परमाणु पनडुब्बी प्लेटफॉर्म, न्यूक्लियर हमला करने वाली सबमरीन: Indian Navy के जंगी साजो-सामान से चीन-PAK हलकान!
Indian Navy Nuclear Submarine Base: चीन अगर अपनी परमाणु ताकत को बढ़ा रहा है, तो भारत का परमाणु पनडुब्बी कार्यक्रम भी चीनी नौसेना का मुकाबला करने के लिए गति पकड़ रहा है, जो पहले से ही दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है और ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2036 तक इंडियन नेवी के बेड़े में पहली पनडुब्बी आ जाएगी।
इसके साथ ही, नई रिपोर्ट से पता चला है, कि परमाणु पनडुब्बियों के लिए बनाए जा रहे प्लेटफॉर्म 'प्रोजेक्ट INS वर्षा' के भी अगले दो सालों के भीतर चालू होने की संभावना है और भारत के इन जंगी साजो-सामान को दोनों दुश्मन चीन और पाकिस्तान हैरान हैं।

भारत की परमाणु पनडुब्बी कार्यक्रम के बारे में जानिए
भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने पुष्टि की है, कि देश की पहली स्वदेशी परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बी 2036 तक तैयार होने की उम्मीद है, जबकि दूसरी परमाणु पनडुब्बी उसके दो सालों के भीतर तैयार हो जाएगी। यह परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बी कार्यक्रम (SSN) के बारे में पहला आधिकारिक बयान है। पहली दो पनडुब्बियों को कवर करने वाली इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 35,000 करोड़ रुपये (4.5 अरब डॉलर) है।
नौसेना के सूत्रों के सूत्रों के हवाले से यूरेशियन टाइम्स ने बताया है, कि भारत का समर्पित परमाणु पनडुब्बी बेस INS वर्षा दो वर्षों के भीतर चालू होने की उम्मीद है। यह प्लेटफॉर्म भारतीय नौसेना की वर्तमान और भविष्य की पनडुब्बियों के लिए एक केंद्र के रूप में काम करेगा।
परमाणु हमलावर पनडुब्बियों और बेस के विकास से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) और दक्षिण चीन सागर में नौसेना की सामरिक क्षमताओं में जबरदस्त इजाफा होगा।
अक्टूबर 2024 में, प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा पर कैबिनेट समिति (CCS) ने दो स्वदेशी परमाणु हमलावर पनडुब्बियों के निर्माण को मंजूरी दी। भारतीय नौसेना को ऐसी 6 पनडुब्बियों की जरूरत है। वहीं, 2 दिसंबर को एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी ने इस प्रोजेक्ट को "गेम चेंजर" बताया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि यह भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल ताकत को बढ़ाएगा और रक्षा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेगा, जो अगले पांच वर्षों में 'मेक इन इंडिया' पहल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
इस प्रोजेक्ट में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), जहाज निर्माण केंद्र, डिजाइन एजेंसियां और निजी क्षेत्र के भागीदारों सहित कई स्वदेशी हितधारक शामिल होंगे। ये संस्थाएं, भारत की पहली परमाणु हमला पनडुब्बी विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिसके 2036-37 तक नौसेना के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है।
नौसेना की ताकत में होगा जबरदस्त इजाफा
भारत की पहली परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की सामरिक क्षमताओं को बदल देंगी और साथ ही 2047 तक देश के पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने के लक्ष्य को भी पूरा करेंगी। इसके अलावा, ये पनडुब्बियां हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में चीन और पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री मौजूदगी को काउंटर करने करे लिए काम करेंगी।
भारत का परमाणु पनडुब्बी बेड़ा
दुनिया भर में तीन मुख्य प्रकार की पनडुब्बियां हैं: डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां, एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) वाली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां और परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां।
वर्तमान में, भारत 16 डीजल-इलेक्ट्रिक-संचालित पनडुब्बियों और चार परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का संचालन करता है।
INS Arihant: भारत की पहली स्वदेशी परमाणु ऊर्जा चालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (SSBN) अगस्त 2016 में नौसेना को सौंपी गई थी।
INS Arighat: भारत का दूसरा SSBN, 29 अगस्त 2024 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे कमीशन किया था।
INS Aridhaman: तीसरा SSBN अगले वर्ष चालू किया जाएगा।
S4* (Codename): भारत ने अक्टूबर 2024 में विशाखापत्तनम में शिप बिल्डिंग सेंटर (एसबीसी) में अपना चौथा SSBN लॉन्च किया।
जैसा कि नाम से पता चलता है, परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां, परमाणु ऊर्जा पर चलती हैं। हालांकि भारत के पास वर्तमान में परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां (SSBN) हैं, लेकिन उसके पास परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बियां (SSN) नहीं हैं।
हालांकि, सरकार द्वारा हाल ही में दो SSN के निर्माण को मंज़ूरी दिए जाने से यह कमी पूरी होने जा रही है, जो भारत की नौसैनिक क्षमताओं में महत्वपूर्ण वृद्धि को दर्शाता है।
INS Varsha- परमाणु पनडुब्बियों का घर
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपनी परमाणु पनडुब्बियों के लिए एक समर्पित बेस बनाने में महत्वपूर्ण डेवलपमेंट कर रहा है, जिसका नाम यानी INS वर्षा है। यह भूमिगत बेस आंध्र प्रदेश के तटीय गांव रामबिली के पास स्थित है, जो विशाखापत्तनम नौसैनिक अड्डे से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। अगले दो वर्षों में इसके चालू होने की उम्मीद है।
भारत ने लंबे समय से एक ऐसे गुप्त नौसैनिक अड्डे की आवश्यकता को पहचाना है, जो परमाणु हमला करने वाली पनडुब्बियों को रखने में सक्षम हो। वन-भूमि अधिग्रहण मुद्दे के कारण प्रोजेक्ट वर्षा का दूसरा चरण 2010 से विलंबित थी। लेकिन 2018 में, मोदी सरकार ने बाधाओं को दूर किया और परियोजना में तेजी लाई।
6 साल बाद, यह अत्यधिक सुरक्षित और एडवांस नौसैनिक अड्डा पूरा होने वाला है। यह न सिर्फ बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर क्षेत्र में, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भी नौसेना की शक्ति गतिशीलता को नया रूप देने के लिए तैयार है।
हालांकि INS वर्षा की सटीक लागत अभी भी अज्ञात है, लेकिन अनुमान है कि इसकी लागत करीब 3.75 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकती है। इस अड्डे को 12 से ज्यादा परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियों को रखने के लिए डिजाइन किया गया है, जिनमें अरिहंत श्रेणी और भविष्य की एस5 श्रेणी की पनडुब्बियां भी शामिल हैं।
आईएनएस वर्षा क्वाड भागीदारों- संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, साथ ही समान विचारधारा वाले देशों के साथ तकनीकी सहयोग और संयुक्त उपक्रमों को बढ़ावा देगी। इसके अलावा, यह बेस भारत की नौसैनिक शक्ति को प्रदर्शित करने और विशाल हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने प्रभाव को बढ़ाने की क्षमता को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाएगा।
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