गृहयुद्ध से जलते इस देश में महिलाओं की सेना को भेजेगा भारत, शांति स्थापना के लिए करेंगी काम
भारतीय दल में दो ऑफिसर शामिल होंगे और उनके अलावा 25 अलग अलग रैंक के सैन्य जवान शामिल होंगे। भारतीय दल एक एंगेजमेंट प्लाटून का हिस्सा बनेगा और सामुदायिक आउटरीच में विशेषज्ञ होगा।

UN Mission in Sudan: गृहयुद्ध की आग में जल रहे सुडान में भारत ने अपनी महिलाओं की एक सेना भेजने का फैसला लिया है, जो संयुक्त राष्ट्र अंतरिम सुरक्षा बल (UNISFA) का हिस्सा होगीं। ये टीम सूडान में शांति स्थापना के लिए काम करेंगी। एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने यूनाइटेड नेशंस अंतरिम सिक्योरिटी फोर्स में महिलाओं की एक पलटन को भेजने का फैसला लिया है।

सूडान जाएगी भारतीय महिलाओं की सेना
संयुक्त राष्ट्र की शांति सेना के तौर पर भारतीय महिला आर्मी की टीम सूडान के अबेई क्षेत्र में काम करेंगी और शांति स्थापना करने में अहम भूमिका निभाएंगी। यह संयुक्त राष्ट्र मिशन में महिला शांति सैनिकों की भारत की सबसे बड़ी सिंगल यूनिट होगी। भारत ने इससे पहले साल 2007 में लाइबेरिया में पहली बार महिलाओं की टुकड़ी को तैनात किया था। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन ने एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए इसकी पुष्टि की है। 2007 में, भारत संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के लिए पूरी तरह से महिलाओं की टुकड़ी को तैनात करने वाला पहला देश बन गया था। लाइबेरिया में गठित पुलिस यूनिट ने 24 घंटे गार्ड ड्यूटी प्रदान की थी और राजधानी मोनरोविया में रात्रि गश्त को अंजाम दिया था, जिससे लाइबेरिया पुलिस को अपनी क्षमता बनाने और बढ़ाने में मदद मिली थी।

भारतीय दल में कितने सैनिक
रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय दल में दो ऑफिसर शामिल होंगे और उनके अलावा 25 अलग अलग रैंक के सैन्य जवान शामिल होंगे। भारतीय दल एक एंगेजमेंट प्लाटून का हिस्सा बनेगा और सामुदायिक आउटरीच में विशेषज्ञ होगा। हालांकि, भारतीय दल सुरक्षा संबंधी व्यापक काम में भी शामिल होगा। अबेई में उनकी उपस्थिति का विशेष रूप से स्वागत किया जाएगा, जहां हाल ही में हिंसा में आई तेजी ने संघर्ष क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों के लिए चुनौतीपूर्ण मानवीय चिंताओं को जन्म दिया है। अबेई में तैनाती से भारत के शांति रक्षक टुकड़ियों में भारतीय महिलाओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि करने के इरादे की भी शुरुआत होगी। सुरक्षा परिषद ने 27 जून 2011 के अपने संकल्प-1990 द्वारा UNISFA की स्थापना करके सूडान के अबेई क्षेत्र में बनी खराब स्थिति को संभालने के लिए काम करने का फैसला किया है। यूएनएससी, सूडान में हिंसा, बढ़ते तनाव और जनसंख्या विस्थापन से बहुत चिंतित है।

शांति स्थापना में भारत की कोशिशें
सूडान में भारतीय दल कई मिशन को अंजाम देगा, जिसमें पीड़ितों तक मानवीय सेवा पहुंचाना, उनके बीच खाद्यान्न का वितरण करना, फ्लैशपॉइंट सीमा की निगरानी करना और मानवीय श्रमिकों की रक्षा करने जैसी अलग अलग जिम्मेदारियां होंगी। UNISFA की स्थापना सूडान सरकार और सूडान पीपुल्स लिबरेशन मूवमेंट (SPLM) के अदीस अबाबा, इथियोपिया में एक समझौते पर पहुंचने के बाद हुई है, ताकि अबेई से सुरक्षा को हटाते हुए वहां पर इथियोपियाई सैनिकों को क्षेत्र की निगरानी करने की जिम्मेदारी दी जा सके। आपको बता दें कि, 1948 से दुनिया भर में स्थापित 71 संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में से 49 में भारत ने हिस्सा लिया है, जिनमें 200,000 से ज्यादा भारतीय सैनिकों ने अपनी सेवा दी है। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों पर महिलाओं को भेजने की भारत की एक लंबी परंपरा रही है। 1960 में, कांगो गणराज्य में तैनात होने से पहले संयुक्त राष्ट्र रेडियो द्वारा भारतीय सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं में सेवारत महिलाओं का इंटरव्यू लिया गया था।












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