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ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का लिया फैसला, भारत ने भांप ली थी चाल, तेल आयात को लेकर उठाया बड़ा कदम

Israel-Iran War Impact: इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका ने ईरान पर एयर स्‍ट्राइक कर दी। अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद ईरानी की संसद ने रविवार को अंतर्राष्ट्रीय कॉरिडोर हॉर्मुज को बंद करने का निर्णय लिया है। इस निर्णय का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है, खासकर कच्चे तेल की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ने से तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।

बड़ी मात्रा में ईरान और दूसरे खाड़ी देशों से तेल आयात करने वाले भारत ने इस संकट को पहले से ही भांप लिया था इसलिए भारत ने अपनी तेल आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया। मध्य पूर्व के आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करते हुए, भारत ने रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ा दिया है।

Israel-Iran War Impact

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुलासा किया कि कि हमारी कंपनियों के पास कई सप्ताह का तेल का स्‍टॉक है। उन्‍होंने बताया हमारी तेल कंपनियों को होर्मुज स्ट्रेट के अलावा अन्‍य मार्गो से तेल सप्‍लाई हो रहा है। उन्‍होंने बताया भारत को कुल 5.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल आयात किया जाता है जिसमें से 1.5-2 मिलियन होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। बाकी तेल मार्गो से लगभग 4 मिलियम बैरल तेल आयात करते हैं।

रूस से तेल आयात में वृद्धि

ग्लोबल ट्रेड एनालिस्ट फर्म केप्लर के अनुसार, जून में भारत का रूस से तेल आयात पिछले दो वर्षों में सबसे अधिक रहा। भारतीय रिफाइनरियों ने जून में प्रतिदिन 20 से 22 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल का आयात किया। यह आंकड़ा इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत से किए गए संयुक्त आयात से भी अधिक है, जो लगभग 20 लाख बैरल प्रतिदिन है। मई में, भारत ने रूस से 19.6 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया था।

अमेरिका से क्रूड ऑयल का आयात

अमेरिका से भारत का क्रूड ऑयल आयात भी जून में बढ़कर 439,000 बैरल प्रतिदिन हो गया, जबकि मई में यह आंकड़ा 280,000 बैरल प्रतिदिन था।

मिडिल-ईस्‍ट में तनाव का प्रभाव

केप्लर के चीफ रिसर्च एनालिस्ट सुमित रिटोलिया का मानना ​​है कि इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से आपूर्ति अभी तक प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन जहाजों की गतिविधि से संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व से कच्चे तेल की ढुलाई में कमी आ सकती है। जहाज मालिक खाड़ी में खाली टैंकर भेजने में हिचकिचा रहे हैं, जिससे ऐसे जहाजों की संख्या 69 से घटकर 40 हो गई है। ओमान की खाड़ी से एमईजी-बाउंड सिग्नल भी आधे हो गए हैं।

भारत को नहीं होगी टेंशन

रिपोर्ट के अनुसार, जून के पहले 19 दिनों में, रूसी शिपमेंट ने भारत के कुल कच्चे तेल के आयात का 35% से अधिक हिस्सा कवर किया। रिटोलिया ने कहा कि अगर अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु साइटों पर हवाई हमले के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में संघर्ष बढ़ता है, तो रूसी तेल की हिस्सेदारी और भी बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में, भारत अधिक माल ढुलाई लागत के बावजूद अमेरिका, नाइजीरिया, अंगोला और ब्राजील से तेल आयात बढ़ा सकता है। इसके अतिरिक्त, भारत किसी भी कमी को पूरा करने के लिए अपने रणनीतिक भंडार का उपयोग कर सकता है, जो 9-10 दिनों के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त है।

भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है और अपनी जरूरत का लगभग 40% कच्चा तेल और गैस का आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात करता है। यह एक महत्वपूर्ण तेल मार्ग है, लेकिन इजरायल और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरानी चेतावनियों के कारण यह खतरे में है। ईरान ने अपने नियंत्रण वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है।

इस मार्ग से दुनिया का 26% कच्चा तेल कारोबार होता है, जिसमें से 44% एशिया में जाता है, जिसकी सबसे ज्यादा खपत चीन और भारत में होती है। ऐसे में, इस महत्वपूर्ण मार्ग में कोई भी रुकावट बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है, जिसे देखते हुए भारत ने अपनी तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने का कदम उठाया है।

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