इंटरपोल पर भी हुआ चीन का कब्जा! रिपोर्ट से हुए कई बड़े खुलासे
बीजिंग, 31 जुलाई: चीन इंटरपोल जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों का भी अपने हित में इस्तेमाल करने के लिए व्यवस्थित तरीके से काम कर रहा है। यह रिपोर्ट बहुत ही चौंका देने वाली है। बीजिंग की इस बात के लिए आलोचना हो रही है कि वह इंटरनेशनल क्रिमिनल पुलिस ऑर्गेनाइजेशन का दुरुपयोग कर रहा है और अपनी देश-प्रत्यावर्तन नीति के तहत इसके रेड नोटिस सिस्टम (रेड कॉर्नर नोटिस) के बेजा इस्तेमाल में लगा हुआ है। एक्सपर्ट के मुताबिक चीन ने 2016 से इंटरपोल को अपने प्रभाव में लेना शुरू किया है और वह अपनी आर्थिक ताकत के दम पर जियोपॉलिटिक्स पर असर डालने लगा है।

इंटरपोल पर भी हुआ चीन का कब्जा-रिपोर्ट
न्यूज एजेंसी एएनआई ने मीडिया रिपोर्ट के हवाले से चीन के तिकड़मों के बारे में जो नई जानकारी का खुलासा किया है, उससे जाहिर होता है कि किस तरह से कई तमाम अंतरराष्ट्रीय संगठन चीन से प्रभावित हो चुके हैं। इंटरपोल में चीन का दबदबा बढ़ने का यह भी कारण है कि संगठन के अध्यक्ष के रूप में चीन के पब्लिक सिक्योरिटी उपाध्यक्ष मेंग होंगवेई की नियुक्ति होने के बाद यह उसका अगुवा देश बन चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक यह पहले से आशंका थी कि मेंग की वजह से चीन को विदेश में असंतुष्टों का पीछा करने के साधन के रूप में संगठन का इस्तेमाल करना आसान हो जाएगा।

मनमाने तरह से रेड कॉर्नर नोटिस का इस्तेमाल-रिपोर्ट
रेड कॉर्नर नोटिस सिस्टम के दुरुपयोग को लेकर चीन की आलोचना होती रही है। रेड नोटिस वह व्यवस्था है, जिसमें कानून का पालन करवाने वाली एजेंसियां दुनिया भर में किसी व्यक्ति का पता लगाने और उसे अस्थाई तौर पर गिरफ्तार करने के लिए अनुरोध जारी करती हैं। यह उस शख्स के लिए भी हो सकता है, जिसका प्रत्यर्पण लंबित हो। रिपोर्ट के मुताबिक इसकी आड़ में चीन के लिए किसी विशेष व्यक्ति का अंतरराष्ट्रीय बैंक अकाउंट फ्रीज करने और यात्रा से जुड़ी पाबंदियों को लागू करवाना आसान हो जाता है और यह उसके देश-प्रत्यावर्तन नीति के मुताबिक है।

मानवाधिकार उल्लंघन के साक्ष्य भी पेश हो चुके हैं
एमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से हुई जांच में चीनी सरकार के द्वारा 2017 से 2021 के बीच शिनजियांग प्रांत और उसके साथ-साथ नजरबंदी कैंपों के बाहर होने वाले मानवाधिकारों के उल्लंघन का भी पता चला है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने चीन सरकार की ओर से उइगर, कजाखों और अन्य मुस्लिम जातीय अल्पसंख्यकों के खिलाफ होने वाले कारावास, प्रताड़ना और उत्पीड़न जैसी मानवता के खिलाफ अपराधों के आरोपों के समर्थन में तथ्यात्मक साक्ष्य भी प्रदान किए गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 के बाद से, चीन की सरकार के द्वारा शिनजियांग के पुनर्शिक्षा शिविरों में 10 लाख से ज्यादा उइगर मुसलमानों को हिरासत में रखा गया है। इन पुनर्शिक्षा शिविरों का मुख्य उद्देश्य चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा का पालन सुनिश्चित करना है। चीनी अधिकारियों पर लोगों से जबरन मजदूरी करवाने, व्यवस्थित तरीके से जबरिया जनसंख्या नियंत्रण, यातनाएं और बच्चों को कैद किए गए माता-पिता से अलग रखने जैसे गंभीर आरोप लगाए जा चुके हैं।

उइगर ऐक्टिविस्ट के भी प्रत्यर्पण का खतरा
ऑपरेशन स्काईनेट के तहत 2015 में तथाकथित आर्थिक भगोड़ों के लिए चीन ने 100 से ज्यादा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया था, जिनमें से 51 को स्वदेश भेजा जा चुका है। 51 में से 35 'अपराधी' 'स्वेच्छा' से काफी दबाव और चीनी धमकी की वजह से चीन लौटे और कुछ विशेष व्यक्तियों को उनके परिवारों की प्रताड़ना की वजह से मजबूरन अपने घर वापस लौटना पड़ा। गौरतलब है कि 45 मानवाधिकार संगठनों ने उइगर ऐक्टिविस्ट यिदिरेसी ऐशान की रिहाई की मांग की है, क्योंकि उन्हें वापस उनके देश प्रत्यर्पण किए जाने का खतरा है। उइगर ऐक्टिविस्ट यिदिरेसी ऐशान 34 वर्षीय एक कंप्यूटर इंजीनियर है, जो पिछले एक साल से मोरक्को में हिरासत में है।

उइगर ऐक्टिवस्ट के लिए भी किया इंटरपोल का इस्तेमाल-रिपोर्ट
चीन ने उसे गिरफ्तार करने के लिए इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध किया था, क्योंकि उसके मुताबिक ऐशान एक आतंकवादी संगठन से जुड़ा है। 19-20 जुलाई, 2021 को जब वह तुर्की से मोरक्को पहुंचा तो वहां उसे एयरपोर्ट से ही गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, इंटरपोल ने समीक्षा के बाद ऐशान के लिए जारी रेड नोटिस रद्द कर दिया था, क्योंकि आरोपी ने दावा किया था कि इसका इस्तेमाल असंतुष्टों को चीन वापस लाने के लिए किया जा रहा है।(तस्वीरें-फाइल)
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