अमेरिका में 3 साल का बच्चा पुलिस कस्टडी में, पिता गिरफ्तार
वाशिंगटन। कभी आपने सुना है कि तीन साल के बच्चे को पुलिस ने गिरफ्तार किया हो। लेकिन अमेरिका में भारतीय नागरिक के तीन साल के बच्चे को पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया है।

अमेरिकी अथॉरिटीज ने भारतीय नागरिक को उस वक्त गिरफ्तार कर लिया जब वह अपने 3 साल के बच्चे को अस्पताल में इलाज कराने के लिए ले गयी थी। बच्चे के पैर में हेयरलाइन फ्रैक्चर था जिसके कारण डॉक्टर उसका इलाज कर रहे थे।
महिला का कहना है कि जब बच्चा अपने पिता के उपर चढ़ने की कोशिश कर रहा था तो उस वक्त वह फिसल गया और वह गिर गया जिसके कारण उसे चोट लग गयी थी।
महिला ने अस्पताल के फॉर्म में यह लिखा था कि शायद पिता ने शायद बच्चे को गिरा दिया हो जिसके कारण अस्पताल ने चाइल्ड एब्युजमेंट टीम को फोन करके बुला लिया।
वहीं कुछ देर बाद हेल्थ एंड ह्युमेन सर्विसेज के अधिकारी अस्पताल में आये और महिला से कई कागजों पर हस्ताक्षर कराये और वह चले गये। वहीं महिला का कहना है कि कई दस्तावेज तो उन्हें समझ भी नहीं आये कि उनमें क्या है। उसके बाद महिला को और बच्चे को पुलिस ने अपनी कस्टडी में ले लिया।
महिला को पुलिस ने बताया कि अब आपके पति को घर में रहने की इजाजत नहीं हैं क्योंकि उन्होंने बच्चे की जान का खतरा पहुंचाया है। जिसके बाद महिला को अक्सर अस्पताल और विधिक अधिकारी उनके घर बच्चे को पालने का तरीका सिखाने आने लगे। जबकि बच्चे के पिता को अपने पड़ोसियों और दोस्तों के साथ रहना पड़ रहा है।
वहीं महिला ने बताया कि वह बच्चे का पूरा खयाल रखती है और हर तरह से उसे सुरक्षित रखते हैं। वहीं पुलिस ने पूछा कि क्या यह सच है कि बच्चे के पिता ने बच्चे का सर जानबूझकर दीवार से मारा था। जिसे महिला ने सीधे तरह से खारिज करते हुए आरोपों को बकवास करार दिया।
हालांकि कुछ दिन बाद पिता को घर आने की इजाजत दे दी गयी लेकिन कुछ दिनों बाद ही यह मामला फिर से बाल अपराध कोर्ट में पहुंचा जहां
पिता को आरोपी पाया गया। लेकिन बच्चे के पिता ने 1000 अमेरिकी डॉलर के बदले जमानत लेने में कामयाब रहा।
वहीं एक बार फिर से पिता को बच्चे से अलग कर दिया गया है। बच्चे की मां का कहना है कि वह भारतीय दूतावास से मदद चाहती हैं और वह इस मामले में कानूनी मदद चाहती है। सैंन फ्रैंसिस्कों मे भारतीय दूतावास ने महिला की मदद का भरोसा दिया है। वहीं महिला अपने घर कोलकाता वापस आना चाहती हैं
लेकिन ऐसे में सवाल यह उठता है कि पैरेंटिंग के नाम पर जिस तरह से बच्चे के माता-पिता को कानूनी दांवपेंच में उलझकर परेशान होना पड़ता है वह काफी मुश्किल का सबब बनता जा रहा है। इससे पहले भी कई ऐसे मामले आ चुके हैं जहां पैरेंटिंग के नाम पर भारतीय नागरिकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।












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