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भारतीय नौसेना ने किया मालदीव के पास 'स्ट्रैटजिक अड्डा' खोलने का ऐलान, भारत के फैसले पर क्या करेंगे मुइज्जू?

Indian Navy strategic base Near Maldives: भारत ने मालदीव के पास अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाने की घोषणा कर दी है और भारत सरकार के इस कदम को लेकर माना जा रहा है, कि मालदीव के चीन समर्थक राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू को जवाब दिया जा रहा है।

मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू लगातार चीन के प्रति अपने वफादारी का अभ्यास कर रहे हैं और भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण वातावरण का निर्माण कर रहे हैं, जिसने दोनों देशों के बीच के संबंध को काफी खराब कर दिया है और भारतीय नौसेना की ये बड़ी घोषणा, उस वक्त आई है, जब माले ने नई दिल्ली से भारतीय सैनिकों को वापस बुलाने का अनुरोध किया था।

Indian Navy strategic base Near Maldives

भारतीय नौसेना की घोषणा क्या है?

शनिवार को जारी एक बयान में, भारतीय नौसेना ने कहा है, कि वह मालदीव के करीब "रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण" द्वीपों पर सेना बढ़ा रही है। नया बेस 6 मार्च को लक्षद्वीप द्वीप समूह पर खोला जाएगा। बयान में कहा गया है, कि यहां मौजूदा छोटी टुकड़ी को "स्वतंत्र नौसैनिक इकाई" में बदल दिया जाएगा।

भारतीय नौसेना का ये अड्डा मालदीव की राजधानी माले से सिर्फ 258 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। नौसेना ने कहा है, कि "मिनिकॉय लक्षद्वीप का सबसे दक्षिणी द्वीप है, जो ना सिर्फ महत्वपूर्ण समुद्री कम्युनिकेशन लिंक की स्थापना करता है, बल्कि इंटरनेशनल ट्रेड लाइन को भी नियंत्रित करता है।"

इंडियन नेवी के बयान के अनुसार, यह बेस समुद्री डकैती रोधी और मादक द्रव्य रोधी अभियानों को बढ़ावा देगा और यह "रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीपों पर सुरक्षा और बुनियादी ढांचे को बढ़ाने" की नीति का हिस्सा था।

भारत ने मालदीव के खिलाफ क्यों लिया एक्शन?

जनवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लक्षद्वीप द्वीप का यात्रा करने के बाद मालदीव के कुछ मंत्रियों की विवादास्पद टिप्पणियों ने दोनों देशों के बीच संबंधों को काफी खराब कर दिया। इससे सोशल मीडिया पर बड़ा हंगामा मच गया, जिससे भारतीयों को माले की अपनी निर्धारित यात्राएं रद्द करने के लिए उकसाया।

हालांकि, मोहम्मद मुइज्जू के द्वीप राष्ट्र के राष्ट्रपति बनने से पहले ही दोनों देशों के बीच रिश्ते में गिरावट आ गई थी। चीन समर्थक उम्मीदवार माने जाने वाले मुइज्जू ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत ही भारत के खिलाफ नारों के साथ की थी।

Indian Navy strategic base Near Maldives

जब उन्होंने पदभार संभाला, तो मुइज्जू ने दुबई में जलवायु सम्मेलन कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी, जहां उन्होंने भारतीय नेता से अपने देश से अपनी सैन्य उपस्थिति हटाने का आग्रह किया था। बाद में, दोनों देशों के अधिकारियों ने नई दिल्ली में मुलाकात की और माले ने दावा किया, कि भारत अपने कर्मियों को वापस बुलाने पर सहमत हो गया है।

पिछले हफ्ते की शुरुआत में, मालदीव ने कहा था, कि भारत के टेक्निकल कर्मचारियों का समूह मालदीव पहुंच चुका है, जो भारतीय सैनिकों की जगह लेगा। मालदीव के रक्षा मंत्रालय की तरफ से सोमवार को जारी बयान के अनुसार, "वर्तमान में सीनू गान (अड्डू शहर) में तैनात भारतीय सैनिकों के स्थान पर हेलीकॉप्टर का संचालन करने वाला नागरिक दल मालदीव पहुंच गया है।"

कितना महत्वपूर्ण है मिनिकॉय द्वीप?

मिनिकॉय द्वीप पर बनने वाले इस नौसैनिक अड्डे को लेकर एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इस अड्डे का निर्माण होने के बाद मालदीव भारत को ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा, क्योंकि हिंद महासागर में फिर भारत के लिए उसकी अहमियत काफी कम हो जाएगी।

मालवीद में मोहम्मद मुइज्जू का राष्ट्रपति बनना, भारत के रणनीतिक क्षेत्र में चीन के तख्तापलट के रूप में देखा गया है। मालदीव का रणनीतिक महत्व उसके आकार से नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उसकी महत्वपूर्ण स्थान पर उसकी मौजूदगी है। मालदीव के अलग अलग द्वीप 960 किलोमीटर लंबी श्रृंखला के ऊपर फैले हुए हैं, जो उत्तर से दक्षिण तक चलती है और हिंद महासागर के बीच में एक प्रकार की दीवार का निर्माण करती है।

नौसेना ने शनिवार देर रात एक बयान में कहा, कि भारत इस द्वीपसमूह राष्ट्र में चीन की बढ़ती उपस्थिति को लेकर सशंकित है, जो प्रमुख पूर्व-पश्चिम अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों तक फैला हुआ है और नया बेस क्षेत्र में नई दिल्ली की "परिचालन निगरानी" का विस्तार करेगा।

भारत की नौसेना का लक्षद्वीप के कवरत्ती द्वीप पर पहले से ही एक बेस है, लेकिन नया बेस मालदीव से लगभग 258 किलोमीटर करीब होगा। नौसेना ने कहा, "मिनिकॉय लक्षद्वीप का सबसे दक्षिणी द्वीप है जो संचार की महत्वपूर्ण समुद्री लाइनों तक फैला हुआ है।"

जाहिर तौर पर, इंडियन नेवी ने मालदीव और चीन को बड़ा संदेश भेजा है, कि वो हिंद महासागर में भारत से पंगे नहीं ले सकता है। और माना जा रहा है, कि आने वाले दिनों में भारत, हिंद महासागर में और भी आक्रामक फैसले ले सकता है।

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