विजयी विश्व तिरंगा प्यारा... लंदन में भारतीय उच्चायोग ने लहराया विशालकाय झंडा, खालिस्तानियों को मुंहतोड़ जवाब
खालिस्तान समर्थक पिछले कुछ महीने में लगातार एक्टिव हो रहे हैं और ऑस्ट्रेलिया के साथ साथ कनाडा और ब्रिटेन में भारतीय संपत्तियों और हिन्दू मंदिरों को निशाना बना रहे हैं।

Indian High Commission London huge Tricolour: लंदन में भारतीय उच्चायोग ने खालिस्तानियों को करारा जबाव दिया है और विशालकाय तिरंगा झंडा लहराया है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में देखा जा सकता है, कि किस तरह से भारतीय उच्चायोग में के ऊपर विशालकाय तिरंगा झंडा लगाया गया है, जो खालिस्तानियों के मुंह पर जोरदार तमाचा है। वहीं, भारतीय उच्चायोग से तिरंगा हटाने की कोशिश करने के बाद खालिस्तानियों के खिलाफ पूरे भारत में गुस्सा फूट पड़ा है और लोगों की मांग है, कि जो भी लोग विदेशों में रहते हैं, और खालिस्तानियों का समर्थन करते हैं, उनके खिलाफ भारत सरकार को सख्त एक्शन लेना चाहिए और भारत से उनके सारे कनेक्शन पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए।
भारतीय उच्चायोग में विशालकाय झंडा
लंदन में भारतीय उच्चायोग ने खालिस्तान समर्थकों के एक समूह द्वारा 'खालिस्तान जिंदाबाद' के नारों के साथ भारतीय ध्वज को उतारने के एक दिन बाद एक विशाल तिरंगे के साथ करारा जवाब दिया है। खालिस्तान समर्थकों के एक समूह ने यूके में भारतीय उच्चायोग के बाहर अलगाववादी नेता अमृतपाल सिंह के झंडे और पोस्टर के साथ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया था। वहीं, रविवार को जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें खालिस्तान समर्थकों के हिंसक हरकत को साफ तौर पर देखा जा सकता है। वीडियो में देखा जा सकता है, कि किस तरह से खालिस्तानी समर्थिक लंदन में इंडियन मिशन के ऊपर उड़ रहे भारत के राष्ट्रीय ध्वज को पकड़ रहे हैं और उतारने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना के बाद भारत ने ब्रिटिश सरकार के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। भारत सरकार ने वरिष्ठ ब्रिटिश राजनयिक को तलब किया और ब्रिटेन पर भारतीय राजनयिक परिसर की सुरक्षा के प्रति "उदासीनता" का आरोप लगाया है।
ब्रिटेन ने घटना को बताया अस्वीकार्य
वहीं, ब्रिटेन के उच्चायुक्त अलेक्जेंडर डब्ल्यू एलिस ने रविवार को इस घटना को अस्वीकार्य बताया है। भारत सरकार की तरफ से अपनी सहयोगी डिप्टी क्रिस्टीना स्कॉट को भारतीय विदेश मंत्रालय की तरफ से तलब किए जाने से पहले एलिस ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट इस वीडियो को लेकर पोस्ट किया, कि ये लंदन में इंडिया हाउस में "अपमानजनक कृत्य" है, जो "पूरी तरह से अस्वीकार्य" है। वहीं, बाद में, ब्रिटेन के विदेश राष्ट्रमंडल और विकास मामलों के राज्य मंत्री, तारिक अहमद ने ट्वीट किया, कि वह इस हमले को लेकर "स्तब्ध" हैं और उन्होंने इसे "मिशन और उसके कर्मचारियों की अखंडता के खिलाफ पूरी तरह से अस्वीकार्य कार्रवाई" बताया। उन्होंने लिखा, 'ब्रिटेन सरकार भारतीय उच्चायोग की सुरक्षा को हमेशा गंभीरता से लेगी।' वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने रविवार रात कहा, "नई दिल्ली में यूके के सबसे वरिष्ठ राजनयिक को तलब किया जा रहा है।"
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भारत सरकार का सख्त रूख
इस घटना के आधे घंटे के भीतर, ब्रिटेन के उप उच्चायुक्त को बुलाकर भारतीय विदेश मंत्रालय ने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया और विदेश मंत्रालय के प्रेस नोट में कहा गया है, कि "लंदन में भारतीय उच्चायोग के खिलाफ अलगाववादी और चरमपंथी तत्वों द्वारा की गई कार्रवाई पर भारत के कड़े विरोध को व्यक्त करने के लिए, नई दिल्ली में सबसे वरिष्ठ यूके राजनयिक को आज देर शाम तलब किया गया है।" प्रेस रिलीज में आगे कहा गया है, "ब्रिटेन को "वियना सम्मेलन के तहत बुनियादी दायित्वों" के बारे में याद दिलाते हुए आगे कहा गया है, कि "ब्रिटेन में भारतीय राजनयिक परिसरों और कर्मियों की सुरक्षा के लिए यूके सरकार की उदासीनता को भारत अस्वीकार्य मानता है"। भारत ने मांग की है, कि यूके सरकार "घटना में शामिल लोगों की पहचान करे, उन्हें गिरफ्तार करे और उन पर मुकदमा चलाने के लिए तत्काल कदम उठाए।" भारतीय विदेश मंत्रालय ने ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग की है। आपको बता दें, कि इससे पहले सितंबर 2019 में भी, एक कश्मीरी अलगाववादी मार्च के दौरान भारतीय मिशन पर पत्थरबाजी की गई थी, जिसमें भारतीय मिशन की खिड़कियां टूट गई थीं।ट












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