Maldives: मालदीव से लौटे 76 भारतीय सैनिकों की जगह कौन? विदेश मंत्री मूसा जमीर ने बताया
मालदीव में मोहम्मद मुइज्जू के राष्ट्रपति बनने के बाद से भारत-मालदीव के बीच रिश्ते में कड़वाहट जरूर आई, लेकिन अब द्वीप इस कड़वाहट को मिटाने में लगा है। दरअसल, मालदीव के विदेश मंत्री ने एक बयान में कहा कि मालदीव के भारत के बीच रिश्ते बेहद मायने रखते हैं।
मालदीव के विदेश मंत्री मूसा जमीर ने इस हफ्ते गुरुवार को जारी एक बयान में भारत के साथ संबंधों को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भारत के साथ मालदीव के रक्षा संबंध सैन्य कर्मियों से परे हैं। दोनों देश हिंद महासागर को एक शांतिपूर्ण स्थान बनाने के लिए मिलकर काम करेंगे।

8 मई को भारत पहुंचे मालदीव के मंत्री ने कहा कि जिन प्लेटफार्मों को भारतीय सैन्यकर्मी संभाल रहे थे, उन्हें नागरिक संभालेंगे। उन्होंने कहा कि 76 भारतीय सैन्य कर्मियों की जगह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नागरिक कर्मचारियों ने ली है। एक दिन पहले, मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने बताया था कि भारत ने निर्धारित समय से पहले ही अपने सभी सैनिकों को वापस बुला लिया है।
बता दें कि मुइज्जू सरकार ने भारतीय सैन्य कर्मियों की वापसी के लिए 10 मई तक की समयसीमा निर्धारित की थी। राष्ट्रपति मुइज्जू को एक चीन समर्थक नेता के तौर पर देखा जाता है। पिछले साल राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान मालदीव में तैनात 90 भारतीय सैनिकों को वापस भेजना ही मुइज्जू का संकल्प था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शनिवार को भारत दौरे से वापस मालदीव पहुंचे विदेश मंत्री मूसा जमीर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। जिसमें उन्होंने बताया कि सात से नौ मार्च के बीच गन से 26 सैनिकों को वापस बुलाया गया। हनीमाधू से सात से 19 अप्रैल के बीच, 25 सैनिकों को वापस बुलाया गया है।
मूसा जमीर ने कहा, "मालदीव में भारतीय सैनिकों के प्रवास की अवधि का जिक्र विनिमय पत्र में किया गया है। यह अवधि लंबे समय तक रहेगी क्योंकि इस विनिमय पत्र में कोई संशोधन नहीं किया गया है। आवश्यकता के आधार पर हम भारत सरकार के साथ आगे की बातचीत में शामिल होंगे।"












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