अमेरिका में भारतीय राजदूत को मिला 'सिख हीरो अवॉर्ड', खालसा चिह्न को लेकर खालिस्तानियों को लगाई फटकार
भारत के राजदूत तरणजीत सिंह संधू ने अपने संबोधन में कहा कि खालसा की स्थापना बैशाखी के दिन गुरु गोबिंद सिंह जी ने एकजुट करने के लिए की थी, न की बांटने के लिए।

अमेरिका के एक निजी संगठन 'सिख्स ऑफ अमेरिका' ने अमेरिकी भारतीय राजदूत तरनजीत सिंह संधू को 'सिख हीरो अवार्ड' से सम्मानित किया है। हाल ही में खालिस्तानी समर्थकों के एक संगठन ने अमेरिका में स्थित भारतीय दूतावास में हिंसा भड़काई थी, जिसके बाद संधू को सम्मानित किया गया।
खालिस्तान समर्थकों के एक छोटे समूह द्वारा अमेरिका में भारतीय मिशनों में हिंसा के दौरान संधू को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया था। संधू ने अवार्ड प्राप्त करते हुए अलगाववादियों और खालिस्तानी समर्थकों को कड़ा संदेश दिया। अपने संबोधन में भारतीय राजदूत ने कहा कि खालसा तोड़ने वाली नहीं बल्कि जोड़ने वाली ताकत है।
संधू ने अमेरिका, कनाडा, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में हुई हिंसा की घटनाओं के परोक्ष संदर्भ में कहा, "खालसा झंडा, जो तख्त (स्वर्ण मंदिर) और निशान साहिब में फहराता है, एकता, शांति और सार्वभौमिक प्रेम का ध्वज है, इस प्रतीक का उपयोग करें लेकिन इसका अपमान न करें।"
संधू ने प्रवासी सिखों को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि पंजाब और पंजाब के युवाओं को भारत में हो रही आर्थिक, वित्तीय, तकनीकी और डिजिटल क्रांति से जुड़ने की जरूरत है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाइडेन इस ओर लगातार काम कर रहे हैं।
इस कार्यक्रम में अमेरिका के विभिन्न इलाकों के कई प्रमुख सिखों ने हिस्सा लिया। गौरतलब है कि खालसा पंथ की स्थापना सिखों के 10वें गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में की थी। अमेरिका में भारतीय राजदूत ने कहा कि सिख धर्म और इतिहास का मूलभूत सिद्धांत सार्वभौमिकता, एकता, समानता, ईमानदारी से रहना, सेवा, ध्यान, मानसिक शांति और लोगों के प्रति सद्भाव है।
आपको बता दें कि बीते महीने खालिस्तान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने सैन फ्रांसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर हमला किया था। भारत ने इस घटना पर नई दिल्ली में अमेरिकी प्रभारी डी'एफ़ेयर के साथ अपना "कड़ा विरोध" दर्ज किया और अमेरिकी सरकार से ऐसी घटनाओं को समय रहते रोकने के लिए उचित उपाय करने को कहा था।












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