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भारत का AMCA नहीं है 5th जेनरेशन लड़ाकू विमान? चीन-पाकिस्तान के स्टील्थ फाइटर जेट्स से कैसे होगा मुकाबला

AMCA 5th-Gen Fighter Jet: कई महीनों की देरी के बाद आखिरकार सुरक्षा पर भारत सरकार की कैबिनेट समिति ने 7 मार्च को इंडियन एयरफोर्स के लिए 5वीं पीढ़ी के एडवांस मीडियम कॉन्बेट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोग्राम के डिजाइन को मंजूरी दे दी, जो भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए इस महीने की सबसे बड़ी खबर है।

सरकार से मंजूरी मिलने के बाद अब AMCA को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) विकसित करेगा। DRDO, एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी समेत कुछ निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियों के साथ साझेदारी में स्टील्थ जेट और संबंधित तकनीक विकसित करेगी।

indian amca programe

AMCA के डिजाइन को देर से मंजूरी मिलने के बाद भी भारत उन देशों की विशिष्ट लीग में शामिल होने की कोशिश कर रहा है, जिन्होंने (अमेरिका, चीन और रूस) पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट को विकसित कर लिया है, या फिर पांचवीं पीढ़ी के युद्धक विमान (दक्षिण कोरिया और तुर्की) अभी विकसित कर रहे हैं।

AMCA प्रोग्राम पर तारीख पर तारीख

यूरेशियाई टाइम्स की एक रिपोर्ट में भारतीय वायु सेना के अनुभवी विजेंदर के ठाकुर ने AMCA प्रोग्राम में होने वाली देरी को लेकर सरकार की थोड़ी आलोतना की थी और सवाल किया था, कि क्या एएमसीए वास्तव में 5वीं पीढ़ी का विमान होगा?

AMCA प्रोग्राम को लेकर टाइमलाइन पहली बार साल 2019 में इंडियन एयरफोर्स के सामने पेश की थी और भारतीय वायुसेना ने स्टील्थ फाइटर जेट का पूरा समर्थन किया था और अधिकारियों ने इसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट करार दिया था और जुलाई 2020 में इंडियन एयरफोर्स ने इस प्रोग्राम को 'very tight' कहा था।

लेकिन, DRDO और HAL के वरिष्ठ अधिकारियों ने इंडियन एयरफोर्स की चिंताओं को नज़रअंदाज कर दिया। जनवरी 2021 में, एचएएल के अध्यक्ष आर माधवन ने कहा, "विमान का प्रोटोटाइप 2026 तक तैयार होने की संभावना है और इसका उत्पादन 2030 तक शुरू हो सकता है!"

वहीं, सितंबर 2021 में, एडीए के प्रोग्राम डायरेक्टर गिरीश एस देवधरे ने 2025 में पहली उड़ान का अनुमान लगाकर उत्साह बढ़ाया! देवधरे ने कहा था, कि "हम 2024 में रोल-आउट और 2025 में पहली उड़ान की योजना के साथ अगले साल के मध्य तक एक महत्वपूर्ण डिजाइन समीक्षा की ओर बढ़ रहे हैं।"

जबकि, AMCA प्रोग्राम के डायरेक्टर डॉ. एके घोष ने डेफएक्सपो-2022 के दौरान कहा था, कि "एक बार परियोजना की मंजूरी मिल जाती है, तो उसके बाद पहला प्रोटोटाइप तीन साल में और पहली उड़ान उसके एक से डेढ़ साल में शुरू की जा सकती है।"

लेकिन, इंडियन एयरफोर्स को इन तमाम दावों पर यकीन नहीं हुआ।

नवंबर 2022 में, भारतीय वायु सेना के प्रमुख, एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने एक सलाह दी। उन्होंने स्वदेशी विकास के समय सीमा से बाहर होने की स्थिति में "वैकल्पिक सिस्टम और सेंसर" विकसित करने के लिए विदेशी कॉन्ट्रैक्ट करने की सलाह दी।

भारतीय वायुसेना का शक सही था, क्योंकि 14 फरवरी 2023 को डीआरडीओ के अध्यक्ष समीर कामत ने कहा, कि AMCA की पहली उड़ान में "सात साल लग सकते हैं और इस अनुमान को बढ़ाकर 10 साल किया जा सकता है।" यानि, AMCA की पहली उड़ान अब 2034-35 तक होने की उम्मीद की जा सकती है।

क्या पांचवी पीढ़ी का विमान होगा AMCA?

AMCA को लेकर डीआरडीओ लगातार तारीख पर तारीख देता रहा, लेकिन असल सवाल अब ये है, कि क्या AMCA प्रोग्राम पांचवीं पीढ़ी का फाइटर जेट होगा? यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि ये पांचवी पीढ़ी का नहीं, बल्कि 4.5 जेनरेशन का फाइटर जेट होगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, AMCA को दो चरणों में विकसित करने का प्रस्ताव है। पहले चरण में जो डेवलपमेंट होगा, वो AMCA Mk-1 होगा जो अमेरिका के जीई-414 इंजन से संचालित होगा। जबकि, दूसरे चरण के तहत जिस फाइटर जेट का निर्माण होगा, वो AMCA Mk2 होगा, जिसमें एक एडवांस, ज्यादा शक्तिशाली इंजन की सुविधा होगी, जिसे अभी तक चुने गये विदेशी भागीदार की मदद से विकसित किया जाएगा।

लेकिन, AMCA Mk-1 में कम से कम तीन महत्वपूर्ण फीचर्स मौजूद नहीं होंगे।

1- सुपरक्रूज़
2- सुपरमैन्युवेरेबिलिटी
3- सेंसर फ्यूजन

इसके अलावा, AMCA Mk-1 में सीमित स्टील्थ की शक्ति होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का AMCA MK-1 अमेरिकी फाइटर जेट F-35 से प्रेरित है, जिसमें पीछे की ओर कोई रेडियो फ्रीक्वेंसी और स्टील्थ नहीं है, लेकिन सप्रेस्ड IR सिग्नेचर है। AMCA में कोई रियर एस्पेक्ट स्टील्थ सुविधा नहीं होगी - न तो आरएफ और न ही आईआर।

AMCA को डिजाइन करते समय प्लान के मुताबिक, 110 kN इंजन के बजाय 98 kN GE F414 इंजन का उपयोग किया जा सकता है, जिसका मतलब ये हुआ, कि इसमें सुपरक्रूज की क्षमता नहीं होगी, वहीं थ्रस्ट वेक्टरिंग की कमी सुपरमैन्युवेरेबिलिटी की संभावना को खत्म कर देती है, जबकि सप्रेशन के बिना बड़े एग्जॉस्ट नोजल रियर-एस्पेक्ट स्टील्थ काम नहीं करते हैं।

सेंसर फ्यूजन

पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भारी प्रतिस्पर्धा वाले प्रतिद्वंद्वी हवाई क्षेत्र में घुसने और लक्ष्यों का पता लगाने, निशाने का पता लगाने, उसे बेस में भेजने, वायु, भूमि और समुद्र-आधारित हथियार प्रणालियों के साथ कॉर्डिनेट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

भारी प्रतिस्पर्धा वाले हवाई क्षेत्र में दुश्मन के रडार को चकमा देते हुए घुसने और लक्ष्य पर हमला करने के लिए 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान में सेंसर फ़्यूज़न का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि दुश्मन के रडार इस फाइटर जेट का पता नहीं लगा पाए, लेकिन ये विमान युद्ध की तमाम परिस्थितियों की जानकारी कलेक्ट कर सके।

लिहाजा, सेंसर फ़्यूज़न अलग अलग ऑनबोर्ड सेंसर - रडार, आईआर और ऑप्टिकल - से इनपुट को एक डिस्प्ले में फ़्यूज़ करता है। Su-30MKI और LCA Mk-1A जैसे एडवांस चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में सेंसर फ़्यूज़न की अलग-अलग डिग्री होती है, लेकिन ये स्थितिजन्य जागरूकता प्रदान करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

DRDO का लक्ष्य MWF LCA Mk.2 के साथ स्टेज 2 (स्थिति जागरूकता) सेंसर फ्यूजन को फील्ड करना है। पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों में स्टेज 3 (निर्णय सहायता) या स्टेज 4 (स्वचालित निर्णय) सेंसर फ़्यूज़न की सुविधा होने की उम्मीद है।

डीआरडीओ फिलहाल अभी भी सक्षम आरएफ, आईआर और ऑप्टिकल सेंसर विकसित करने में संघर्ष कर रहा है। लिहाजा, स्टेज 3 और स्टेज 4 स्थितिजन्य जागरूकता हासिल करने में अभी डीआरडीओ को काफी वक्त लगेगा। और यही वजह है, कि इंडियन एयरफोर्स के चीफ मार्शल ने नवंबर महीने में सेंसर और सेंसर फ्यूजन डेवलपमेंट के लिए किसी और देश के साथ करार करने की सलाह दी थी।

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