद रखने का कड़ा रुख अपनाया है।

IRGC का सत्ता पर पूर्ण नियंत्रण
ईरान में अब सेना का एक खास हिस्सा, जिसे IRGC कहते हैं, सरकार पर हावी हो गया है। कमांडर अहमद वाहिदी ने देश की सुरक्षा परिषद (SNSC) में अपनी पैठ मजबूत कर ली है। अब राष्ट्रपति या विदेश मंत्री की जगह सीधे IRGC के जनरल तय कर रहे हैं कि देश की नीति क्या होगी। इन्होंने उन सभी फैसलों को पलट दिया है जो पश्चिमी देशों के साथ तनाव कम कर सकते थे। अब सत्ता का केंद्र निर्वाचित दफ्तरों से शिफ्ट होकर सैन्य मुख्यालयों में चला गया है।
ये भी पढे़ं: US Iran peace talks: ईरान-अमेरिका शांति वार्ता में शामिल हो सकते हैं डोनाल्ड ट्रंप, रॉयटर्स का दावा
कूटनीति और बातचीत का अंत
विदेश मंत्री अब्बास अराघची जो अमेरिका और पश्चिमी देशों से बातचीत का रास्ता खोलना चाहते थे, उन्हें प्रभावी रूप से शक्तिहीन कर दिया गया है। IRGC का मानना है कि नरमी दिखाने से ईरान कमजोर होगा। जब अराघची ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को खोलने की बात की, तो IRGC ने उस फैसले को खारिज कर दिया। अब ईरान की वार्ता टीम में कट्टरपंथियों को शामिल किया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी समझौता सेना की मर्जी के बिना न हो।
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ता तनाव
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। IRGC ने यहाँ अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए आक्रामक रुख अपनाया है। हाल ही में दो भारतीय जहाजों पर हुई फायरिंग और अमेरिकी कार्गो शिप की जब्ती इसी शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा है। IRGC अब अपनी पारंपरिक नौसेना के बजाय छोटे और तेज हमलावर जहाजों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे फारस की खाड़ी में जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है और युद्ध जैसी स्थिति बन गई है।
ये भी पढे़ं: Iran vs America: 'होर्मुज हमारा है, हमारा ही रहेगा', ईरान ने दी अमेरिका को खुली चुनौती, अब क्या करेंगे ट्रंप
पश्चिम के साथ भविष्य की अनिश्चितता
इस सत्ता परिवर्तन ने अमेरिका और यूरोप की उन उम्मीदों को तोड़ दिया है कि ईरान बातचीत के लिए तैयार होगा। जानकारों का कहना है कि अब जब तक सत्ता की चाबी कट्टरपंथियों के पास है, किसी भी शांति समझौते की उम्मीद करना बेकार है। मुजतबा खामेनेई और वाहिदी की जोड़ी अब ईरान का भविष्य तय करेगी। इससे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ेगी, क्योंकि नई लीडरशिप किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिख रही है।












Click it and Unblock the Notifications