प्रमिला जयपाल भी निकली पाक की 'एजेंट'... मोदी का विरोध करने को 70 सांसदों से लिखवाई चिट्ठी, सच जानिए

PM Modi US Visit: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमेरिका यात्रा का आज दूसरा दिन है और व्हाइट हाउस में पीएम मोदी का भव्य स्वागत किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस में आज राजकीय डिनर कार्यक्रम में भाग लेंगे, जिसका आयोजन राष्ट्रपति बाइडेन और उनकी पत्नी जिल बाइडेन ने किया है।

एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए अमेरिका ने रेड कार्पेट बिछा रखा है, तो दूसरी तरफ अमेरिका के कुछ ऐसे सांसद भी है, जो भारत विरोध में पगला चुकी हैं और ऐसी ही एक सांसद हैं, भारतीय मूल की प्रमिला जयपाल। कहने को तो प्रमिला जयपाल भारतीय मूल की हैं, लेकिन उनकी हरकतें देखकर भारत विरोधियों जैसी हैं। दरअसल, प्रमिला जयपाल ने अमेरिका के 70 सांसदों और नेताओं से उस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करवाएं हैं, जिसमें मानवाधिकार, प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतंत्र जैसे मुद्दों पर प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछने का आग्रह जो बाइडेन से किया गया है।

Pramila Jayapal

लेकिन, अब खुलासा हुआ है, कि प्रमिला जयपाल भी असल में उसी टूलकिट का हिस्सा हैं, जिसे भारत विरोधियों ने कई सालों से लगातार भारत की छवि को धूमिल करने के लिए इस्तेमाल किया है और उसके बदले में उन्हें कई तरह के फायदे होते हैं।

प्रमिला जयपाल का मकसद जानिए

इन्वेस्टिगेटिंग थिंक टैंक 'डिस इंफो लैब' की रिपोर्ट में प्रमिला जयपाल की नीयत पर गंभीर सवाल उठाए गये हैं। 'डिस इंफो लैब' ने कहा है, कि इससे पहले, प्रमिला जयपाल ने 2019 में कश्मीर पर भी इसी तरह की चिंता दिखाई थी। और दिलचस्प बात ये है, कि उसी वक्त अमेरिका स्थिति एक लॉबी फर्म 'हालैंड एंड नाइट' को पाकिस्तान सरकार ने हायर किया था।

'हालैंड एंड नाइट' की ही दस्तावेजों के मुताबिक, इस फर्म में जिन लोगों से भारत का विरोध करने के लिए संपर्क किया था, उसमें प्रमिला जयपाल का भी नाम शामिल था।

प्रमिला जयपाल ने अगस्त से दिसंबर (2019) के बीच कश्मीर पर काफी अनाप-शनाप बात की, जिसमें अमेरिकी कांग्रेस को 'पत्र' लिखना और कश्मीर पर प्रस्ताव पारित करना (दिसंबर'19) भी शामिल था।

लेकिन, आश्चर्य की बात ये थी, कि जनवरी 2020 में प्रमिला जयपाल का कश्मीर प्रेम दिखना अचानक बंद हो गया और उससे भी दिलचस्प बात ये थी, कि दिसंबर 2020 में पाकिस्तान सरकार का 'हालैंड एंड नाइट' फर्म के साथ कॉन्ट्रैक्ट खत्म हो गया। यानि, जिस प्रमिला जयपाल ने कश्मीर पर ट्वीट्स की बरसात कर दी थी, उनके ट्वीट जनवरी 2020 के बाद से दिखने बंद हो गये।

सब डॉलर का खेल है....

इस दौरान प्रमिला जयपाल के साथ इस्लामिक संगठनों से और मजबूत होते जाते हैं और प्रमिला जयपाल अपने राजनीतिक अभियानों के लिए इस्लामवादी संगठनों से भारी फंड हासिल करती हैं। साल 2014 से साल 2018 के बीच प्रमिला जयपाल ने काउंसिल ऑन अमेरिकन इस्लामिक रिलेशन्स (CAIR) और मुस्लिम ब्रदरहुड फ्रंट से 20 हजार डॉलर प्राप्त किए, जिसका नाम 2007 में यूएस में टेरर-फंडिंग केस में आया था!

प्रमिला जयपाल एक बार फिर से फरवरी 2023 में भारत को लेकर अचानक एक्टिव हो जाती है और उन्हें अचानक भारत में जातिवादी मुद्दे याद आने लगते हैं। वो अचानक भारत में जातिवाद को लेकर काफी चिंतित हो जाती हैं और सिएटल के 'जाति प्रतिबंध' प्रस्ताव का समर्थन करती नजर आती हैं।

इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री मोदी के भारी विरोधी रहे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस लेकर आते हैं और ये कतई संयोग नहीं हो सकता है, कि सोरोस फंड मैनेजमेंट से साल 2018 से 2022 के बीच प्रमिला जयपाल को 19 हजार डॉलर मिले थे।

आश्चर्य की बात नहीं है, कि प्रमिला जयपाल ने जो 70 सांसदों और सीनेटर्स से अपनी प्रोपेगेंडा चिट्ठी पर दस्तखत करवाए हैं, उसका इस्तेमाल पाकिस्तान से गहरे ताल्लुकात रखने वाले इस्लामवादी संहठन, जैसे इंडियन-अमेरिकी मुस्लिम परिषद (IAMC), हिंदू फॉर ह्यूमन राइट्स (HfHR), PolisProject जैसे संस्थानों के लिए एक उपकरण की तरह काम करता है।

भारत में भी कई पत्रकार ऐसे हैं, जो शायद इन तथ्यों को नहीं जानते और प्रमिला जयपाल जैसी सांसद, जो डॉलर के लिए किसी भी खेमे के लिए अपनी ईमानदारी बेचने के लिए तैयार रहती हैं, गाहे-बगाहे उनके प्रवक्ता की तरह बात करने लगते हैं।

प्रमिला जयपाल कौन हैं?

प्रमिला जयपाल, भारतीय मूल की अमेरिकी सांसद हैं और अमेरिका की उन सांसदों और नेताओं की फेहरिस्त में आती हैं, जो अपने भारत विरोधी एजेंडे के लिए जानी जाती हैं। प्रमिला अकसर भारत के खिलाफ जहर उगलती रहती हैं। लिहाजा, भारत ने उन्हें भाव देना बिल्कुल बंद कर दिया है और पिछले दिनों प्रमिला जयपाल ने इस बात को लेकर बौखलाहट भी दिखाई थी, जब इसी साल फरवरी में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया था।

प्रमिला जयपाल भारत सरकार के कश्मीर से अनुच्छेद 370 निरस्त करने के फैसले की जमकर आलोचना करते हुए एक कैम्पेन तक चला चुकी हैं। जिसमें उन्होंने मोदी सरकार के फैसले का जोरदार तरीके से विरोध करने की कोशिश की थी, और उनका साथ अमेरिका की मुस्लिम सांसदों ने दिया था।

प्रमिला जयपाल कश्मीर घाटी में प्रतिबंधों को हटाने की मांग को लेकर अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में एक द्विदलीय प्रस्ताव भी पेश कर चुकी हैं, जो संसद में गिर गया था।

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