चीन पर नजर रखता है दुनिया का सबसे ताकतवर ड्रोन, PM मोदी के अमेरिका दौरे पर भारत करेगा ये खास डिमांड

चीनी नौसेना 2025 की शुरुआत में हिंद महासागर में लंबी दूरी की गश्त भेजेगी। ऐसे में चीनी चुनौती का मुकाबला करने के लिए भारतीय नौसेना अपनी ताकत को बढ़ाने की ओर कार्यरत है और कई हथियारों को अपने साथ शामिल कपना चाहती है।

sea guardian drones

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री डोमेन जागरूकता पर क्वाड राष्ट्रों के हाथ मिलाने के साथ, भारत ने अमेरिका से सशस्त्र ड्रोन को शामिल करने में तेजी लाने की योजना बनाई है। भारतीय नौसेना जनरल एटॉमिक्स निर्मित सी गार्जियन सर्विलांस ड्रोन के पट्टे का विस्तार करने की दिशा में काम कर रही है।

भारतीय नौसेना ने अमेरिका से समुद्र में निगरानी के लिए जनरल एटॉमिक्स द्वारा निर्मित दो सी गार्जियन (MQ 9B) ड्रोन 2020 से लीज पर ले रखे है। भारतीय नौसेना अपने सी गार्जियन के आउटपुट से संतुष्ट है। ये कॉन्ट्रैक्ट जनवरी 2024 में समाप्त हो रहा है।

भारत के पड़ोसी चीन और पाकिस्तान, दोनों के पास सशस्त्र ड्रोन हैं, ऐसे में भारतीय सेना को सशस्त्र ड्रोन की आवश्यकता है। ये सी गार्डियंस ड्रोन अफ्रीका के पूर्वी बोर्ड और अदन की खाड़ी से लेकर इंडोनेशिया और उसके आगे सुंडा जलडमरूमध्य तक निगरानी करते हैं।

आपको बता दें कि सी गार्जियन (MQ 9B) ड्रोन को दुनिया का सबसे ताकतवर ड्रोन कहा जाता है। ये वही ड्रोन है जिससे 31 जुलाई 2022 को दुनिया के मोस्ट वॉन्टेड टेररिस्ट अल जवाहिरी को काबुल में मार गिराया गया। मई 2021 तक अमेरिका के पास 300 से ज्यादा ऐसे ड्रोन थे।

भारत, जर्मनी, ग्रीस, इटली, फ्रांस, बेल्जियम, डोमिनिकन गणराज्य, नीदरलैंड, स्पेन, यूके, यूएई, ताइवान, जपान, मोरक्को सहित दुनिया के 13 से भी अधिक देश इसका इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका का ये ड्रोन इराक, सोमालिया, यमन, लीबिया और सीरिया में भी तैनात है।

जानकारी के मुताबिक भारत MQ 9B को खरीदने की तैयारी कर रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले 22 जून को अमेरिका की अपनी राजकीय यात्रा के लिए जाएंगे। इस दौरान सशस्त्र ड्रोन का अधिग्रहण, हाई-टेक प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और इंडो-पैसिफिक चर्चा के विषयों में से एक होगा।

गौरतलब है कि 22 मई को आयोजित क्वाड शिखर सम्मेलन के संयुक्त बयान में, अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के नेताओं ने हिंद महासागर, दक्षिण में क्षेत्रीय संलयन केंद्रों के साथ मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस (IPDMA) के लिए इंडो-पैसिफिक साझेदारी पर हाथ मिलाने का फैसला किया था।

इसका उद्देश्य समुद्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने और मानवीय और प्राकृतिक आपदाओं का मुकाबला करना है। इसके साथ ही इसका सबसे अहम उद्देश्य चीन और उसके सहयोग देशों की समुद्री गतिविधियों पर निगरानी रखना भी है।

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