Indonesia: समुद्र में डूबने वाली है जकार्ता, सरकार बसाने जा रही नई राजधानी, जानिए क्यों हो रहा विरोध?
नुसंतारा नेशनल कैपिटल अथॉरिटी के प्रमुख बंबांग सुसांतोनो ने कहा कि नई राजधानी शहर 'फॉरेस्ट सिटी' की अवधारणा को लागू करेगी, जिसमें 65 फसदी क्षेत्र पर पुन: जंगल लगाए जाएंगे।

Image: Oneindia
ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज के चलते दुनिया के कई शहरों पर डूबने का खतरा मंडरा रहा है। डूबने के खतरे वाली लिस्ट में इंडोनिशिया की राजधानी जकार्ता भी शामिल है। कई रिपोर्टों में तो जकार्ता को दुनिया का सबसे तेजी से डूबने वाला शहर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 2050 तक शहर का एक तिहाई हिस्सा जलमग्न हो सकता है। ऐसे में खतरे को देखते हुए इंडोनशियाई सरकार अपनी राजधानी जकार्ता को बदलकर बोर्नियो द्वीप पर ले जाने की प्रक्रिया में जुट गई है।
जकार्ता पर रहना हुआ मुश्किल
भीड़भाड़, समुद्री जल में डूबने और भूकंप के खतरे जैसे पर्यावरणीय मुद्दों की वजह से अब जकार्ता पर रहना खतरनाक बनता जा रहा है। जकार्ता के अधिकांश हिस्से के जावा सागर में डूब जाने से पहले सरकार चाहती हैं कि वह नई राजधानी का काम पूरा कर ले। इंडोनेशियाई अधिकारियों का दावा है कि नया महानगर एक 'टिकाऊ फोरेस्ट सिटी' होगा जहां विकास के लिए पर्यावरण की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए सरकार द्वारा नई राजधानी बोर्नियो द्वीप को 2045 तक कार्बन-न्यूट्रल बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
जकार्ता पर बढ़ता जा रहा दबाव
जकार्ता की आबादी करीब 1 करोड़ है, जबकि इसके आसपास लगभग 3 करोड़ और लोग रह रहते हैं। अत्यधिक जनसंख्या के दबाव से शहर की हवा और भूजल बेहद प्रदूषित हो चुके हैं। अनियंत्रित भूजल निकासी ने समस्या को और बढ़ा दिया है। जावा सागर का फैलाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इससे बाढ़ की समस्या बढ़ती जा रही है। हवा भी उतनी दूषित है जिससे लोग दमघोंटू हवा में सांस लेने को मजबूर हो चुके हैं। ऐसी स्थिति में राष्ट्रपति जोको विडोडो ने जकार्ता को परेशान करने वाली समस्याओं से निजात दिलाने के लिए एक नई राजधानी के निर्माण की कल्पना की है।
नई राजधानी नुसंतारा कैसी होगी?
विडोडो की योजना बोर्नियो द्वीप पर नुसंतारा शहर स्थापित करने की है। नुसंतारा शब्द का अर्थ है 'द्वीपसमूह'। नई राजधानी में जनसंख्या सीमित रखे जाने की बात कही गई है। इस नई राजधानी में सरकार को सभी चीजें जैसे कि सरकारी भवन, आवास आदि नए सिरे से बनाई जाएंगी। पहले अनुमान लगाया गया कि 15 लाख सिविल सेवकों को जकार्ता से हटाकर 2,000 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में नई राजधानी में रखा जाएगा, हालांकि अभी मंत्रालय और सरकारी एजेंसियां इस संख्या को अंतिम रूप देने पर काम कर रही हैं। इस शहर में पर्यावर्ण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहर में वनों का हिस्सा 65 से कम न हो।
विशेषज्ञ क्यों हैं चिंतित?
बोर्नियो द्वीप पर विशाल शहर बसाने को लेकर विशेषज्ञ चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि पर्यावरण पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा। यह 256,000 हेक्टेयर इलाका फिलहाल वनमानुषों, तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के लिए घर जैसा है। वन-पर्यावरण पर काम करनेवाली इंडोनेशिया की संस्था फॉरेस्ट वॉच ने नवंबर 2022 में ही एक रिपोर्ट में इसको लेकर चेतावनी दी थी। पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि राजधानी बड़े पैमाने पर वनों की कटाई का कारण बनेगी जिससे वहां रहने वाले कई प्रजातियों के जानवर और आदिवासियों के आवास छिनेंगे और इससे इनके विलुप्त होने का खतरा बढ़ जाएगा। एपी ने अपने डेटा विश्लेषण से बताया है कि नई राजधानी के निर्माण के कारण आने वाले वक्त में और अधिक गर्मी बढ़ने की उम्मीद है।
आमलोगों के जाने की इजाजत नहीं
फिलहाल सरकार ने नई राजधानी की साइट तक आमलोगों की पहुंच को सीमित कर दिया है। नई राजधानी के निर्माण के कारण 100 से अधिक बालिक आदिवासियों और कम से कम पांच गांवों को हटाया जा रहा है। दूसरी ओर नई राजधानी के निर्माण स्थल का विस्तार होने पर और बसे गांवों को भी स्थानांतरित किए जाने की आशंका है। स्थानीय नेताओं के अनुसार, सरकार ने समुदाय के लोगों को मुआवजा लेकर गांव छोड़ने के लिए मजबूर किया है। वहीं, सरकार का दावा है कि नई राजधानी को स्थानीय समुदाय के नेताओं से समर्थन लेने के बाद ही विकसित किया जा रहा है।
अगले साल होगा उद्घाटन
टाइम की रिपोर्ट के मुताबिक स्थानीय नेता सिबुकदीन ने कहा कि सरकार आदिवासियों पर दबाव डाल रही है कि वो अपनी जमीन दे। बिना जमीन के कीमत की गणना किए लोगों को बेहद कम मुआवजा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोग मुआवजा लेने के लिए मजबूर हैं। इंडोनेशिया के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 17 अगस्त 2024 को शहर का उद्घाटन होने की उम्मीद है। नई राजधानी के अधिकारियों ने कहा कि साल 2045 में इंडोनेशिया अपना सौंवा वर्षगांठ मनाएगा। हालांकि ऐसे दावे किए जा रहे थे कि नई राजधानी को पूर्ण रूप से 2045 तक बना दिया जाएगा लेकिन फिलहाल यह संभव नहीं दिखता।
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