इजरायल पर हमले की तैयारी कर रहा ईरान? सीरिया में 2 अधिकारियों की मौत से भड़का रिवोल्यूशनरी गार्ड
ईरान ने आरोप लगाया है कि इजरायल की एयरफोर्स ने सीरिया पर हमला किया और इसमें ईरान के कई सैनिक मारे गए हैं। ईरान ने चेतावनी देते हुए कहा, अगर इजराइल हमला कर सकता है तो हम भी इसकी काबिलियत रखते हैं।

बीते एक महीने में अंतरराष्ट्रीय जगत में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं। जहां एक तरफ मध्यपूर्व के मुस्लिम देश जिनका आपस में संघर्ष का लंबा इतिहास है अपनी दुश्मनी भुलाकर करीब आ रहे हैं। हालांकि शांति के इन प्रयास के बीच अब ईरान और इजरायल के बीच युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।
द टाइम्स ऑफ इजराल ने शनिवार को बताया कि ईरान पिछले महीने सीरिया में कथित इजरायली हवाई हमलों में मारे गए दो रिवोल्यूशनरी गार्ड सलाहकारों का बदला लेने के लिए इजरायल के स्वामित्व वाले व्यापारिक जहाजों पर हमला करने की तैयारी कर रहा है।
द टाइम्स ऑफ इजरायल ने दो गुमनाम वरिष्ठ पश्चिमी खुफिया अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) एयरोस्पेस फोर्स फारस की खाड़ी और अरब सागर के माध्यम से नौकायन करने वाले जहाजों पर ड्रोन हमले शुरू करने के लिए कमर कस रही है।
IRGC से जुड़े एक ईरानी राजनीतिक रणनीतिकार ने टाइम्स ऑफ इजराइल अखबार को बताया है कि इससे पहले भी सीरिया में हुए हमलों का बदला लेने योजना बनाई गई थी। इससे पहले इजरायल के एक अधिकारी ने ईरान पर हमला करने की बात कही थी।
इजराइल के एयरफोर्स चीफ हेरजी हालेवी ने गुरुवार को दावा किया था कि इजरायल ईरान पर हमले के लिए तैयार है। हेरजी ईरान पर हमले के दौरान अमेरिका मदद नहीं करता है तो भी वे अकेले ही ईरान को एटमी हथियार बनाने से रोक सकते हैं। इजरायल का आरोप है कि ईरान एटमी हथियार बनाने के करीब पहुंचता जा रहा है।
आपको बता दें कि हाल के दिनों में इजरायल और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि इजरायल की एयरफोर्स ने सीरिया पर हमला किया और इसमें ईरान के कुछ सैनिक मारे गए। वहीं, इजरायल ने सवाल किया है कि आखिर सीरिया में ईरान के सैनिक क्यों मौजूद हैं?
सीरिया में ईरानी सैनिक क्यों?
2011 में जब अरब क्रांति की चिंगारी सीरिया तक पहुंची, तभी से वहां गृहयुद्ध शुरू है। यहां 2011 से ही बशर अल असद की सरकार है। विद्रोही सरकार से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सरकार की मदद करने वाले देशों में रूस, ईरान, इराक, अफगानिस्तान लेबनान और पाकिस्तान आदि देश हैं।
विद्रोहियों को अमेरिका, सऊदी अरब और तुर्किये से मदद मिल रही थी। हालांकि मुस्लिम देशों की दोस्ती से हालात बदल रहे हैं। इस बीच इजराइल ने कई बार ये दोहराया है कि वो सीरिया में ईरान को सैनिक अड्डे नहीं बनाने देगा, जिनका इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा सकता है।
सीरिया में जैसे-जैसे ईरान की मौजूदगी बढ़ रही है, वैसे-वैसे ईरानी ठिकानों पर इजरायल के हमले भी तेज होते जा रहे हैं। अमेरिका अब तक इस मामले में शांत दिख रहा है। अमेरिका का ध्यान मध्य-पूर्व की तरफ कम ताइवान-चीन विवाद की तरफ अधिक है।
चीन की मिलिट्री ड्रिल खत्म होने के अगले ही दिन मंगलवार को अमेरिका और फिलीपींस ने अपना अब तक का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास शुरू कर दिया है। युद्धाभ्यास में 17 हजार सैनिक हिस्सा लेंगे। इसमें 12,200 अमेरिकी और 5,400 सैनिक फिलीपींस के होंगे। इस मिलिट्री ड्रिल को बालिकतान नाम दिया गया है।












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