Indian-Pak Tension: कश्मीर में चिनाब नदी पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का काम शुरू, पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?
Indian-Pak Tension: भारत ने पाकिस्तान से चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान को एक और झटका देने का मन बना लिया है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी संधि सस्पेंड कर दी थी, जिससे पाकिस्तान तिलमिला उठा था। अब भारत कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में दो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम शुरू करने जा रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच उठाया गया है और इसका उद्देश्य चेनाब नदी के जल संसाधनों का बेहतर तरीके से इस्तेमाल करना है।
पाकिस्तान पर क्या असर पड़ेगा?
भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर सलाल और बगलिहार हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के जलाशयों की भंडारण क्षमता को बढ़ाने के प्रोजेक्ट शुरू कर दिए हैं। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने 1 मई को गाद हटाने की प्रक्रिया शुरू की, जो तीन दिनों तक चली। हालांकि इससे पाकिस्तान की को जाने वाले पानी सप्लाई पर तुरंत असर नहीं पड़ेगा लेकिन उसके यहां पानी पर चलने वाली दूसरी परियोजनाओं में रुकावट जरूर आएगी।

आखिर कर क्या रहा है भारत?
इन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर काम करने का भारत का फैसला टर्बाइनों को नुकसान से बचाते हुए बिजली उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। चेनाब नदी जो कि जम्मू और कश्मीर से होकर पाकिस्तान में बहती है और संधि के सस्पेंड होने के बाद भारत अब बिना किसी रुकावट के इसके ज़्यादा पानी का उपयोग कर सकता है। जिसका असर आने वाले दिनों में पाकिस्तान में चल रही पनबिजली परियोजनाओं पर पड़ सकता है।
पाकिस्तान को नहीं दी कोई जानकारी
सूत्रों से पता चला है कि भारत ने सलाल और बगलिहार में हुए घटनाक्रम के बारे में पाकिस्तान को सूचित नहीं किया। यह भारत की तरफ से एक बड़ा कदम है, क्योंकि वह बिना किसी पूर्व सूचना के इस तरह की परियोजना पर काम कर रहा है। यह कदम 2019 के पुलवामा हमले के बाद लद्दाख में आठ हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भारत द्वारा मंजूरी दिए जाने के बाद उठाया गया था।
पाकिस्तान की आपत्तियों से अब मतलब नहीं
सिंधु जल संधि के निलंबन का मतलब है कि नई भारतीय परियोजनाओं पर पाकिस्तान की आपत्तियां अब वैध नहीं हैं, क्योंकि भारत समझौते को सस्पेंड कर चुका है। इससे पहले, पाकिस्तान ने अक्सर भारत की पहलों पर चिंता जताई थी, जिससे चल रही परियोजनाओं में रुकावट देखने को मिली थी। हालांकि, अब संधि के सस्पेंड होने के कारण, इन आपत्तियों का कोई मतलब नहीं रह गया है।
क्यों लिया भारत ने कड़ा फैसला?
दरअसल 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए हमले में 26 लोग मारे गए और 17 घायल हो गए। आतंकवादियों ने बैसरन घाटी में चुनिंदा लोगों को निशाना बनाया। ये आतंकवादी पाकिस्तान द्वारा भेजे गए थे। इसके जवाब में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति ने सिंधु जल संधि को तत्काल निलंबित कर दिया था।
हमले के बाद सरकार की कार्रवाई
पाकिस्तान के साथ तीन बड़े युद्धों के बावजूद भारत की यह निर्णायक कार्रवाई है, क्योंकि इससे पहले कभी भी संधि को निलंबित नहीं किया गया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का समर्थन करना बंद नहीं कर देता। इसके अलावा, भारत ने अपनी सीमा के भीतर कई पाकिस्तानी यूट्यूब चैनलों पर प्रतिबंध लगा दिया और 23 मई तक पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया। ये सभी कदम आतंकवाद के खिलाफ भारत के सख्त रुख को दिखाते हैं।
भारत के फैसले तय करेंगे भारत का कल
हाल की घटनाओं के बाद भारत के कूटनीतिक फैसले देश की सुरक्षा को दिखाने के साथ बतातें हैं कि भारत अपने संसाधनों का आने वाले वक्त में किस तरह इस्तेमाल करने वाला है, जिसका सीधा असर पाकिस्तान और उसकी आवाम को झेलना पड़ेगा। हालांकि इस मामले में पाकिस्तान की जनता और कई बड़े चेहरे पाकिस्तान की सरकार और आर्मी दोनों के खिलाफ दिख रहे हैं।
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