चीन का गुलाम मुइज्जू अब अकड़ता रहे.. भारत ने मालदीव से सिर्फ 500KM दूर बनाया सैन्य अड्डा, गेमचेंजर है Minicoy
India-Minicoy Islands: हिंद महासागर में भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले द्वीप देश मालदीव को अब भारत ने खो दिया है और अब मालदीव चीन की गोदी में जाकर बैठ गया है। मालदीव क्या करेगा, इसको लेकर भारत ज्यादा कुछ नहीं कर सकता है, लेकिन हिंद महासागर में भारत के पास इतने ठिकाने हैं, कि चीन कभी भी इस क्षेत्र में अपना प्रभुत्व कायम नहीं कर सकता है।
मालदीव को लेकर भारत को पहले से ही अहसास रहा होगा, कि वहां चलने वाली 'भारत विरोधी मुहिम' आज नहीं तो कल देश की सुरक्षा को खतरा पैदा करेगी, इसीलिए काफी पहले से ही भारतीय नौसेना लक्षद्वीप द्वीप समूह में एक नौसैनिक हवाई अड्डा बनाना शुरू कर दिया था।

अरब सागर में स्थित भारत का लक्षद्वीप, मालदीव से सिर्फ 507 किलोमीटर दूर है और इसे मालदीव के विकल्प के रूप में देखा जाता है। सबसे खास बात ये है, कि इस द्वीप से मालदीव सीधे निशाने पर आता है, यानि अगर भविष्य में चीन को मालदीव में सैन्य अड्डा मिल भी जाता है, तो भारत उसे सेकंड्स में तहस-नहस कर सकता है।
हिंद महासागर में भारत बनाम चीन
लक्षद्वीप में नौसैनिक अड्डा बनाने का मतलब ये है, कि अब भारत बहुत जल्द अपनी अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों की तैनाती वहां करेगा, जिससे हिंद महासागर के दक्षिणी हिस्से में भारत की स्थिति अत्यंत मजबूत हो जाएगी।
मिनिकॉय द्वीप पर बने वाले इस नौसैनिक अड्डे को इसी हफ्ते इंडियन नेवी को सौंपा जाएगा और एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इस अड्डे का निर्माण होने के बाद मालदीव भारत को ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा, क्योंकि हिंद महासागर में फिर भारत के लिए उसकी अहमियत काफी कम हो जाएगी।
मालदीव जैसे छोटे देश लगातार भारत को ब्लैकमेल करते रहे हैं और वर्तमान में मालदीव की मुइज्जू सरकार भारत के साथ अपने पारंपरिक करीबी सैन्य और राजनयिक संबंधों को तोड़ दिया है और पूरी तरह से चीन की ओर झुक गई है।
इसे भारत के रणनीतिक क्षेत्र में चीन के तख्तापलट के रूप में देखा गया है। मालदीव का रणनीतिक महत्व उसके आकार से नहीं, बल्कि हिंद महासागर में उसकी महत्वपूर्ण स्थान पर उसकी मौजूदगी है। मालदीव के अलग अलग द्वीप 960 किलोमीटर लंबी श्रृंखला के ऊपर फैले हुए हैं, जो उत्तर से दक्षिण तक चलती है और हिंद महासागर के बीच में एक प्रकार की दीवार का निर्माण करती है।

हिंद महासागर में व्यापारिक मार्ग
हिंद महासागर में में जहाजों की यात्रा के लिए दो सुरक्षित रास्ते हैं और वे इस द्वीप समूह के दक्षिणी और उत्तरी छोर पर स्थित हैं। दक्षिण पूर्व एशिया में मलक्का जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में अदन और होर्मुज की खाड़ी के बीच समुद्री व्यापार प्रवाह संचार के इन दोनों समुद्री मार्गों (SLOCs) पर निर्भर करता है।
मालदीव अनिवार्य रूप से "एक टोल गेट" के रूप में काम करता है, भले ही हिंद महासागर को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा प्रवाह के लिए मुख्य मार्ग माना जाता है। लिहाजा, मालदीव की ब्लैकमेलिंग को देखते हुए भारत हरकत में आया और अगले हफ्ते लक्षद्वीप द्वीप समूह में एक नया बेस शुरू करने के लिए तैयार हो गया है।
आईएनएस जटायु नाम का यह बेस, हिंद महासागर क्षेत्र में नौसेना की उपस्थिति बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। आईएनएस जटायु मिनिकॉय द्वीप पर आधारित होगा, जो सुरम्य लक्षद्वीप द्वीपों में से एक है।
कितना महत्वपूर्ण है मिनिकॉय द्वीप?
भारत का मिनिकॉय द्वीप 9-डिग्री चैनल के पास स्थित है, जो सबसे व्यस्त शिपिंग वाणिज्यिक मार्गों में से एक है, जो मालदीव के सबसे उत्तरी द्वीप से सिर्फ 130 किलोमीटर दूर है।
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2023 में इस द्वीप का दौरा किया था, जिसके बाद भारत और मालदीव के बीच सोशल मीडिया पर युद्ध छिड़ गया, जिसके परिणामस्वरूप राजनयिक तनाव तक पैदा हो गया। मालदीव में नई सरकार ने ना सिर्फ भारत को अपने सैनिकों को वापस बुलाने के लिए कहा, बल्कि उसने चीन के जासूसी जहाज को भी अपने पोर्ट पर आने की इजाजत दी है, जिसे अपने पोर्ट पर आने से इजाजत देने से श्रीलंका ने इनकार कर दिया था।
मिनिकॉय द्वीप पर सैन्य अड्डा बनने के बाद से भारत हर एक सेकंड हिंद महासागर में होने वाली गतिविधियों की निगरानी करता रहेगा, जिससे भारत की सुरक्षा मजबूत होगी।
यूरेशियन टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व भारतीय नौसेना कमोडोर अनिल जय सिंह ने कहा है, कि "भारत के लिए इस क्षमता को विकसित करना समझ में आता है। यह एक विमानन सुविधा होगी। यह न केवल भारत के एमडीए (समुद्री डोमेन जागरूकता) को बढ़ाएगा, जिससे पूरे हिंद महासागर क्षेत्र को लाभ होगा, बल्कि हमारे समुद्री पड़ोस में विकास की बेहतर निगरानी भी हो सकेगी।"
शुरूआत में INS जटायु को अधिकारियों और सैनिकों के एक छोटे दल के साथ कमीशन किया जाएगा। लेकिन बाद में यहां पर राफेल जैसे लड़ाकू विमानों के उतरने और ऑपरेशन के लिए स्पेस तैयार किया जाएगा। आईएनएस जटायु का कमीशनिंग समारोह को शांति के साथ नहीं होगा, बल्कि इसके जरिए भारत दुनिया को एक संदेश देने की कोशिश करेगा, कि इस द्वीप का मकसद क्या है।

क्या संदेश देना चाहता है भारत?
भारत इस द्वीप और सैन्य अड्डे के जरिए साफ शब्दों में क्षेत्रीय शक्तियों को एक संदेश दे रहा है, कि हिंद महासागर में मौजूद कोई भी देश भारत की ताकत को नजरअंदाज करने की कोशिश ना करें। भारत के दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर भी इस दौरान भारतीय नौसेना की पूरी ताकत का प्रदर्शन करते हुए मौजूद रहेंगे।
भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत एयरक्राफ्ट कैरियर टास्क फोर्स पर सवार होकर, करीब 15 युद्धपोतों के साथ, चार और 5 मार्च को आईएनएस जटायु नौसैनिक अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इस दौरान शीर्ष नौसेना अधिकारियों के साथ वो मिनिकॉय द्वीप की यात्रा करेंगे।
भारतीय नौसेना का इरादा संयुक्त कमांडर सम्मेलन के पहले चरण को भारतीय विमान वाहक पर आयोजित करने का है, जिसमें दो फ्लोटिला गोवा से कारवार से मिनिकॉय द्वीप से कोच्चि तक यात्रा करेंगे। कमांडर्स कॉन्फ्रेंस का दूसरा चरण 6-7 मार्च को होगा।
INS Jatayu- भारतीय नौसेना का प्रहरी
आईएनएस जटायु, अंडमान द्वीप समूह में अग्रणी नौसैनिक अड्डे आईएनएस बाज का समकक्ष होगा। आईएनएस बाज़ की तरह, यह सभी श्रेणी के लड़ाकू विमानों को संभालने में सक्षम होगा।
कमीशनिंग समारोह के दौरान, एमएच 60आर 'रोमियो' नौसेना हेलीकॉप्टरों का एक स्क्वाड्रन तैयार किए जाने की संभावना है। ये हेलीकॉप्टर निगरानी, खोज और बचाव अभियान और पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं को बढ़ाएंगे।
मिनिकॉय में एक नया हवाई क्षेत्र बनाने की योजना पर भी काम चल रहा है। यह हवाई क्षेत्र, विभिन्न प्रकार के सैन्य विमानों और यहां तक कि वाणिज्यिक एयरलाइनरों को भी समायोजित करेगा, जिससे संभावित रूप से द्वीप श्रृंखला में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, पास के अगत्ती द्वीप पर मौजूदा हवाई क्षेत्र का विस्तार करने की भी योजना भारत सरकार ने तैयार की है।
भारत, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में लगातार अपनी क्षमताओं को बढ़ा रहा है, जहां उसकी त्रि-सेवा कमान स्थित है। भारतीय लड़ाकू विमान नियमित रूप से द्वीपों से उड़ान भरते हैं, जिससे भारत को इस क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति होने का अनुमान लगाया जाता है। जैसे-जैसे हिंद महासागर में चीनी नौसेना की आक्रामकता की वृद्धि हुई है, भारत द्वीप क्षेत्रों में अपनी सुरक्षा मजबूत करके उसका जवाब दे रहा है।
लिहाजा, आने वाले वक्त में हिंद महासागर में भारत अपनी ताकत को इस कदर बढ़ा लेगा, कि मालदीव जैसे देशों की अहमियत ही खत्म हो जाए और वो भविष्य में कभी भारत को ब्लैकमेल करने की हिम्मत ना कर पाए।
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