पीएम मोदी के इटली दौरे का असर? अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले से जुड़ी हथियार कंपनी से भारत ने प्रतिबंध हटाया
साल 2012 में भारतीय राजनेताओं, नौकरशाहों और इंडियन एयरफोर्स के अधिकारियों पर 360 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप लगा था, जिसने भारतीय राजनीति में कोहराम मचा दिया था।
नई दिल्ली, नवंबर 07: भारत सरकार ने देश में तहलका मचा देने वाले अगस्ता वेस्टलैंड से जुड़ी इटली की एक हथियार कंपनी से प्रतिबध हटा दिया है। भारत सरकार ने शर्तों के साथ इटली की डिफेंस कंपनी लिओनार्डो एसपीए को फिर से भारत में व्यापार करने की इजाजत दे दी है। इस कंपनी का नाम अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले में आया था, जिसको लेकर भारत में आज भी जमकर राजनीति होती है।

हथियार कंपनी से हटा प्रतिबंध
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने कुछ शर्तों के साथ हथियार बनाने वाली कंपनी से प्रतिबंध हटाने का फैसला किया है। लिओनार्डो एसपीए वही कंपनी है, जिसपर 3 हजार 546 करोड़ रुपये के कुख्यात वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में शामिल अगस्ता वेस्टलैंड इंटरनेशनल से जुड़ी फिनमेकेनिका ग्रुप का हिस्सा रही है और अब भारत सरकार ने इस कंपनी के ऊपर लगाए गये प्रतिबंधों को शर्तों के साथ हटा लिया है। भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कुछ शर्तों के साथ एक बार फिर से इस कंपनी के साथ व्यापार शुरू करने का फैसला लिया है। भारतीय रक्षा मंत्रालय के शीर्ष सरकारी सूत्रों ने शनिवार को टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि, लियोनार्डो एसपीए के साथ व्यापार फिर से शुरू करने का रक्षा मंत्रालय का फैसला "कंपनी पर लगाई गई कुछ शर्तों के अधीन है"।

प्रतिबंध हटाने के पीछे शर्तें
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, शर्तों के मुताबिक डिफेंस कंपनी लियोनार्डो एसपीए किसी भी पिछले सौदे के लिए भारत सरकार के खिलाफ कोई व्यावसायिक दावा नहीं कर सकता है या भारत सरकार के खिलाफ कोई भी दीवानी मुकदमा दायर नहीं कर सकता है। इसके अलावा, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा कथित वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले की चल रही जांच के लिए "बिना किसी पूर्वाग्रह के" नए व्यापारिक सौदे होंगे और जो पिछले मुकदमे चल रहे हैं, वो वैसे ही चलते रहेंगे, उन मुकदमों पर नये डील का कोई असर नहीं पड़ेगा।

बार बार अनुरोध कर रहा था इटली
टाइम्स ऑफ इंडिया को सूत्रों ने बताया है कि, इटली की डिफेंस कंपनी से प्रतिबंध हटाने का फैसला एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा पूरे मामले की जांच करने और कानून मंज्ञालय से परामर्शन लेने के बाद भारत सरकार को रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसके बाद प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इटली की तरफ से भारत से बार बार डिफेंस कंपनी के ऊपर लगाए गये प्रतिबंधों को हटाए जाने का अनुरोध किया जा रहा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अक्टूबर को रोम में जी-20 शिखर सम्मेलन के मौके पर अपने इटली के प्रधानमंत्री मारियो ड्रैगी के साथ पहली व्यक्तिगत बैठक भी की थी।

भारत भी तलाश रहा था विकल्प
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने कहा कि कंपनी लियोनार्डो एसपीए और उसकी सहायक कंपनियों पर प्रतिबंध के कारण अंतरराष्ट्रीय हथियार बाजार में "भारत के विकल्प सीमित" थे। ऐसा इसलिए, क्योंकि इटली की ये कंपनी टॉरपीडो और 127 मिमी नौसैनिक बंदूकों से लेकर रडार और कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों से लेकर हथियार प्रणालियों की एक विस्तृत श्रृंखला का उत्पादन करता है। लिहाजा, भारत भी अपने विकल्पों को बढ़ाने की तरफ ध्यान दे रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस घोटाले के बाद जब भारत सरकार ने कंपनी के ऊपर प्रतिबंध लगाए थे, उसका सीधा असर भारत के ऊपर पड़ा था और मझगांव डॉक्स में बनाई जा रही छह फ्रांसीसी मूल की स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के लिए फिनमेकेनिका की सहायक कंपनी से ब्लैक शार्क भारी वजन वाले टॉरपीडो खरीदने के लिए भारत के प्रस्तावित 1,200 करोड़ रुपये के सौदे को रद्द करना पड़ा था।

क्या है अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला
आपको बता दें कि, अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले का खुलासा उस वक्त हुआ था, जब 2012 में भारत में यूपीए-2 की सरकार थी और देश में अन्ना आंदोलन चल रहा था, लिहाजा इस घोटाले की वजह से सरकारी की काफी किरकिरी हुई थी। साल 2012 में भारतीय राजनेताओं, नौकरशाहों और इंडियन एयरफोर्स के अधिकारियों को 12 AW-101 VVIP हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति के लिए 3,546 करोड़ रुपये के सौदे को मंजूरी देने के लिए 360 करोड़ रुपये रिश्वत के रूप में दिए जाने का आरोप लगा था। ये आरोप इटली में जांच के बाद लगाए गये थे और फिर 2013-2014 में भारत सरकार ने कंपनी को प्रतिबंधित कर दिया था। आपको बता दें कि, अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदा 2010 में हुआ था।

घोटाले में आए थे कई बड़े नाम
घोटाले का खुलासा होने के बाद भारतीय रक्षा मंत्रालय ने अगस्ता वेस्टलैंड को सभी भुगतान रोक दिए थे और फिर 2013-2014 में एग्रीमेंट को खत्म कर दिया गया था। इस मामले में सीबीआई ने इंडियन एयरफोर्स के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल एसपी त्यागी, फिनमेकेनिका के सीईओ ग्यूसेप ओरसी, अगस्ता वेस्टलैंड के प्रमुख ब्रूनो स्पाग्नोलिनी और कथित बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल के खिलाफ मामला दर्ज किया था। इस मामले की जांच अभी भी चल ही रही है और सीबीआई ने हाल ही में अदालत को बताया कि इसकी जांच के लिए नौ अलग अलग देशों की अदालत को अनुरोध पत्र भेजा गया है और फिलहाल मामले की सुनवाई लंबित पड़ी है।












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