चीन पढ़ने जाने वाले छात्रों के लिए एडवाइजरी जारी, जरूर जानिए भारत सरकार ने क्या बताएं हैं रिस्क?
पिछले दो सालों में कोविड की वजह से चीन ने काफी सख्त वीजा नियम बना रखे हैं, जिसकी वजह से काफी संख्या में भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
नई दिल्ली, सितंबर 10: भारत सरकार ने चीन जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को लेकर एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसमें चीन जाकर मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों को कई तरह की सलाह दी गई हैं, जिने वो छात्र भी शामिल हैं, जो कम नंबरों से पास हुए हैं। वहीं, उन्हें बताया गया है, कि चीन जाकर उन्हें आधिकारीक बोली जाने वाली भाषा पुतोंगहुआ की अनिवार्य शिक्षा लेनी होगी और फिर जब वो भारत आकर प्रैक्टिस करने की कोशिश करेंगे, तो फिर उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने के लिए किन मानदंडो को पूरा करना होगा। इसके साथ ही भारत सरकार की तरफ से जारी एडवायजरी में बताया गया है कि, कोविड प्रतिबंधों की वजह से पिछले दो सालों में कैसे हजारों भारतीय छात्र अपने घरों में फंसे हुए हैं और उन्हें चीन की तरफ से वापसी का वीजा नहीं दिया गया है, जिसकी वजह से उनकी पढ़ाई काफी खराब हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 23 हजार भारतीय छात्र अलग अलग चीनी विश्वविद्यालयों में नामांकित हैं, इनमें से अधिकांश मेडिकल के छात्र हैं।
Recommended Video

भारतीय छात्रों को भारी दिक्कतें
पिछले दो सालों में कोविड की वजह से चीन ने काफी सख्त वीजा नियम बना रखे हैं, जिसकी वजह से काफी संख्या में भारतीय छात्रों को अपनी पढ़ाई जारी रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, हाल ही में जब भारत सरकार की तरफ से सख्ती दिखाई गई है, तो फिर चीन ने चयनित भारतीय छात्रों को वापस पढ़ाई के लिए चीन लौटने के लिए वीजा जारी करना शुरू किया है। हालांकि, उनमें से ज्यादातर चात्रों को लौटने के लिए अभी भी संघर्ष करना पड़ रहा है, क्योंकि कोई सीधी उड़ान नहीं है और दोनों देश अभी भी बीजिंग के क्वारंटाइन प्रतिबंधों को ध्यान में रखते हुए सीमित उड़ान सुविधाओं पर काम करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। इस बीच, चीनी मेडिकल कॉलेजों ने भारत और विदेशों से नए छात्रों के लिए नामांकन शुरू किया, लिहाजा भारत सरकार की तरफ से नये छात्रों के लिए एडवाइडजरी जारी की गई है, जिसमें उन्हें बताया गया है, कि चीन जाकर पढ़ाई करने वाले छात्रों को किन परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।

सलाहों को जरूर माने भारतीय छात्र
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने चीन में चिकित्सा का अध्ययन करने के इच्छुक भारत के छात्रों के लिए गुरुवार को एक व्यापक सलाह जारी की है। इस इजरी में अध्ययनों के परिणाम हैं, जिसमें चीन में भारतीय छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों और भारत में चिकित्सा अभ्यास के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए कड़े मानदंडों का सामना करना पड़ता है। एडवाइजरी की एक खास बात यह है, कि साल 2015 और 2021 के बीच केवल 16 प्रतिशत छात्रों ने भारत में अभ्यास करने के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए आवश्यक परीक्षा उत्तीर्ण की है और बाकी छात्र भारत में प्रैक्टिस करने के लिए जरूरी परीक्षा पास नहीं कर पाए, लिहाजा उन्हें भारत में प्रैक्टिस करने की इजाजत नहीं दी गई।

क्या कहते हैं आंकड़े?
भारत सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2015 से 2021 तक भारतीय चिकित्सा परिषद (MCI) की FMG (विदेशी चिकित्सा स्नातक) परीक्षा में बैठने वाले 40,417 छात्रों में से केवल 6,387 ने ही इसे पास किया है। उस अवधि में 45 मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों में चीन में नैदानिक चिकित्सा कार्यक्रमों का अध्ययन करने वाले भारतीय छात्रों का उत्तीर्ण प्रतिशत केवल 16 प्रतिशत था। भारत सरकार के सलाहकार ने प्वाइंट ऑउट करते हुए कहा कि, "संभावित छात्र और माता-पिता कृपया इस तथ्य पर ध्यान दें, कि उन्हें चीनी विश्वविद्यालयों में पढ़ाई करते हुए क्या क्या दिक्कतें हो सकती हैं और चीन में जाकर पढ़ाई करना क्या उनके लिए सही फैसला होगा? काफी सोच समझकर ही चीन में पढ़ाई करने को लेकर छात्र और उनके अभिभावक फैसला करें।

पढ़ाई में आने वाली खर्च पर भी दें ध्यान
भारत सरकार की एडवाइजरी में कहा गया है कि, चीन में पढ़ाई करने का फैसले करने वाले छात्र अलग अलग विश्वविद्यालयों के फीस स्ट्रक्चर पर भी ध्यान दें, क्योंकि फीस स्ट्रक्चर अलग अलग और छात्रों को एडमिशन लेने से पहले सलाह दी गई है, कि वो सीधे विश्वविद्यालय जाकर पूरी जांच और पड़ताल करें, उसके बाद ही एडमिशन लेने के बारे में फैसला करें। सलाहकार ने चीनी सरकार द्वारा नामित 45 मेडिकल कॉलेजों को पांच साल की अवधि और एक साल की इंटर्नशिप में मेडिकल डिग्री प्रदान करने के लिए रजिस्टर्ड किया है भारतीय छात्रों को सलाह दी गई है, कि वे उन 45 कॉलेजों के अलावा कहीं किसी और कॉलेज या विश्वविद्यालय में एडमिशन लें। भारत सरकार की तरफ से उन 45 कॉलेजों के बारे में स्पष्ट जानकारी दी गई है। भारत सरकार की तरफ से साफ कर दिया गया है, कि चीन की भाषा में जो भी चिकित्सा कार्यक्रम है, उसमें भारतीय छात्र हिस्सा नहीं ले सकते हैं और सिर्फ उसी कोर्स में दाखिला ले सकते हैं, जिसका माध्यत्र अंग्रेजी है।

चीनी भाषा को सीखना होगा जरूरी
वहीं, भारत सरकार की एडवाइजरी में कहा गया है कि, चीन के किसी भी विश्वविद्यालय में एडमिशन लेने वाले छात्रों को चीनी भाषा को सीखना अनिवार्य होगा और प्रत्येक छात्र को एचएसके -4 स्तर तक चीनी भाषा सीखने की भी आवश्यकता होगी। कोई भी छात्र जो इस न्यूनतम चीनी भाषा कौशल को स्पष्ट नहीं करता है, उसे डिग्री नहीं दिया जाएगा। एडवाइजरी में इस बात पर भी प्रकाश डाला गया है, कि चीन में मेडिसिन की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों को उस देश में प्रैक्टिस करने के लिए लाइसेंस लेना होगा, जहां उन्होंने डिग्री हासिल की है। सलाहकार ने कहा कि, इंटर्नशिप पूरा करने के बाद छात्रों को चीनी चिकित्सा योग्यता परीक्षा पास करनी होगी और चीन में अभ्यास करने के लिए एक चिकित्सक योग्यता प्रमाण पत्र प्राप्त करना होगा।

भारत में कौन सी परीक्षा पास करनी होगी?
चीन में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्रों को भारत में मेडिकल प्रैक्टिस करने के लिए योग्यता परीक्षा को पास करना महत्वपूर्ण है और "एनएमसी (राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग) के 18 नवंबर 2021 के नियमों में कहा गया है कि, कोई भी संभावित छात्र जो विदेश में चिकित्सा शिक्षा चाहता है, उसके पास भारत में अभ्यास करने का लाइसेंस होना चाहिए। अपना क्लिनिकल मेडिसिन प्रोग्राम पूरा करने के बाद छात्रों को भारत में एफएमजी परीक्षा देना होगा। इसके साथ ही विदेशों में पढ़ाई करने की इच्छा रखने वाले छात्रों को पहले NEET-UG की परीक्षा पास करनी होगी और जो छात्र इस परीक्षा को पास करेंगे, उन्हें ही विदेशों में जाकर पढ़ाई करने की इजाजत दी जाएगी।












Click it and Unblock the Notifications