'अंतिम दिन गिन रहा डॉलर, जल्द ही पूरी दुनिया पर रुपया करेगा राज', अमेरिका अर्थशास्त्री ने किया बड़ा दावा
Nouriel Roubini: अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी के मुताबिक, भारतीय रुपया आने वाले समय में नया डॉलर हो सकता है। भारतीय रुपया डॉलर की जगह लेने की ताकत रखता है।

Image: Oneindia
न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में प्रोफेसर एमेरिटस नूरील रूबिनी ने दावा किया है कि भारतीय रुपया आने वाले समय में नया डॉलर हो सकता है। इकॉनमिक टाइम्स को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि भारतीय अपनी जिस मुद्रा रुपये के जरिए दुनिया के साथ होने वाले कारोबार को करता है वो रुपया भारत के लिए वेहकिल करेंसी बन सकता है। ये रुपया पेमेंट का माध्यम हो सकता है, ये एक स्टोर वैल्यू हो सकता है, उन्होंने कहा कि आने वाले समय में रुपया ग्लोबल व्यापार की कई मुद्राओं में से एक में शामिल हो सकता है।
खतरे में डॉलर की स्थिति
डॉक्टर डूम के नाम से चर्चित अर्थशास्त्री नूरील रूबिनी के मुताबिक, आने वाले समय में जल्द ही डॉलराइजेशन की प्रक्रिया होगी। उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका की ग्लोबल इकोनॉमी का हिस्सा 40 से 20 फीसदी तक गिर रहा है। अर्थशास्त्री ने दावा किया कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति के उद्देश्यों के लिए डॉलर को हथियार बना रहा है। आपको बता दें कि इस महीने की शुरुआत में, एक इंटरव्यू में नूरील रूबिनी ने दावा किया था कि अब दुनिया की मुख्य मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर की स्थिति खतरे में है।
भारत में विकास की रफ्तार
अर्थशास्त्री ने कहा कि अब आने वाले समय में भारत में विकास की रफ्तार दिखेगी। नूरील रूबिनी के मुताबिक, भारत में 7 फीसदी का इजाफा देखा जाएगा। उनके मुताबिक, भारत की प्रति व्यक्ति आय इतनी कम है कि वास्तव में सुधार के साथ, निश्चित रूप से 7 प्रतिशत संभव है। लेकिन आपको और भी कई ऐसे आर्थिक सुधार करने होंगे जो उस विकास दर को हासिल करने के लिए ढांचागत हों। वहीं अगर भारत इसे हासिल कर लेता है तो इसे कम से कम कुछ दशकों तक बनाए रख सकता है।
की थी 2008 वित्तीय संकट की भविष्यवाणी
आपको बता दें कि नूरील रूबिनी वही अर्थशास्त्री हैं, जिन्होंने सबसे पहले 2008 में आने वाले वित्तीय संकट की सटीक भविष्यवाणी की थी और उन्होंने जब आर्थिक संकट के बारे में सबसे पहले बात की थी, तो किसी ने उनकी बातों को सीरियस तरीके से नहीं लिया, लेकिन उसके बाद उनकी एक एक बात सही साबित हुई और अमेरिका में कई बैंक बंद हो गये और दुनिया में हजारों व्यवसाय हमेशा के लिए बंद हो गये। कई उद्योगपतियों ने तो खुदकुशी तक कर ली और कितने लाख लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा, इसकी कोई गणना नहीं है।












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