ईरान में तगड़ा एक्शन: 21 हजार लोग जेल में, परमाणु वैज्ञानिक समेत 7 को फांसी, वजह अमेरिका-इजरायल क्यों?

Iran Israel war: इजरायल-ईरान युद्ध 2025 के बाद अब ईरान में देश से गद्दारी करने वालों को ढूंढा जा रहा है। ईरानी पुलिस देशभर में विशेष अभियान चलाकर उन लोगों को पकड़ रही है, जिन्होंने जून 2025 में इजरायल और अमेरिका के साथ 12 दिन चले युद्ध में जासूसी की थी। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार बीते दो माह में ईरानी पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर देश से 21 हजार लोगों को जासूसी के आरोप में पकड़कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया।

खास बात तो यह है कि युद्ध में अमेरिका और इजरायल के लिए जासूसी के आरोप में पकड़े जाने वालों में ईरान के आम नागरिक बल्कि डॉक्टर, इंजीनियर, परमाणु विशेषज्ञ, पत्रकार, अल्पसंख्यक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और वैज्ञानिक तक शामिल हैं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार युद्ध के बाद ईरान ने जासूसी के आरोप में परमाणु वैज्ञानिक समेत 7 लोगों को तो फांसी तक दे दी।

Israel War 2025

परमाणु वैज्ञानिक रूजबेह वादी को फांसी

रिपोर्ट्स में कहा गया है कि जासूसी के आरोप में ईरान में परमाणु वैज्ञानिक रूजबेद वादी को 6 अगस्त 2025 को फांसी दी गई है। वादी पर इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को परमाणु परीक्षण से संबंधित गोपनीय व संवेदनशील जानकारी साझा करने का आरोप है। इनके अलावा इजराइल के लिए जासूसी करने और साल 2020 में ईरान के परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह की हत्या में मदद के आरोप‍ियों को फांसी दी गई है।

ईरान के कानून प्रवर्तन प्रवक्ता सईद मॉत जेरोल महदी के अनुसार 13 जून 2025 को इजरायल ने हवाई हमले किए और फिर अमेरिका ने भी हमला किया। ईरानी सरकार ने इजरायल-अमेरिका को हमलों के लिए लोकेशन या अन्य संवेदनशील जानकारी भेजने वालों को पकड़ने के लिए अतिरिक्त चौकियां बनाई। सुरक्षाबलों ने देश में गद्दारों की पहचान के लिए अभियान चलाया और जनता से संदिग्धों की सूचना देने की अपील की। ईरान की साइबर अपराध सेल भी युद्ध के दौरान 5,700 से अधिक मामलों में कार्रवाई की।

इजरायल-ईरान युद्ध 2025 में क्या हुआ था?

13 जून 2025 को इजरायल ने "ऑपरेशन राइजिंग लायन" के तहत ईरानी परमाणु और सैन्य स्थलों पर ताबड़तोड़ हमले शुरू किए, जिसमें ईरान के नतांज, इस्फ़हान जैसे प्रतिष्ठित ठिकानों को निशाना बनाया गया। इजरायल के हवाई हमलों में ईरानी सेना के कई टॉप कमांडर व वैज्ञानिक मारे गए। मिसाइल लॉन्चर और एयर-डिफेंस सिस्टम को भी भारी नुकसान हुआ।

इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने भी मिसाइलें दागीं। ईरान ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं और दावा किया कि उसने महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान ने दो चरणों में इजरायल पर लगभग 200 मिसाइलें दागीं। इजरायल के समर्थन में अमेरिका जंग के मैदान में कूदा और ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया। लगभग 12 दिनों तक चले इजरायल-ईरान युद्ध में 24 जून 2025 को संघर्ष विराम की घोषणा की गई।

अफगान नागरिकों को निकाल रहा ईरान

इजरायल-ईरान युद्ध में 24 जून 2025 के बाद ईरान में अफगानी शरणार्थियों के खिलाफ गुस्सा भड़क उठा है। बड़ी तादाद में उन्हें जासूस करार देकर देश से बाहर निकाला जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी के अनुसार महज दो महीने में 13 लाख से ज्यादा अफगान नागरिकों को ईरान छोड़ना पड़ा है और अनुमान है कि साल के अंत तक यह आंकड़ा 30 लाख तक पहुंच सकता है। इस्लाम कला सीमा चौकी से हर दिन 30 से 50 हजार लोग अफगानिस्तान लौट रहे हैं।

इजरायल-ईरान युद्ध की 5 बड़ी वजह

1. ऐतिहासिक दुश्मनी: 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान ने इज़रायल को दुश्मन मान लिया और लगातार विरोधी रुख अपनाया।

2. परमाणु खतरा: ईरान का तेज़ी से बढ़ता परमाणु कार्यक्रम इजरायल के लिए अस्तित्वगत खतरा बन गया।

3. आतंकी संगठनों को समर्थन: ईरान, हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे समूहों को मदद करता है जो सीधे इज़रायल के खिलाफ हैं।

4. छाया युद्ध: दोनों देश वर्षों से सीरिया, लेबनान और साइबर हमलों के ज़रिये अप्रत्यक्ष टकराव में रहे हैं।

5. राजनीतिक और सुरक्षा दबाव: इजरायल की नेतन्याहू सरकार ने ईरान पर हमले को अपनी सुरक्षा रणनीति और घरेलू राजनीति, दोनों के लिए ज़रूरी कदम माना।

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