मध्य-पूर्व में धड़ाधड़ सुधर रहे हैं रिश्ते, ईरान ने UAE से भी जोड़ा रिश्ता, 7 साल बाद राजदूत की नियुक्ति
सऊदी अरब से संबंध सुधरना, ईरान के लिए काफी फायदेमंद माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका ने उसपर गंभीर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं, जिससे ईरान की करेंसी, डॉलर के मुकाबले लगातार लुढ़कती जा रही है।

Iran-UAE Tie: मध्य पूर्व देशों की जियो-पॉलिटिक्स में बिजली की रफ्तार से बदलाव हो रहे हैं और अब ईरान ने कहा है, कि उसने 2016 के बाद पहली बार खाड़ी देशों और ईरान के बीच संबंधों के पुनर्गठन के बीच संयुक्त अरब अमीरात में एक राजदूत नियुक्त कर दिया है। यानि, 7 सालों के बाद ईरान ने अपने राजदूत की नियुक्त यूएई में की है।
पिछले साल अगस्त महीने में संयुक्त अरब अमीरात और ईरान के बीच के संबंध सही होने गे थे और अब तेहरान ने एक बार फिर से अपने राजदूत को यूएई में भेज दिया है। ईरानी राज्य मीडिया ने कहा है, कि ईरान के नवनियुक्त राजदूत रेजा अमेरी ने विदेश मंत्रालय में ईरानी प्रवासी कार्यालय के महानिदेशक के रूप में काम शुरू कर दिया है। इस बीच, ईरान ने यमन में शांति प्रक्रिया का समर्थन करने और सालों से चले आ रहे संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाने वाले अमेरिका को धन्यवाद दिया है, जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र पिछले एक साल से काफी हाथ- पांव मार रहा था।
यमन में शांति का ईरान ने किया स्वागत
संयुक्त राष्ट्र में यमन के लिए अमेरिका के विशेष दूत टिमोथी लेंडरकिंग ने मंगलवार को कहा, कि वाशिंगटन "हम आशा करते हैं, कि ईरान उस राजनीतिक प्रक्रिया के लिए अपना समर्थन दिखाएगा, जिसकी हम उम्मीद कर रहे हैं।" जिसपर ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नासिर कनानी ने दूत की कॉल को "संतुष्टिदायक" के रूप में वर्णित किया और इस बात पर जोर दिया, कि तेहरान "युद्ध की शुरुआत के बाद से शांति प्रक्रिया के लिए प्रयास कर रहा था।" वहीं, संयुक्त राष्ट्र यमन के राजदूत हैंस ग्रंडबर्ग ने इसे "उम्मीद का पल" बताया है, क्योंकि अक्टूबर में युद्धविराम खत्म होने के बाद भी काफी हद तक शांति कायम है।

UAE-ईरान में कैसे रहे हैं संबंध?
ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच के संबंध उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। यूएई, जिसका ईरान के साथ आर्थिक संबंधों का एक लंबा इतिहास रहा है, उसने ईरान के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को उस वक्त काफी कम कर दिया, जब सऊदी अरब ने साल 2016 में ईरान में अपने दूतावास को बंद कर दिया था। शिया बाहुल देश ईरान के प्रदर्शनकारियों ने साल 2016 में सऊदी दूतावास पर उस वक्त हमला कर दिया था, जब सऊदी अरब ने शिया धार्मिक नेता निम्र अल-निम्र को फांसी दे दी थी।
लेकिन, अब सऊदी अरब ने ईरान के साथ अपने संबंध फिर से जोड़ लिए हैं, लिहाजा पहले से ही उम्मीद की जा रही थी, कि यूएई के भी ईरान के साथ संबंध सही हो जाएंगे। गुरुवार को बीजिंग में ईरानी विदेश मंत्री होसैन अमीरबदोल्लाहियान और उनके सऊदी समकक्ष फैसल बिन फरहान के बीच होने वाली बैठक से दो दिन पहले यूएई दूत नियुक्त करने का ईरान ने कदम कदम उठाया है। आज बीजिंग में सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच, चीनी विदेश मंत्री की मौजूदगी में बैठक हुई है।

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सऊदी जाएंगे ईरानी राष्ट्रपति
इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी के प्रशासन ने कहा है, कि उन्होंने सऊदी अरब की राजकीय यात्रा के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है, हालांकि तारीख की फिलहाल पुष्टि नहीं हुई है। अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान भी सऊदी शासकों को अपने देश में निमंत्रण देने की योजना बना रहा है। वहीं, ईरान क्षेत्र के अन्य अरब देशों के साथ संबंधों को सुधारने के प्रयासों में भी लगा हुआ है, जबकि सऊदी अरब ने सीरिया के साथ अपने संबंध जोड़ लिए हैं, जिसमें रूस ने अहम भूमिका निभाई है। कुल मिलाकर, मध्यपूर्व की राजनीति में तेजी के साथ परिवर्तन हो रहे हैं और चीन के वर्चस्व में जबरदस्त इजाफा हो रहा है, जबकि अमेरिका उतनी ही तेजी से मध्य-पूर्व से बाहर हो रहा है।












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