राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ 'दुर्लभ' प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, लेकिन शर्तों के साथ होंगे सवाल
Modi-Biden Press Conference: भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ मिलकर दुर्लभ प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दोनों नेता पत्रकारों के सवालों का जवाब देंगे। व्हाइट हाउस ने दोनों नेताओं के साथ होने वाली इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की पुष्टि की है। व्हाइट हाउस के एक सीनियर अधिकारी ने इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को 'बड़ी बात' कहा है।
अभी तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं किया है, जिसको लेकर विरोधी लगातार उनपर हमलावर रहते हैं, लिहाजा व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देना 'असामान्य' होगा।

पीएम मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर नजर
लगभग नौ साल पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेन्द्र मोदी ने भारत में एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित नहीं किया है। मई 2019 में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाग लिया था, लेकिन उन्होंने पत्रकारों के सवाल नहीं लिए। व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, कि व्हाइट हाउस समझता है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस एक "बड़ी बात" है।
जॉन किर्बी ने कहा, कि "हम सिर्फ आभारी हैं, कि प्रधानमंत्री मोदी यात्रा के अंत में एक प्रेस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, कि "हमें लगता है कि यह महत्वपूर्ण है, और हमें खुशी है कि वह भी इसे महत्वपूर्ण मानते हैं।" किर्बी ने कहा, कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के प्रारूप में अमेरिकी प्रेस से एक प्रश्न और एक भारतीय पत्रकार से एक प्रश्न शामिल होगा।
आपको बता दें, कि जब व्हाइट हाउस में किसी विदेशी नेता का प्रेस कॉन्फ्रेंस होता है, तो व्हाइट हाउस काफी सख्ती से उसे नियंत्रित करता है। इससे पहले जिन वैश्विक नेताओं का भी प्रेस कॉन्फ्रेंस व्हाइट हाउस में हुआ है, उनमें शामिल होने वाले पत्रकारों के नाम पहले से ही तय किए गये हैं और सीमित संख्या में सवाल पूछने की इजाजत दी जाती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही होने वाला है, क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी से भारत और अमेरिका संबंधों के अलावा, मानवधिकार, लोकतंत्र, विपक्षी नेताओं का दमन से संबंधित आरोपों पर सवाल पूछे जा सकते हैं।
मोदी सरकार पर लगातार हिन्दूवादी होने के आरोप लगते रहे हैं और मोदी सरकार पर आरोप लगे हैं, कि उनके कार्यकाल में भारत में लोकतांत्रिक स्थिति में गिरावट आई है और राष्ट्रपति जो बाइडेन पर भी डेमोक्रेटिक नेताओं ने मोदी के सामने लोकतंत्र और मानवाधिकार जैसे मुद्दे उठाने की मांग की है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने ये साफ कर दिया है, कि राष्ट्रपति जो बाइडेन, पीएम मोदी के सामने मानवाधिकार या लोकतंत्र को लेकर कोई लेक्चर नहीं देने वाले हैं।
लेकिन, माना जा रहा है, कि मानवाधिकार प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक विषय हो सकता है।
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से पीएम मोदी पांच बार संयुक्त राज्य अमेरिका की यात्रा कर चुके हैं, लेकिन यह यात्रा, प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिका की पहली राजकीय यात्रा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त राज्य अमेरिका की इस यात्रा को ऐतिहासिक यात्रा कहा जा रहा है और इस यात्रा, इसकी संभावनाओं, क्षमता को दुनिया के दो महानतम लोकतंत्रों के बीच बनने वाले भविष्य के बारे में बहुत कुछ लिखा जा रहा है। माना जा रहा है, कि पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद भारत और अमेरिका के बीच के संबंध नई दिशा में मुड़ सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल होने वाले हैं, जिन्हें दो बार अमेरिकी संसद को संबोधित करने के मौका मिला है और ये दुर्लभ सम्मान माना जाता है।
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