मालदीव और भारत के बीच चल रही है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत.. क्या चीनी गुलाम मुइज्जू ने बदला मन?
India-Maldives Trade Agreement: मालदीव ने शनिवार को कहा है, कि भारत ने दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौता बनाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं और इसे हासिल करने के लिए विचार-विमर्श जारी है।
मालदीव के आर्थिक विकास और व्यापार मंत्री मोहम्मद सईद ने माले में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा है, कि "वे (भारत) चाहते हैं, कि साफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौता) के अलावा मालदीव के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता हो।"

सईद ने कहा, कि मालदीव के राष्ट्रपति ने सभी देशों को यह अवसर दिया है, और सरकार का लक्ष्य व्यापार गतिविधियों में आसानी प्रदान करने के लिए ज्यादा से ज्यादा देशों के साथ समझौते करना है। मालदीव के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की मांग को लेकर भारत का कथित प्रयास, पिछले साल नवंबर से दोनों देशों के बीच चल रहे राजनयिक विवाद की पृष्ठभूमि में आया है, जब चीन समर्थक राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने एक के बाद एक भारत विरोधी फैसले लेने शुरू कर दिए थे।
अपनी शपथ ग्रहण के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने मालदीव से भारतीय सैन्यकर्मियों को वापस जाने के ऑर्डर दिए थे, जिसके बाद इस महीने की 10 तारीख तक मालदीव में मौजूद सभी भारतीय वापस लौट चुके हैं।
भारत-मालदीव ट्रेड एग्रीमेंट
1981 में भारत और मालदीव के बीच हुआ व्यापार समझौता, आवश्यक वस्तुओं के निर्यात का प्रावधान करता है। भारतीय उच्चायोग के रिकॉर्ड के मुताबिक, मामूली शुरुआत से बढ़ते हुए, भारत-मालदीव द्विपक्षीय व्यापार 2021 में पहली बार 300 मिलियन अमरीकी डालर को पार कर गया और 2022 में दोनों देशों का कारोबार 500 मिलियन अमरीकी डालर को पार कर गया।
समाचार पोर्टल Edition.mv की रिपोर्ट के मुताबिक, बगैर FTA भी भारत ने मालदीव को कई उत्पादों पर रियायत के साथ कारोबार की छूट दे रखी है।
वहीं, एक अन्य मालवीद के समाचार पोर्टल Sun.mv ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि FTA के लिए भारत के प्रस्ताव का खुलासा करने के बावजूद, सईद ने अपने और मालदीव में भारतीय उच्चायुक्त मुनु महावर के बीच उच्च स्तरीय बैठक के बारे में ज्यादा जानकारी का खुलासा नहीं किया। रिपोर्ट में कहा गया है, कि दोनों ने कई क्षेत्रों में दोनों देशों के सहकारी संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की है।
वहीं, दोनों देशों के बीच हुए पिछले समझौतों के बारे में बताते हुए, पोर्टल ने कहा है, कि मालदीव ने पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन अब्दुल गयूम के प्रशासन के दौरान चीन के साथ एक FTA समझौता किया था, लेकिन उनके उत्तराधिकारी, पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने समझौते की आलोचना की थी और इसका सम्मान नहीं किया था। आपको बता दें, कि इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को भारत समर्थक राष्ट्रपति माना जाता था। लेकिन, उनके चुनाव हारने के बाद पूरा खेल पलट गया है।
नवंबर 2023 में मुइज्जू के मालदीव के राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभालने के बाद मालदीव और चीन के बीच के कारोबार में नई जान आ गई है और FTA भी एक्टिवेट हो चुका है। Sun.mv ने कहा है, कि "राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा है, कि समझौता मालदीव और चीन के बीच मजबूत संबंधों का प्रतीक है और उनका प्रशासन समझौते का सम्मान जारी रखने के लिए तैयार है।"












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