Explainer: निज्जर बनाम पन्नून: कनाडा और अमेरिका को लेकर भारत की प्रतिक्रिया अलग-अलग क्यों है?

Nijjar vs Pannun: फाइनेंशियल टाइम्स ने इस हफ्ते अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अमेरिकी धरती पर एक खालिस्तानी अलगाववादी शख्स गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश को नाकाम कर दिया। इतना ही नहीं, अखबार ने ये भी दावा किया, कि साजिश में शामिल होने की चिंताओं पर अमेरिका ने भारत को चेतावनी जारी की है, जिसके जवाब में दिल्ली ने कहा, कि वह ऐसे इनपुट को "गंभीरता से" लेता है और ऐसे मुद्दों की संबंधित विभागों द्वारा "पहले से ही जांच की जा रही है।"

नई दिल्ली की यह प्रतिक्रिया, कनाडा स्थित खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों के संभावित संबंध के बारे में कनाडाई प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के "विश्वसनीय आरोपों" पर प्रतिक्रिया देने के तरीके से बहुत अलग है।

Nijjar vs Pannun

सितंबर महीने में, कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जब हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप मढ़े थे, उसके बाद भारत की तरफ से काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी गई थी और भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोपों को "बेतुका और प्रेरित" बताया था। वहीं, जब कनाडा ने जब एक भारतीय डिप्लोमेट को देश से बाहर निकाला, उसके बाद भारत ने भी एक कनाडाई डिप्लोमेट को बाहर निकाल दिया। वहीं, बाद में जाकर भारत ने ना सिर्फ वीजा सर्विस रोक दी, बल्कि 40 से ज्यादा कनाडाई कर्मचारियों को भी देश से बाहर निकाल दिया।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कनाडा को "आतंकवादियों, चरमपंथियों और संगठित अपराध" के लिए "सुरक्षित पनाहगाह" बताया और भारत ने कनाडा के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, वैसे शब्द हाल के वर्षों में भारत ने अफगानिस्तान या फिर कनाडा के अलावा शायद ही किसी के लिए इस्तेमाल किया है।

अमेरिका को लेकर प्रतिक्रिया अलग क्यों?

लेकिन कनाडा की तुलना में अमेरिका को लेकर भारत का लहजा काफी अलग और नरम है।

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट आने के कुछ ही घंटों के भीतर, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा, कि "भारत-अमेरिका सुरक्षा सहयोग पर हालिया चर्चा के दौरान, अमेरिकी पक्ष ने संगठित अपराधियों, बंदूक चलाने वाले गिरोह, आतंकवादियों और अन्य लोगों के बीच सांठगांठ से संबंधित कुछ इनपुट शेयर किए हैं। ये इनपुट दोनों देशों के लिए चिंता का कारण हैं और उन्होंने फॉलोअप कार्रवाई का फैसला लिया है।"

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, कि "अपनी तरफ से भारत ऐसे इनपुट को गंभीरता से लेता है, क्योंकि यह हमारे अपने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर भी प्रभाव डालता है। अमेरिकी इनपुट के संदर्भ में मुद्दों की जांच पहले से ही संबंधित विभागों द्वारा की जा रही है।"

दोनों मामलों में भारतीय प्रतिक्रियाओं से जो बात निकलकर सामने आती है वह ये है, कि...

-- फाइनेंशियल टाइम्स के खुलासे की प्रकृति पर विचार करें, कि तो कनाडा के मामले में, हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में जांच चल रही थी। जबकि, अमेरिकी मामले में, कथित हत्या की साजिश रची गई थी। इसलिए, दोनों मामलों में अपराध की प्रकृति अलग-अलग थी। कनाडा के मामले में ट्रूडो ने भारत सरकार पर उंगली उठाई, जबकि अमेरिका के मामले में इसका अभी तक सीधे तौर पर भारत सरकार से कोई संबंध नहीं जोड़ा है।

-- कनाडा के मामले में, प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने संसद में बयान दिया और हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को भारत से सीधे तौर पर दौरा, जबकि अमेरिका के मामले में, प्रशासन ने एफटी रिपोर्ट में आरोपों से इनकार नहीं किया और केवल इतना कहा, कि वे "हमारे सहयोगियों के साथ राजनयिक, कानून प्रवर्तन, या खुफिया चर्चा पर टिप्पणी नहीं करते हैं।"

-- रिपोर्ट के सामने आने के बाद, अमेरिकी प्रशासन सामने आया और एनएससी के प्रवक्ता एड्रिएन वॉटसन ने कहा, "हम इस मुद्दे को बेहद गंभीरता से ले रहे हैं, और इसे अमेरिकी सरकार ने वरिष्ठतम स्तरों सहित भारत सरकार के साथ उठाया है।"

-- अमेरिका को लेकर भारत की प्रतिक्रिया अलग होने के पीछे की सबसे बड़ी वजह है, रणनीतिक संबंध। हालिया सालों में, खासकर मोदी सरकार आने के बाद से भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंध काफी मजबूत हुए हैं। इसके अलावा, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ QUAD समूह का हिस्सा भी है, जिसका मकसद चीनी आक्रामकता से निपटना है, लिहाजा भारत भी संयम बरत रहा है।

Nijjar vs Pannun

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार अविनाश पालीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, कि "भारत ने अमेरिकी जमीन पर काफी गोपनीयता के साथ आक्रामक अभियान चलाया है, जो इससे पहले कभी नहीं देखा गया था, या कम से कम ऐसे मामसे पहले कभी सामने नहीं आए थे, लिहाजा इसका गहरा असर होने वाला है।

उन्होंने आगे लिखा, कि "भारत ने लगभग लगभग फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट की पुष्टि कर दी है और अमेरिका भी इसे गंभीरता से ले रहा है, लिहाजा इस बात की संभावना कम ही है, कि भारत, अमेरिका को भी उसी तरह से जबाव दे, जैसा उसने कनाडा को दिया था।"

लेकिन, 'द विल्सन सेंटर' के साउथ एशिया इंस्टिट्यूट के निदेशक माइकल कुगलमैन का कुछ अलग मानना है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, कि "सैन फ्रैंसिस्को में भारतीय वाणिज्य दूतावास पर खालिस्तानियों के हमले की निंदा की थी और खालिस्तान को लेकर अमेरिका का रूख, कनाडा की तुलना में काफी सख्त है, लेकिन अमेरिका ने अमेरिकी जमीन पर भारत की कार्रवाई की बात को भारतीय अधिकारियों के सामने गोपनीयता से उठाया है, ना कि अमेरिका ने सार्वजनिक तौर पर ऐसी कोई बात की है।"

लेकिन, उन्होंने आगे लिखा है, कि "भारत चाहता है, कि खालिस्तान को लेकर अमेरिका और ज्यादा सख्ती बरते, जबकि अमेरिका की चिंता अपनी जमीन पर सिखों के खिलाफ होने वाले किसी ऑपरेशन को लेकर है। वहीं, कनाडा की तुलना में अमेरिका के भारत से संबंध काफी मजबूत हैं, इसीलिए बहुत कम संभावना है, कि फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट से दोनों देशों के संबंधों में कोई संकट आए।"

वहीं, भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने कहा है, कि "निज्जर को लेकर भारत के खिलाफ अमेरिकी नाराजगी अभी तक कम नहीं हुई है, लिहाजा सवाल ये है, कि एक अमेरिकी नागरिक को मारने की साजिश रचकर क्या भारत हालात को और बिगाड़ने की रिस्क लेगा?"

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+