Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Indian Navy: भारत की 3 अरब डॉलर की परमाणु पनडुब्बी दुर्घटना, जानिए जब एक गलती ने नौसेना को अपंग कर दिया?

INS Brahmaputra: हाल ही में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र (INS Brahmaputra) पर एक त्रासदी घटी है, जिसने शांति काल में दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

21 जुलाई को आईएनएस ब्रह्मपुत्र पर भयानक आग लग गई, जिससे काफी नुकसान हुआ और जहाज झुक गया। बताया जाता है, कि ये आग तब लगी थी, जब जहाज मुंबई के एक डॉकयार्ड में मरम्मत और रखरखाव का काम कर रहा था।

INS Arihant

भारतीय नौसेना ने एक बयान में कहा है, "फ्रिगेट आईएनएस ब्रह्मपुत्र पर आग लगने की घटना में, युद्धपोत एक तरफ (बंदरगाह की तरफ) गंभीर रूप से झुक गया। तमाम कोशिशों के बावजूद, जहाज को सीधा नहीं किया जा सका। जहाज अपने बर्थ के साथ-साथ और भी झुकता गया और फिलहाल एक तरफ झुका हुआ है।"

लेकिन, सवाल ये हैं, कि आखिर ऐसे हादसे किन लापरवाहियों की वजह से होते हैं, जिसका खामियाजा ना सिर्फ भारतीय नौसेना को, बल्कि पूरे भारत को भुगतना पड़ता है। आइये जानने की कोशिश करते हैं, कि आखिर इंडियन नेवी को बार बार ऐसे हादसों से क्यों दो-चार होना पड़ता है?

आईएनएस ब्रह्मपुत्र पर घटी ये घटना, भारतीय नौसेना की ऑपरेशन तत्परता और सुरक्षा प्रोटोकॉल के बारे में गंभीर संदेह को उजागर करती है, दुर्घटनाओं और दुर्घटनाओं की चिंताजनक प्रवृत्ति को देखते हुए कई सवाल खड़े होते हैं। उदाहरण के लिए, संसद में प्रस्तुत 2017 की एक ऑडिट रिपोर्ट से पता चला है, कि भारतीय नौसेना ने 2007 से 2016 तक जहाजों और पनडुब्बियों से जुड़ी 38 घटनाएं दर्ज की हैं। यानि, करीब 10 सालों में 38 हादसे।

CAG ने अपनी जांच रिपोर्ट में क्या पाया है?

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने नौ वर्षों में हुई कई नौसेना दुर्घटनाओं की जांच की और 2016 में एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें बताया गया कि 39% दुर्घटनाएं आग, विस्फोट या बाढ़ के कारण हुईं। सिर्फ इतनी भर बात नहीं है, बल्कि 2017 में, भारतीय नौसेना में एक बहुत बड़ी त्रासदी हुई थी, जब INS अरिहंत अपंग हो गया, क्योंकि किसी ने "एक हैच खुला छोड़ दिया था।"

आइये जानते हैं, कि आखिर वो कितनी बड़ी लापरवाही थी, जिसने भारत की परमाणु पनडुब्बी को ही अपंग कर दिया था। साल 2009 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज के ही दिन INS अरिहंत को लॉन्च किया था, जो कारगिल विजय दिवस की सालगिरह से मेल खाता है।

INS Arihant

परमाणु पनडुब्बी दुर्घटना

INS अरिहंत, जिसे S2 स्ट्रैटेजिक स्ट्राइक न्यूक्लियर सबमरीन कहा जाता है, वो भारत की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के अरिहंत क्लास की एक प्रमुख पनडुब्बी है। INS अरिहंत, भारतीय नौसेना की सीक्रेट एडवांस टेक्नोलॉजी वेसल (ATV) पहल के तहत बनाई गई थी। INS अरिहंत भारत के परमाणु त्रिकोण को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और देश की रणनीतिक स्ट्राइक परमाणु पनडुब्बी के रूप में कार्य करता है।

जनवरी 2018 में द हिंदू में प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला, कि परमाणु पनडुब्बी को 2017 में ऑपरेशन से बाहर कर दिया गया था, क्योंकि जब पनडुब्बी डॉक पर खड़ी थी, तब किसी ने पीछे का हैच खुला छोड़ दिया था। नौसेना अधिकारियों के मुताबिक, अरिहंत के पीछे बाईं ओर एक खुली हैच की वजह से पनडुब्बी के डॉक पर खड़े होने के दौरान समुद्री पानी उसके प्रपल्शन सेक्शन में घुस गया।

जिसकी वजह से पाइपों की मरम्मत और पानी को बाहर निकालने के लिए अरिहंत को दस महीने के लिए बंद करना पड़ा।

उस समय, यह सोचा गया था, कि लगातार समुद्र के अत्यधिक नमक भरे जल के संपर्क में आने वाले पाइपों पर फिर से काम करने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता है, विशेष रूप से वे पाइप जो जहाज के 83-मेगावाट परमाणु रिएक्टर से दबावयुक्त जल शीतलक को ले जाने और लाने के लिए हैं। इसके अलावा, क्षतिग्रस्त पाइपों ने चालक दल और जहाज पर मौजूद परमाणु हथियारों दोनों के लिए जोखिम पैदा किया। इसलिए, कई पाइपों को हटाना पड़ा और समुद्री जल की अत्यधिक संक्षारकता के कारण उन्हें बदलना पड़ा, जिनमें जहाज के 83-मेगावाट परमाणु रिएक्टर से दबावयुक्त जल शीतलक को ले जाने वाले पाइप भी शामिल हैं।

डॉक पर, छह-हज़ार टन का INS अरिहंत तब तक काम नहीं कर रहा था जब तक कि पाइपों को ठीक नहीं किया गया और पानी को बाहर पंप नहीं किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में दस महीने लग गए।

लेकिन, भारतीय नौसेना के लिए यह व्यापक मरम्मत महंगी काफी साबित हुई, जिससे पहली परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी के लिए एक खतरनाक स्थिति पैदा हो गई, जिसकी सेवा लागत पहले ही लगभग 3 बिलियन डॉलर हो चुकी थी। पर्यवेक्षकों ने कहा, कि यह शर्मनाक और अविश्वसनीय है, कि एक लापरवाह मानवीय गलती एक परमाणु पनडुब्बी को निष्क्रिय बना सकती है।

INS अरिहंत, रूसी अकुला-1 सीरिज की परमाणु हमला पनडुब्बी पर आधारित है, जिसे 12 K-15 शॉर्ट-रेंज परमाणु मिसाइलों या चार K-4 मध्यम-रेंज परमाणु मिसाइलों को समायोजित करने के लिए लंबा किया गया था। हालांकि, यह घटना अभी भी भारतीय नौसेना के रैंकों के भीतर हलचल पैदा कर रही थी, लेकिन इस हादसे ने भारतीय नौसेना को लेकर काफी सवाल उठाए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स और नौसेना विश्लेषकों ने जब इस बात पर चिंता जताई, कि पनडुब्बी में हैच नहीं है, तो विवाद खड़ा हो गया। अरिहंत को रूस के डबल-हॉल्ड, सीलबंद परमाणु रिएक्टर पोत के मॉडल पर बनाया गया है। परमाणु पनडुब्बी वाले किसी भी अन्य देश के पास यह सिस्टम नहीं है, सिवाय सबसे हाल की फ्रांसीसी परमाणु पनडुब्बी के, जिसमें रिएक्टर के ऊपर एक हैच है, जिससे पनडुब्बी में ईंधन भरने में तेजी आती है।

लेकिन, कुछ विश्लेषकों ने हैच के बारे में इन दावों को संदिग्ध बताया है। इसके अलावा, भारत सरकार ने घटना को लेकर कोई सफाई नहीं जी। जब संसद में दुर्घटना के बारे में पूछा गया, तो तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री (एमओएस) सुभाष भामरे ने कहा था, कि "राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सदन के पटल पर जानकारी का खुलासा नहीं किया जा सकता है।"

आईएनएस अरिहंत निस्संदेह अपने विरोधियों के खिलाफ भारत की परमाणु क्षमता का एक महत्वपूर्ण घटक है। 2018 में, पनडुब्बी ने अपना पहला 20-दिवसीय निवारक गश्त पूरा किया। लेकिन, आईएनएस अरिहंत के बारे में इतनी गोपनीयता है कि कोई भी नौसेना अधिकारी, सेवारत या सेवानिवृत्त, ऑन-रिकॉर्ड या ऑफ-रिकॉर्ड, दुर्घटना के बारे में यूरेशियन टाइम्स के साथ अपने इनपुट साझा करने के लिए सहमत नहीं हुआ।

अरिहंत पर यह घटना उस घटना के तुरंत बाद हुई थी, जब रूस से लीज पर ली गई नेरपा क्लास की परमाणु पनडुब्बी आईएनएस चक्र के अक्टूबर 2017 में विशाखापत्तनम बंदरगाह में प्रवेश करते समय सोनार गुंबदों को नुकसान पहुंचा था।

हालांकि, आईएनएस चक्र का काम ट्रेनिंग और स्कॉर्टिंग का है, लेकिन आईएनएस अरिहंत को परमाणु मिसाइल ले जाने के लिए माना जाता है। लेकिन, इन लापरवाहियों को हटाना होगा, ताकि देश की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता ना हो।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+