भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिका में मानवाधिकार उल्लंघन पर जताई चिंता, जयशंकर बोले, चिंतित हूं...
अमेरिका रूस की निंदा नहीं करने को लेकर लगातार भारत के साथ माइंड गेम खेल रहा है और एक दिन पहले अमेरिका के विदेश मंत्री ने भारत में मानवाधिकार को लेकर सवाल उठाया था।
वॉशिंगटन, अप्रैल 14: रूस की निंदा नहीं करने को लेकर अमेरिका कई तरहों से भारत पर प्रेशर बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन भारत ने बिना झुके अमेरिका को उसका चेहरा आइने में दिखाया है। भारत जिस तरह से अमेरिका के सामने अडिग और बेफिक्र होकर खड़ा हुआ है, उसने वॉशिंगटन को सकते में डाल दिया है और लगातार भारत में मानवाधिकर पर सवाल उठाने वाले अमेरिका को भारतीय विदेश मंत्री ने उसी की भाषा में जवाब दिया है।

अमेरिका का माइंड गेम
अमेरिका रूस की निंदा नहीं करने को लेकर लगातार भारत के साथ माइंड गेम खेल रहा है और एक दिन पहले अमेरिका के विदेश मंत्री ने भारत में मानवाधिकार को लेकर सवाल उठाया था और अब भारतीय विदेश मंत्री ने उन्हें उन्हीं की भाषा में जवाब दिया है। रूसी एस-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद को लेकर अमेरिका की तरफ से भारत पर प्रतिबंध लगाने की भी धमकी दी गई थी। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को कहा कि, CAATSA, अमेरिका का घरेलू कानून, जो अमेरिका के विरोधियों के साथ इस तरह के लेनदेन के लिए प्रतिबंधों का प्रावधान करता है, उसपर उन्हें फैसला करना है। भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि, ‘यह उनका कानून है, और जो कुछ भी करना है, वह उन्हें करना है।‘ उन्होंने स्पष्ट रूप से घोषणा की, कि भारत प्रतिबंधों की चिंता किए बिना अपनी सुरक्षा की रक्षा के लिए जो उचित होगा, वह करेगा।

मानवाधिकार पर क्या बोले जयशंकर?
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका में मानवाधिकर उल्लंघन को लेकर भी अपनी चिंता जताई है और वॉशिंगटन में पत्रकारों से बात करते हुए भारतीय विदेश मंत्री ने भारत में मानवाधिकारों की अमेरिकी आलोचना को अमेरिकी लॉबी और उनकी वोट बैंक की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। टीओआई के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि, ‘लोगों को हमारे बारे में विचार रखने का अधिकार है। हम उनकी लॉबी और वोट बैंक के बारे में भी विचार रखने के भी हकदार हैं। हम मितभाषी नहीं होंगे। हमारे पास अन्य लोगों के मानवाधिकारों पर भी विचार हैं, खासकर जब यह हमारे समुदाय से संबंधित है।‘ इसके साथ ही भारतीय विदेश मंत्री ने मानवाधिकारों पर लगातार अमेरिकी व्याख्यानों का सबसे मजबूत खंडन किया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने उठाए थे सवाल
आपको बता दें कि, भारतीय विदेश मंत्री ने अमेरिका में मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर उस वक्त करारा जवाब दिया है, जब अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बयान दिया था, कि भारत में मानवाधिकार उल्लंघन पर अमेरिका की नजर है। दरअसल, अमेरिका की तरफ से मानवाधिकारों के ऊपर ‘वार्षिक कंट्री रिपोर्ट' जारी किया गया है, जिसमें भारत पर सवाल उठाए गये हैं और कहा गया है कि, भारत में स्थानीय और राष्ट्रीय, दोनों स्तरों पर सरकारी अधिकारी शारीरिक उत्पीड़न और हमलों के माध्यम से महत्वपूर्ण मीडिया आउटलेट्स को "डराने" की कोशिश करते हैं। जिसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि, अमेरिका भारत में "मानवाधिकारों के हनन में वृद्धि" की निगरानी कर रहा है।
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सिखों पर हमला, अमेरिका चुप
जो अमेरिका भारत में मानवाधिक उल्लंघन की बात करता है, वही अमेरिका अपने देश में सिख समुदाय, एशियंस पर हमला और ब्लैक लोगों पर हमलों को लेकर चुप्पी साधे रहता है और हद तो ये है, कि अमेरिका में सरकारी नौकरियों और सेना में ब्लैक लोगों की नौकरी काफी मुश्किल से मिलती है। बात अगर इसी हफ्ते की करें, तो अमेरिका के सबसे बड़े शहर न्यूयॉर्क में 2 सिखों पर हमला किया गया है। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय दूतावास की ओर से इस बारे में जानकारी दी गई। बताया गया कि, सिखों पर यह हमला न्यूयॉर्क के रिचमंड हिल्स एरिया में किया गया। उस वक्त वे लोग मॉर्निंग वॉक पर थे। पता चलने पर, हमले के संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई। अब तक इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

अपने गिरहेबां में झांको अमेरिका
आपको जानकर हैरानी होगी, कि जो अमेरिका मानवाधिकार का चैंपियन बनने की कोशिश करता है, उस अमेरिका में मानवाधिकार का उल्लंघन करने वाले, ब्लैक लोगों की जान लेने वाले और उन्हें प्रताड़ित करने वाले 98 प्रतिशत पुलिसवालों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। साल 2013 से 2020 तक अफ्रीकी मूल के लोगों पर हुए हमले के मामले में 98 प्रतिशत पुलिसवालों पर मुकदमा तक दर्ज नहीं हुआ।

अमेरिकी पुलिस की बर्बरता देखिए
जिस अमेरिका ने कहा है, कि भारत में सराकारी अधिकारी मानवाधिकार का उल्लंघन करते हैं, उस अमेरिका में सिर्फ साल 2020 में पुलिसवालों ने 1127 लोगों की हत्या कर दी। वहीं, साल 2022 में सिर्फ 3 महीने में ही अमेरिका में पुलिसवाले 323 आम नागरिकों को मौत के घाट उतार चुके हैं। वहीं, अमेरिका नस्लीय हिंसा के लिए पूरी दुनिया में कुख्यात रहा है और ब्लैक लाइव्स मेटर कहीं और नहीं, अमेरिका में नस्लीय हिंसा के खिलाफ ही गुस्से की लहर का एक रूप था। अमेरिका में मानवाधिकार का एक रूप ये भी है, कि सिर्फ साल 2020 में अमेरिका के अलग अलग इलाकों में शूटिंग में 41 हजार 500 लोग मारे गये हैं, लेकिन अमेरिका को अपना घर नहीं दिखता है, लेकिन भारतीय लोकतंत्र और भारत का मानवाधिकार हमेशा अमेरिका की आंखों में खटकता रहता है।
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