INS Kiltan: दक्षिण चीन सागर में घुसकर ड्रैगन को भारत दे रहा जवाब, नाक के नीचे युद्धपोत को उतारा, समझिए क्यों?
INS Kiltan: चीन अकसर अपने जहाजों को हिंद महासागर में भेजकर भारत के लिए परेशानि पैदा करने की कोशिश करता रहता है और हिंद महासागर में जहाज भेजकर, असल में वो अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है, लेकिन अब भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब देना शुरू कर दिया है।
भारतीय नौसेना का जहाज INS किल्टन इस बार दक्षिण चीन सागर के तट पर बसे देश ब्रुनेई के मुआरा में पहुंचा है, जहां रॉयल ब्रुनेई नौसेना ने उसका गर्मजोशी से स्वागत किया है।

भारतीय जहाज की ये यात्रा, दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की परिचालन तैनाती का हिस्सा है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज में बताया है, कि यह यात्रा दोनों समुद्री देशों के बीच दोस्ती और सहयोग को और मजबूत करने के लिए हो रही है। भारतीय नौसेना का जहाज INS किल्टन की यात्रा, प्रोफेशनल बातचीत, खेल आयोजनों, सामाजिक आदान-प्रदान और सामुदायिक आउटरीच पर केंद्रित है, जो दोनों देशों और नौसेनाओं के साझा मूल्यों को दर्शाती है।
माना जा रहा है, कि ब्रूनेई में जहाज को भेजकर अब चीन के सामने भारत अपनी शक्ति का प्रदर्शन कर रहा है। भारत ने इस बार अपने तीन जहाजों को दक्षिण चीन सागर में भेजा है, जिनमें से दो जहाज फिलीपींस पहुंचे हैं।
INS किल्टन की यह यात्रा, भारतीय नौसेना और रॉयल ब्रुनेई नौसेना के बीच समुद्र में, समुद्री साझेदारी अभ्यास के साथ समाप्त होगी। दोनों नौसेनाएं सामरिक विकास करेंगी जिससे अंतरसंचालनीयता के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने यह भी कहा है, कि INS किल्टन चार P28 एंटी-सबमरीन वारफेयर (ASW) कार्वेट में से तीसरा है, जिसे गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्माण किया गया है।
इससे पहले 20 मई को INS दिल्ली, INS शक्ति और आईएनएस किल्टन, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चली आ रही दोस्ती और समुद्री सहयोग को और मजबूत करने के लिए फिलीपींस के मनीला पहुंचे थे। इसके अलावा, यह यात्रा दक्षिण चीन सागर में भारतीय नौसेना के पूर्वी बेड़े की परिचालन तैनाती का हिस्सा थी।
दक्षिण चीन सागर में संघर्ष तेज
स्कारबोरो शोल को लेकर चीन और फिलीपींस के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, क्योंकि मनीला ने विवादित क्षेत्रों में अब काफी आक्रामक रूख अपना लिया है।
फिलीपींस के तट से लगभग 220 किलोमीटर दूर और इसके विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के भीतर, शोल एक पारंपरिक मछली पकड़ने का समुद्री मैदान है, जिसका उपयोग कई देशों द्वारा किया जाता है और यह महत्वपूर्ण शिपिंग चैनलों के करीब स्थित है। समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन (यूएनसीएलओएस) के मुताबिक, एक ईईजेड किसी देश के तट से लगभग 370 किमी तक फैला होता है।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने फिलीपींस सहित अन्य देशों के दावों को खारिज करते हुए लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा किया है, और इंटरनेशनल कोर्ट के फैसले पर चीन ने कहा है, कि फैसले का कोई कानूनी आधार नहीं है।
जबकि, दक्षिण चीन सागर के अलग अलग हिस्सों पर ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम भी दावा करते हैं। भारत और फिलीपींस ने नवंबर 1949 में औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए, और अब फिलीपींस भारत से कई तरह के हथियार खरीद रहा है। इसी साल भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल की सप्लाई भी की है। भारत और फिलीपींस, दोनों देशों के बीच रिश्ते मधुर रहे हैं और भारतीय नौसेना और तटरक्षक जहाज नियमित रूप से फिलीपींस का दौरा करते रहते हैं।












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