मुसलमानों पर ओबामा की बात भारत को माननी चाहिए.. चीनी अखबार ग्लोबल टाइम्स की मोदी सरकार को सलाह

China on Barack Obama Row: भारतीय मुस्लिमों पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के बयान को लेकर भारत में काफी बवाल मचा और भारत सरकार के मंत्रियों की तरफ से सख्त प्रतिक्रियाएं दी गईं। लेकिन, अब चीन को भी मुसलमानों का दर्द दिखने लगा है और चीन ने बराक ओबामा के बयान पर भारत को सलाह देने की कोशिश की है।

शिनजियांग प्रांत में लाखों मुस्लिमों की जिंदगी बर्बाद कर देने वाले चीन की तरफ से बराक ओबामा के बयान पर प्रतिक्रिया दी गई है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में भारत को नसीहत देने की कोशिश की है।

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ग्लोबल टाइम्स ने क्या लिखा है?

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है, कि "जहां वाशिंगटन ने अभूतपूर्व उत्साह के साथ भारतीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का स्वागत किया, वहीं पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कुछ अप्रिय टिप्पणियां कीं हैं। सीएनएन के साथ एक इंटरव्यू में, उन्होंने कहा, कि यदि भारत अपने मुसलमानों की रक्षा नहीं करता है, तो "इस बात की प्रबल संभावना है कि भारत किसी बिंदु पर अलग होना शुरू कर देगा।"

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "ओबामा के इस बयान का मतलब कुछ भी रहा हो, लेकिन उन्होंने भारत के राष्ट्रीय शासन में एक संवेदनशील मुद्दे, अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को छुआ है।"

चीने के सरकारी अखबार ने लिखा है, कि "भारत एक बहु-जातीय देश है और 1947 में आजादी के बाद से, भारत में जातीय संघर्ष के कारण होने वाले रक्तपात और अस्थिरता का कोई अंत नहीं हुआ है।" ग्लोबल टाइम्स ने इसके अलावा असम का भी जिक्र किया है और लिखा है, कि "मंगलवार को, कुछ कार्यकर्ता संगठनों ने असम राज्य के दक्षिणी हिस्सों में हड़ताल की योजना बनाई। 2022 में एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन के बावजूद हड़ताल की योजना बनाई गई और फिर धेमाजी जिले में गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई, जिससे तनाव फिर से लौट आया है।"

ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में देश के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के क्राइम इन इंडिया-2021 रिपोर्ट का हवाला दिया है और लिखा है, कि असम में दंगों की 780 घटनाएं हुई हैं, जिसमें 1,498 लोग पीड़ित हुए हैं।

असम में आग लगाने की कोशिश में चीन!

ग्लोबल टाइम्स के संपादकीय में बार बार असम का जिक्र किया गया है, जिससे पता चलता है, कि असम को लेकर चीन की मंशा क्या है।

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि "दरअसल, पूर्वोत्तर भारत के अन्य राज्यों में भी अक्सर गंभीर दंगे होते रहते हैं।" अखबार के संपादक ने लिखा है, कि "हालाकि, मैंने असम का उल्लेख इसलिए किया, क्योंकि असम और म्यांमार के पास चीन के युन्नान प्रांत के पुएर शहर के बीच समानताएं हैं, जहां मैंने हाल ही में दौरा किया था।"

यानि, ग्लोबल टाइम्स ने असम को चीन से जोड़ने की कोशिश की है और लिखा है, कि असम में रहने वाले कुछ जातीय समुदाय चीन के पुएर में भी रहते हैं। उन्होंने लिखा है, कि चीन के पुएर में 14 जातीय समूह हैं।

उन्होंने असम से चीनी क्षेत्र की तुलना करते हुए लिखा है, कि "दोनों क्षेत्रों में ज़ोमिया क्षेत्र की विशेषताएं हैं जिनका मैंने उल्लेख किया है। एक अन्य सामान्य कारक यह है, कि दोनों क्षेत्र चाय उत्पादन के लिए प्रसिद्ध हैं। असम काली चाय का उत्पादन करता है, जबकि पुएर प्राचीन चाय के पेड़ों से चुनी गई चाय की पत्तियों से बने चाय केक का उत्पादन करता है।"

इसके अलावा भी ग्लोबल टाइम्स ने अपने आर्टिकल में हिन्दू और मुस्लिमों को लेकर बात की है, लेकिन ग्लोबल टाइम्स शिनजियांग प्रांत में मुस्लिमों के खिलाफ होने वाले अत्याचार पर खामोश रहा।

ग्लोबल टाइम्स ने अपने आर्टिकल के अंत में लिखा है, कि "इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, कि अमेरिका भारत के लोकतंत्र की कितनी भी प्रशंसा करता हो, अगर देश के विभिन्न जातीय समूह मिलकर विकास नहीं करते हैं, विकास के लाभांश का आनंद नहीं लेते हैं, और धार्मिक आधार पर विभाजित रहते हैं, तो भारत का आधुनिकीकरण टिकाऊ नहीं होगा और हमेशा विभाजन की संभावना का सामना करना पड़ेगा।"

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