टैंक, तोपखाने, रडार सिस्टम और 70 हजार सैनिक... पूर्वी लद्दाख में इंडियन एयरफोर्स ने कैसे चलाया 'असंभव' मिशन?

Indian Air Force: इंडियन एयरफोर्स ने पूर्वी लद्दाख में 2020 में गलवान घाटी में हुए हिंसक झड़प के बाद पिछले तीन सालों में करीब 70 हजार सैनिकों, 9 हजार टन से ज्यादा वजन वाले टैंकों, तोपखानों और बीएमपी जैसे भारी प्लेटफॉर्मों को एयरलिफ्ट किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के साथ तनाव बढ़ने के लिए ओवरऑल ऑपरेशन की तैयारियों को अंजाम देने के लिए 70 हजार सैनिक पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव वाले जगहों के साथ साथ दूसरे प्वाइंट्स को सुरक्षित करने के लिए भेजे गये हैं।

Indian Air Force

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया है, कि गलवान घाटी में झड़पों के तुरंत बाद भारतीय वायुसेना ने बहुत बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाया है। अधिकारियों ने कहा है, कि अनुमानित 68 हजार से ज्यादा सैनिकों को वायुसेना ने एयरलिफ्ट किया है। वहीं, 300 से ज्यादा बीएमएपी, करीब 100 टैंक और कुल 9 हजार टन से ज्यादा वजन वाली भारी तोपें एयरलिफ्ट की गई हैं।

चीन को उसी की भाषा में जवाब

पूर्वी लद्दाख से ये बड़ा अपडेट उस वक्त आया है, जब एलएसी पर भारत और चीन के बीच सैन्य गतिरोध लगातार चौथे वर्ष में प्रवेश कर गया है। दोनों पक्षों के बीच व्यापक कूटनीतिक और सैन्य बैठकों के बावजूद - 2020 के बाद के टकराव वाले प्वाइंट्स पर बफर जोन का निर्माण हो गया है और दोनों ही तरफ से करीब 50 हजार से 60 हजार सैनिक तैनात हैं।

लेकिन, रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपने सैनिकों की संख्या लगातार बढ़ाई है और एलएसी पर भारत की तरफ से काफी तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एलएसी पर अगर चीन इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है, तो भारत चीन से दो कदम आगे ही चल रहा है।

इसके अलावा, एलएसी पर देपसांग फील्ड और डेमचोक पर अभी तक टकराव जारी है और अभी तक दोनों देशों के बीच इन दो प्वाइंट्स को लेकर समझौता नहीं हो पाया है। रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार को होने वाली भारत-चीन सैन्य वार्ता के 19वें दौर में इन दो प्वाइंट्स को लेकर चर्चा की जाएगी, भारत की कोशिश होगी, कि वो इन दो प्वाइंट्स पर चीन को सैनिकों के डिसइंगेजमेंट के लिए तैयार करे।

पूर्वी लद्दाख में भारत की अद्भुत तैयारी

इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, एक अधिकार ने कहा है, कि पूर्वी लद्दाख में भारतीय वायुसेना के परिवहन अभियानों में रडार और सतह से हवा में मार करने वाले निर्देशित हथियार प्रणालियों के साथ साथ कई अन्य महत्वपूर्ण वायुसेना संपत्तियों को पूर्वी लद्दाख में आगे के स्थानों तक पहुंचाया गया है।

अधिकारी ने कहा, कि "इन संसाधनों की वजह से भारत ने सर्विलांस को काफी ज्यादा सख्त कर दिया है और काफी कम वक्त में एयरफोर्स ने इन सारे सामानों को एयरलिफ्ट कर दिया है, जो आम समय में किए जाने वाले एयरलिफ्ट का डेढ़ गुना ज्यादा है। इंडियन एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर और दूसरे संसाधनों के साथ रणनीतिक लक्ष्य बनाकर इस काम को काफी जल्द किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 से इंडियन एयरफोर्स के C-17 ग्लोबमास्टर III और C-130 J सुपर हरक्यूलिस, सैनिकों और सैन्य उपकरणों को आगे के ठिकानों तक पहुंचाने के लिए लगातार उड़ानें भर रहे हैं।

अधिकारियों के अनुसार, भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने दूर-दराज के इलाकों में रडार तैनात करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और नियमित रूप से स्पेयर और राशन की आपूर्ति करके आगे के स्थानों पर सैन्य चौकियों के रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भारतीय वायुसेना ने सैनिकों को आवश्यक स्ट्रैटिजिक सहायता प्रदान करने के लिए अपने अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ भारी उपकरणों को ले जाने के लिए चिनूक हेवी-लिफ्ट हेलीकॉप्टरों को इस क्षेत्र में तैनात किया है। पहले सैनिकों के लिए बने बनाए घर को उठाने वाले चिनूक की तस्वीरें भी सामने आईं थीं। 2020 में लद्दाख सेक्टर में दो स्वदेशी निर्मित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए थे।

एक अधिकारी ने कहा, "हेलीकॉप्टर्स के जरिए बनाए जा रहे पुलों, सुरंगों और सड़कों की लगातार रेकी की गई और उनकी सुरक्षा की गई, वहीं अन्य चल रही बुनियादी ढांचा निर्माण परियोजनाओं में भी सहायता की है, जिन्हें पिछले तीन वर्षों में बढ़ाया गया है।"

बुनियादी ढांचे को आगे बढ़ाने के हिस्से के रूप में, कई हेलीपैड का निर्माण किया जा रहा है और मौजूदा एडवांस लैंडिंग ग्राउंड जैसे कि न्योमा में लड़ाकू अभियानों के लिए अपग्रेड किया जा रहा है।

अधिकारी ने कहा, कि "पिछले तीन वर्षों में अग्रिम स्थानों पर रडार की तैनाती के साथ एयर डिफेंस नेटवर्क को काफी मजबूत किया गया है, जो चौबीसों घंटे वायु योद्धाओं द्वारा संचालित होते हैं। इससे वास्तविक समय में दुश्मन की किसी भी हवाई गतिविधि की निगरानी करने में मदद मिलती है।"

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चीन से किसी भी वक्त टक्कर लेने की तैयारी

मई 2020 के तुरंत बाद, भारतीय वायुसेना ने पूर्वी लद्दाख में नियमित लड़ाकू हवाई गश्त करने और गतिरोध की स्थिति में आक्रामक मुद्रा पेश करने के लिए राफेल, एसयू 30 एमकेआई, मिराज 2000 और मिग -29 सहित अन्य लड़ाकू विमानों को भी तैनात किया है।

उदाहरण के लिए, भारतीय वायुसेना ने अपने मिग-29 लड़ाकू विमानों को लेह एयरबेस से रात में उड़ान भरने की क्षमता से लैस किया, जिससे जेट कम समय में एलएसी पर सभी तरह के ऑपरेशन करने में सक्षम हो गए हैं।

वास्तविक समय में खुफिया जानकारी जुटाने और एलएसी पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी करने के लिए भारतीय वायुसेना द्वारा तैनात रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (आरपीए) की एक सीरिज के साथ, कुछ लड़ाकू जेट भी इंटेलिजेंस-निगरानी-टोही (आईएसआर) भूमिकाओं के लिए तैनात किए गए हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, कई लड़ाकू विमानों को लेह और आसपास के ठिकानों पर ले जाने का फैसला किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए महत्वपूर्ण था, जो गलवान घाटी की झड़प के बाद के महीनों में उत्पन्न हो सकती थी, जब एलएसी पर तनाव बढ़ रहा था।

पिछले साल जून में पूर्वी लद्दाख में चीन द्वारा हवाई उल्लंघन की एक घटना हुई थी। एक चीनी विमान को एलएसी के करीब खतरनाक तरीके से उड़ते हुए पाया गया था, और ये एक मुद्दा था, जिस पर भारत और चीन के बीच 16वें दौर की सैन्य वार्ता में चर्चा हुई थी। जिसके बाद दोनों पक्षों ने किसी भी हवाई गतिविधि की योजना बनाने से पहले एक-दूसरे को जानकारी करने का निर्णय लिया था।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, कि भले ही पूर्वी लद्दाख में स्थिति 2020 की तुलना में बेहतर हो गई है, लेकिन भारतीय वायुसेना द्वारा क्षेत्र में नियमित रूप से की जाने वाली उड़ानों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।

अधिकारी ने कहा, कि एयरफोर्स का मिशन जारी हैं और क्षेत्र में चल रहे बुनियादी ढांचे के विकास और नियमित संचालन को देखते हुए संभवतः इसमें वृद्धि हुई है।

अब सभी की निगाहें सोमवार को भारत-चीन कोर कमांडर स्तर की 19वें दौर की वार्ता पर होंगी। यह दक्षिण अफ्रीका में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कुछ दिन पहले आया है, जहां प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग उपस्थित होंगे। दोनों देशों के विदेश मंत्री और एनएसए हाल के दिनों में पहले ही मिल चुके हैं, जो तात्कालिकता की भावना का संकेत है।

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