Explain: इंडियन एयरफोर्स में विमानों की कमी का संकट क्या है? Vice चीफ मार्शल ने 'आत्मनिर्भरता' पर उठाए सवाल

Indian Air Force: भारतीय वायु सेना (IAF) के उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने शुक्रवार को कहा, कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर 'आत्मनिर्भरता' हासिल नहीं की जा सकती। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, कि भू-राजनीति ने आत्मनिर्भर होने का सबक दिया है और इसे अक्षरशः और भावना के साथ समग्र रूप से अपनाया जाना चाहिए।

लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने सरकार के 'आत्मनिर्भरता' अभियान पर सवाल उठाए हैं, क्योंकि इंडियन एयरफोर्स को लंबे समय से लड़ाकू विमानों की कमी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भारत सरकार ने ना तो किसी विदेशी कंपनी के साथ लड़ाकू विमान खरीदने के लिए डील किया है और ना ही भारत सरकार, भारत में ही लड़ाकू विमान के निर्माण के लिए किसी विदेशी हथियार कंपनी को राजी कर पाई है।

indian air force

इस स्टोरी में हम बात करेंगे, कि आखिर भारतीय वायुसेना कैसे लड़ाकू विमानों की गंभीर कमी से जूझ रही है।

तेजस फाइटर जेट की भी इंजन ना मिलने की वजह से एयरफोर्स को अभी तक नहीं मिल पाया है, लिहाजा सवाल ये है, कि क्या उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह के 'आत्मनिर्भरता' वाले बयान को इस संदर्भ में लेना चाहिए?

आत्मनिर्भरता पर सवाल उठाने की वजह समझिए

भारतीय वायुसेना के शीर्ष अधिकारी के ये कड़े शब्द ऐसे समय में आए हैं., जब केंद्र सरकार ने रक्षा में पूर्ण आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए जोर लगा रखी है, जबकि भारतीय वायुसेना लड़ाकू विमानों और अन्य आवश्यक रक्षा उपकरणों की कमी से जूझ रही है, और रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण उनकी सेवा क्षमता काफी प्रभावित हो रही है।

सेंटर फॉर एयर पावर स्टडीज (CAPS) और इंडियन मिलिट्री रिव्यू (IMR) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एयर एंड मिसाइल डिफेंस इंडिया 2024 पर एक सेमिनार और प्रदर्शनी में एयर मार्शल सिंह ने कहा, कि जिस दर से भारत के विरोधी अपनी संख्या बढ़ा रहे हैं और नई टेक्नोलॉजी को अपना रहे हैं, उससे क्षमता अंतर(भारत और उसके दुश्मनों के बीच) लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, "आत्मनिर्भरता हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर हासिल नहीं की जा सकती है।"

उन्होंने कहा, कि DRDO, DPSUs और निजी उद्योग को लेटेस्ट तकनीकों, अनोखे समाधानों और क्षमता में वृद्धि पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है।

एयरफोर्स के शीर्ष अधिकारी ने कहा, कि "अगर भू-राजनीति से कोई सबक मिलता है, तो वह है आत्मनिर्भर होना।" उन्होंने आगे कहा, कि "आत्मनिर्भर भारत सिर्फ एक चर्चा का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि यह एक सर्वोपरि चिंता का विषय होना चाहिए और इसे अक्षरशः और भावना से समग्र रूप से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।"

उन्होंने कहा, कि भारतीय वायुसेना के पास 1,12,000 करोड़ रुपये के वायु रक्षा अनुबंध चल रहे हैं और करोड़ों के कॉन्ट्रैक्ट पाइपलाइन में हैं।

उन्होंने कहा कि एयरफोर्स ने रडार, एसएजीडब्ल्यू सिस्टम और सीयूएएस हथियारों (सॉफ्ट और हार्ड किल) में अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए डीआरडीओ और निजी उद्योग के साथ काम किया है।

उन्होंने कहा, "हमारे पास विश्वसनीय और व्यापक नेटवर्क वाली हवाई रक्षा है। डायरेक्टेड ऊर्जा हथियारों, क्लोज-इन हथियार प्रणालियों, सीसीडी और हमारे हवाई प्लेटफार्मों और सतह से हवा में मार करने वाली
डायरेक्टेड हथियार प्रणालियों के आधुनिकीकरण के क्षेत्र में भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है।"

पूर्व एयर मार्शल का मिला साथ

सेंटर ऑफ एयर पावर स्टडीज के पूर्व महानिदेशक एयर मार्शल अनिल चोपड़ा (सेवानिवृत्त) ने कहा, कि भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख ने सही बात कही है।

चोपड़ा ने कहा, "आत्मनिर्भरता कम सैन्य क्षमता की कीमत पर नहीं हो सकती। सेना का काम देश की रक्षा करना है और किसी भी समय, इसके लिए उसके पास पर्याप्त ताकत होनी चाहिए। अगर हमारे सैन्य प्लेटफॉर्म का विकास पिछड़ रहा है, तो अंतरिम समाधान खोजने होंगे...भले ही इसका मतलब आयात का सहारा लेना पड़े।"

चोपड़ा ने साफ शब्दों में कहा, कि "अगर हमें देश की रक्षा करनी है, तो यह हर किसी का काम है। यह सिर्फ़ वर्दीधारी व्यक्ति का काम नहीं है।"

कार्यक्रम में उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने कहा, "तकनीकी प्रगति अपनी तीव्र गति से हमें लगातार आश्चर्यचकित करती रहती है। कुछ साल पहले तक जो अकल्पनीय था, वह अब वास्तविकता बन गया है। युद्ध में टेक्नोलॉजी के समावेश के प्रभाव ने यह स्पष्ट कर दिया है, कि सशस्त्र बलों में हमें विचारों और कार्यों दोनों में अधिक चुस्त और लचीला होने की आवश्यकता है।"

इंडियन एयरफोर्स के पास कम हो रहे विमान?

उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह की चिंता स्वाभाविक है और एयरफोर्स ने सालों से अपने स्क्वाड्रन की लगातार कम होती संख्या को लेकर चिंता जताई है।

भारतीय वायुसेना के पास 42 फाइटर जेट स्क्वाड्रन निश्चित तौर पर होने चाहिए, लेकिन इस वक्त हमारे पास सिर्फ 31 फाइटर जेट स्क्वाड्रन रह गए हैं। और चीन की आक्रामकता को देखते हुए ये अच्छी स्थिति नहीं है, क्योंकि भारत को हमेशा दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ने की क्षमता बनाए रखने की सलाह दी जाती रही है।

स्थिति ये है, कि भारतीय वायुसेना के पास अब लड़ाकू विमानों की तुलना में, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल इकाइयां ज्यादा हैं। यानि, भारतीय वायुसेना के बेड़े में लड़ाकू विमानों की संख्या काफी कम हो गई है।

भारत की पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान वाला प्रोजेक्ट, जिसे AMCA (एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) कहा जाता है, उसकी फाइल कई सालों से सरकारी ऑफिस में धूल खा रही थी और इस साल मार्च में आखिरकार सरकार ने डिजाइन को हरी झंडी दी है।

भारत सरकार ने AMCA के लिए 15000 करोड़ आवंटित किए हैं, जो इस प्रोजेक्ट के लिहाज से ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।

स्थिति ये है, कि अगर आज की तारीख में सारे के सारे पैसे आवंटित कर भी दिए जाएं, तो भारत को स्वदेशी पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान बनाने में कम से कम 10 साल और लगेंगे, जबकि चीन 2 तरह के पांचवी पीढ़ी विमानों का संचालन करता है और पाकिस्तान ने चीन से पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमान खरीदने की घोषणा कर दी है।

इसके अवाला, इंडियन एयरफोर्स ने 114 मीडियम रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने के लिए लंबे समय से भारत सरकार को अर्जी दे रखी है और भारत सरकार की कोशिश, कोई ऐसा कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना है, जो इन लड़ाकू विमानों का निर्माण भारत में करे, लेकिन ऐसा करने के लिए अभी तक कोई तैयार नहीं हुआ है। जिससे एयरफोर्स की क्षमता पर गंभीर असर पड़े हैं।

वहीं, भारतीय वायुसेना लंबे अर्से से हल्के लड़ाकू विमान (LCA) का इंतजार कर रही है, लेकिन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बार बार अपने डेडलाइन को मिस कर रहा है। अब मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि HAL ने भारतीय वायु सेना (Indian Air Force) को LCA Tejas MK-1A की आपूर्ति करने की तारीख जुलाई के अंत तक तय की है। लेकिन ऐसा कहा जा रहा है, कि ये डेडलाइन भी संभव नहीं है।

HAL को पहले फाइटर जेट्स की आपूर्ति फरवरी 2024 तक करनी थी, लेकिन HAL ऐसा कर नहीं पाया और उसने डिलीवरी की नई तारीख मार्च 2024 तय की, लेकिन HAL मार्च में भी फाइटर जेट्स की डिलीवरी करने में नाकाम हो गया।

भारतीय वायुसेना को क्यों हो रही परेशानी?

फाइटर जेट प्रोजेक्ट्स में देरी की वजह से भारतीय वायुसेना को बड़ा झटका लगा है, जो अपने बेड़े में बचे हुए MIG-21 बाइसन लड़ाकू विमानों की जगह लेने के लिए इन नए विमानों का बेसब्री से इंतजार कर रही है।

इस वक्त भारतीय वायुसेना के पास MIG-21 के दो स्क्वाड्रन हैं, जो नंबर-2 स्क्वाड्रन 'कोबरा' और नंबर 23 स्क्वाड्रन 'पैंथर्स' है। इनमें से एक स्क्वाड्रन को इस साल और दूसरे को अगले साल चरणबद्ध तरीके से वायुसेना के बेड़े से हटा दिया जाएगा और उनकी जगह पर LCA-Mk1A विमानों को शामिल किया जाएगा।

भारतीय वायुसेना के लिए अपने लड़ाकू स्क्वाड्रन की ताकत को बनाए रखने के लिए LCA का बेड़े में समय पर शामिल होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, ताकि इसे 30 स्क्वाड्रन से नीचे गिरने से रोका जा सके।

यूरेशियन टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से लिखा था, कि कि जनरल इलेक्ट्रिक की तरफ से विमानों की इंजन के सप्लाई में देरी होने की वजह से HAL को फाइटर जेट्स की समय पर डिलीवरी देने में देरी आई है और ये सप्लाई चेन की दिक्कत है।

यानि, भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने अब खुलकर कहना शुरू कर दिया है, कि एयरफोर्स की क्षमता को नहीं बढ़ाया जाना, देश की सुरक्षा से समझौता है!

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