भारत का INS विक्रमादित्य बनाम चीन का फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर, कौन है कितना बलशाली?
आईएनएन विक्रमादित्य के बाद भारत अपना एक और एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत को इस साल 15 अगस्त के मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कोचीन बंदरगाह से इंडियन नेवी को कमीशन किया जाएगा।
नई दिल्ली, जून 27: भारत का एकमात्र एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य 18 महीने के बाद अपग्रेड होकर इंडियन नेवी की सेवा में 25 जून को लौट आया है। अपने स्टीम टर्बाइन इंजनों को फायर करने के साथ ही आईएनएस विक्रमादित्य बंदरगाह से पानी में उतर गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले की भारत के लड़ाकू जहाज आईएनएस विक्रमादित्य से उड़ान भरे, इसे गहरे समुद्र में परीक्षणों की एक लंबी श्रृंखला से गुजरना होगा और अपने हर परीक्षा में पास करना होगा। वहीं, चीन ने भी अपना शक्तिशाली फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर को लॉन्च कर दिया है। ऐसे में ये विश्वेषण करना जरूरी हो जाता है, कि कौन कितना शक्तिशाली है।

भारत का शक्तिशाली एयरक्राफ्ट
आईएनएन विक्रमादित्य के बाद भारत अपना एक और एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत को इस साल 15 अगस्त के मौके पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कोचीन बंदरगाह से इंडियन नेवी को कमीशन किया जाएगा, जो समुद्र में भारत की शक्ति को आसमान तक पहुंचा देगा। ये दोनों विमानवाहक पोत के आ जाने से इंडियन नेवी की शक्ति में कई गुना इजाफा होगा और इंडियन नेवी विश्व की सबसे शक्तिशाली नौसेना की सूचि में और भी आगे निकल आएगी। चीन के तीसरे एयरक्राफ्ट कैरियर फुजियान को जियांगन शिपयार्ड से लॉन्च किए जाने के कुछ दिनों बाद ही आईएनएस विक्रमादित्य रिफिट से बाहर आया है और अब ये इंडियन नेवी में शामिल किए जाने की प्रक्रिया में है।

आईएनएन विक्रमादित्य की क्षमता
रिपोर्ट के मुताबिक, भाप से चलने वाला 80,000 टन का एयरक्राफ्ट कैरियर 100,000 टन परमाणु ऊर्जा से चलने वाले यूएसएस जेराल्ड आर फोर्ड सुपर एयरक्राफ्ट कैरियर को टक्कर देता है, जिसे 2017 में कमीशन किया गया था। लिहाजा, आईएनएन विक्रमादित्य को काफी ज्यादा शक्तिशाली विमानवाहक युद्धपोत माना जाता है।

चीन के फुजियान पर सवाल
चीन दावा करता है, कि 003 फुजियान विमानवाहक पोत अत्याधुनिक हथियारों और विमान-प्रक्षेपण से लैस है। वहीं, कई विश्लेषक फ़ुज़ियान एयरक्राफ्ट कैरियर को आने वाले दशक में इंडो-पैसिफिक में अमेरिकी सैन्य शक्ति का सामना करने के लिए तैयार किया गया विमानवाहक युद्धपोत बता रहे हैं। लेकिन, भारतीय नौसेना के एडमिरल चीनी विमानवाहक युद्धपोत की संचालन क्षमता पर कुछ बुनियादी सवाल उठा रहे हैं, जिसे अत्याधुनिक इलेक्ट्रोमैग्नेटिक से लैस कहा जा रहा है। चीन इसे एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (ईएमएएलएस) और एडवांस्ड अरेस्टिंग गियर (एएजी) तकनीक से लैश बता रहा है, लेकिन, अभी तक, केवल यूएसएस गेराल्ड फोर्ड ही इस उन्नत तकनीक से लैस है, जो कैरियर पर लड़ाकू विमानों के तेजी से टेक-ऑफ और लैंडिंग के लायक बनाता है।

भाप की शक्ति पर संचालन कैसे?
भारतीय नौसेना के युद्ध योजनाकार इस बात को लेकर हैरान हैं, और जानना चाहते हैं कि चीन भाप की शक्ति पर ईएमएएलएस टेक्नोलॉजी के साथ फुजियान का संचालित कैसे करेगा, जब तकनीकी रूप से बहुत बेहतर होने के बाद भी अमेरिका, अभी भी यूएसएस गेराल्ड फोर्ड पर उसी प्रणाली के साथ संघर्ष कर रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग (डीओडी) की रिपोर्ट से संकेत मिलता है, कि नई टेक्नोलॉजी सिस्टम लगातार लगातार ब्रेकडाउन हो रहा है। जबकि, यह याद रखना चाहिए कि यूएसएस गेराल्ड फोर्ड एक परमाणु-संचालित पोत है, जबकि आईएनएस विक्रमादित्य, जैसा कि फ़ुज़ियान भी है, ये दोनों एक भाप से चलने वाला युद्धपोत है और इसकी कमान में अधिक ऊर्जा आरक्षित है। तो फिर चीन ईएमएएलएस टेक्नोलॉजी का संचालन कैसे करेगा?

पाकिस्तान ठोक रहा अपना सीना
हालांकि, चीन के ग्राहक देश जैसे पाकिस्तान, पीएलए नौसेना के साथ अपनी छाती ठोक रहा है, क्योंकि चीन की नौसेना पीएलए नेवी के पास अब तीन एयरक्राफ्ट कैरियर हो गये हैं। लेकिन, चीन अपने फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर को लेकर झुठ बोल रहा है, इसका खुलासा ऐसे होता है, क्योंकि, अमेरिकी नौसेना, वाहक संचालन में 100 वर्षों के अनुभव के बावजूद, यूएसएस गेराल्ड फोर्ड अभी भी बोर्ड पर नई तकनीकों के साथ संघर्ष कर रही है। भारत 1961 से एयरक्राफ्ट कैरियर का संचालन कर रहा है, लेकिन चीन ने 2012 में ही अपना पहला एयरक्राफ्ट कैरियर लॉन्च किया था। दरअसल, किसी पायलट के लिए अपने एयरक्राफ्ट को जमीन पर उतारना और समुद्र में एयरक्राफ्ट कैरियर पर उतरना, दो अलग अलग बातें हैं। समुद्र में विमान को उतारना काफी मुश्किल माना जाता है, क्योंकि समुद्र में नीले रंग का पानी पायलट को परेशान करता है। लिहाजा, समुद्र की अशांत परिस्थितियों में एक कैरियर पर एक लड़ाकू को उतारने के लिए उच्चतम स्तर के कौशल और पैंतरेबाज़ी की आवश्यकता होती है। इसीलिए चीन के दावे पर सवाल उठ रहे हैं।

टकराव का नया मैदान बनता इंडो-पैसिफिक
अब ये तय हो चुका है, कि इंडो-पैसिफिक युद्ध का नया मैदान बनने वाला है और इंडो-पैसिफिक में अमेरिका और चीन के बीच का तनाव काफी ज्यादा बढ़ने वाला है, लिहाजा चीन के फ़ुज़ियान जैसे विमान वाहक युद्धपोत को अमेरिकी नौसेना और जापानी नौसेना के साथ मुकाबला करना होगा, जिनके पास असीमित शक्तियां हैं। लिहाजा, भारत के लिए हिंद महासागर में भूमिका और बढ़ जाती है, क्योंकि भारतीय नौसेना को हिंद महासागर और प्रशांत क्षेत्र में भी अपनी भूमिका निभानी होगी, क्योंकि यह केवल कुछ समय की बात है जब चीनी वाहक कार्य बल अपने समुद्री प्रतिरोध तैनाती के हिस्से के रूप में हिंद महासागर में प्रवेश कर सकते हैं। लिहाजा, भारत भी तेजी से अपनी नौसेना शक्ति का विस्तार कर रहा है और अब क्वाड के सदस्य देश चीन की नौसेना और उसके एयरक्राफ्ट कैरियर्स की ताकत का नजदीकी से जायजा ले रहे हैं। (आईएनएस विक्रमादित्य)
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