भारत में दिन रात चल रहे हैं कारखाने, मोबाइल कंपनियों में बंपर उत्पादन, चीन-US टेंशन से बल्ले-बल्ले
Economy News: भारतीय राजधानी नई दिल्ली के बाहरी इलाके में मोटोरोला स्मार्टफोन के एक असेंबली प्लांट में, बड़ी-बड़ी सफेद मशीनें मदरबोर्ड पर सीपीयू लगाते समय फुफकारती और बीप करती हैं, जबकि लेजर धुएं के गुबार में लगातार बारकोड बनाने का काम चलता रहता है।
दूसरी मंजिल पर, एक जैसी नीली चेक वाली स्मॉक और टोपी पहने पुरुष और महिलाएं पंक्तियों में स्पीकर, माइक्रोफोन और कैमरे को फोन की बॉडी में सेट करते हुए लगातार काम कर रहे हैं।

डिक्सन टेक्नोलॉजीज ने मोटोरोला के लिए स्मार्टफोन असेंबल करना शुरू करने के बमुश्किल ढाई साल बाद, नोएडा स्थित कंपनी प्रति महीने 500,000 यूनिट का उत्पादन कर रही है। डिक्सन को अगली तिमाही में इसे बढ़ाकर 600,000 और जनवरी से 850,000 यूनिट करने का ऑर्डर मिला है।
इसके अलावा, चीनी मूल कंपनी लेनोवो ग्रुप के लिए टैबलेट असेंबल करने की योजना भी पाइपलाइन में है।
डिक्सन का कारोबार इतना अच्छा चल रहा है, कि वह मांग को पूरा करने के लिए संयंत्र का विस्तार करने की योजना बना रहा है।
डिक्सन उन कई भारतीय कंपनियों में से एक है, जो देश में मैन्युफैक्चर को बढ़ावा देने के लिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की योजना का लाभ उठा रही हैं, क्योंकि जियो-पॉलिटिकल अनिश्चितता और वाशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव के बीच, वैश्विक ब्रांड अपने आपूर्तिकर्ताओं को चीन से दूर लाने पर विचार कर रहे हैं।
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, डिक्सन के मुख्य वित्तीय अधिकारी, सौरभ गुप्ता कहते हैं, कि "वैश्विक ब्रांड अब चीन प्लस-1,2,3 (चीन के अलावा दूसरे विकल्प) रणनीति पर विचार कर रहे हैं। कंपनियां चीन के बाहर कई मैन्युफैक्चरिंग बेस बनाने पर विचार कर रही हैं और इसके लिए कंपनियों की अलग अलग प्राथमिकताएं हैं।
मोदी सरकार की विनिर्माण योजना, जिसे प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) के रूप में जाना जाता है, फार्मास्यूटिकल्स, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित कई उद्योगों में फर्मों को नकद प्रोत्साहन प्रदान करती है।
इस योजना के तहत, योग्य कंपनियों को नकद प्रोत्साहन मिलता है, यदि वे पांच साल की अवधि में हर साल अपने आधार वर्ष से ऊपर अपनी बिक्री बढ़ाने में सक्षम होते हैं। मोबाइल फोन क्षेत्र में, चार से 6 प्रतिशत तक इंसेटिव दिया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी कंपनियां सिर्फ $200 की न्यूनतम फ़ैक्टरी कीमत वाले उत्पादों के निर्माण के लिए प्रोत्साहन का लाभ उठा सकती हैं।
भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर चीन के मुकाबले अभी काफी पीछे है, जो पिछले कुछ दशकों में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 18-19 प्रतिशत से ऊपर उठने के लिए संघर्ष कर रहा है।
भारत की अलग अलग सरकारों ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ाने की कोशिश की है, ताकि रोजगार के नये अवसर पैदा किए जाएं, लेकिन मोदी सरकार ने आक्रामक तरीका अपनाया है।

मेक इन इंडिया का दिखने लगा असर
2015 में, मोदी सरकार ने कंपनियों को देश में उत्पादों के निर्माण और संयोजन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए "मेक इन इंडिया" अभियान शुरू किया था।
अगले वर्ष, इसने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों को भारत में उन उत्पादों को बनाने के लिए मजबूर करने के लिए विभिन्न मोबाइल फोन घटकों पर आयात शुल्क लगाना शुरू किया।
इसके अलावा, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने हर तरह के कदम उठाए, जैसे की पिछले महीने लैपटॉप और टैबलेट पर प्रतिबंध तक शामिल है।
नई दिल्ली ने पिछले महीने घोषणा की कि वह विशेष लाइसेंस वाली कंपनियों के लिए लैपटॉप और टैबलेट के आयात को प्रतिबंधित करेगी।
महत्वपूर्ण विरोध के बाद, सरकार ने लाइसेंस प्राप्त करने की समय सीमा अक्टूबर के अंत तक बढ़ा दी।
डिक्सन, जो घरेलू उपकरण, मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बनाती है, वो इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की उन पांच कंपनियों में से एक है, जो पीएलआई योजना के तहत फंड प्राप्त करने के काबिल है।
हालांकि, यह अब तक की एकमात्र भारतीय कंपनी है, जिसे सरकार के लक्ष्य तक पहुंचने के बाद वास्तव में धन प्राप्त हुआ है, जिससे यह सवाल उठता है कि यह पहल कितनी सफल होगी।
बार्कलेज के प्रबंध निदेशक राहुल बाजोरिया ने कहा, कि फिलहाल वैश्विक कंपनियां चीन में अपने मौजूदा संयंत्रों को कम करने की संभावना की तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं, क्योंकि चीन भी एक बड़ा बाजार है और नए उत्पाद लॉन्च के लिए महत्वपूर्ण है।
बाजोरिया ने कहा, लेकिन व्यवसाय अपनी उत्पादन क्षमता का विस्तार करने या मौजूदा सुविधाओं को बदलने के लिए भारत जैसे अन्य देशों को तेजी से चुनेंगे।
बाजोरिया ने अल जज़ीरा को बताया, कि "फिलहाल यह चीन में गिरावट नहीं है, बल्कि अन्य जगहों पर वृद्धि है।"
उन्होंने कहा कि विनिर्माण को बढ़ावा देने की नई दिल्ली की रणनीति में "स्पष्ट सुधार" आना शुरू हो गया है।
उन्होंने कहा, "यह एक क्रमिक प्रक्रिया है और शून्य से थोड़े ही समय में 100 तक नहीं पहुंचा जा सकता है, लेकिन आप लगातार क्षमता का निर्माण करते हैं।''
व्यापार डेटा सफलता के कुछ शुरुआती संकेत दिखाता है।
पिछले साल, भारत ने iPhones सहित 14.8 अरब डॉलर मूल्य के स्मार्टफोन का निर्यात किया था, जो कि एक रिकॉर्डच है, जबकि भारत का आयात 17.6 अरब डॉलर था।
विशेष रूप से, Apple ने 2017 में iPhone SE को असेंबल करना शुरू करने के बाद से भारत में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है, अब लगभग 7 प्रतिशत iPhone भारत में बनने लगे हैं।
पिछले साल, कैलिफ़ोर्निया स्थित टेक दिग्गज ने भारत में iPhone 14 को असेंबल करना शुरू किया था और कथित तौर पर देश में iPhone 15 भी बनाने की योजना बना रही है।
चीन पर निर्भरता धीरे धीरे कम होगी
भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर कभी ध्यान नहीं दिया गया, जिसका असर ये हुआ, कि भारत पूरी तरह से चीन पर निर्भर होता चला गया और अभी, भले ही भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के आधार को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन देश मुख्य रूप से चीन से इलेक्ट्रॉनिक घटकों के आयात पर अभी भी काफी निर्भर है।
जुलाई के अंत तक 12 महीनों में, भारत ने 73.5 अरब डॉलर मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के आयात किए हैं और यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और तेल और रत्न और आभूषण के बाद तीसरे सबसे बड़े आयात बिल के रूप में शुमार है।
बाजोरिया ने कहा, कि "धीरे धीरे भारत में निर्माण बढ़ रहा है और इसकी रफ्तार तेज है और समय के साथ इसकी मूल्य वृद्धि में इजाफा होगा।"
हालांकि, ऐसा करने लिए, भारत को देश के विनिर्माण क्षेत्र की रीढ़, छोटे और मध्यम व्यवसायों (MSME) को बड़ी कंपनियों के आपूर्तिकर्ता बनने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत है।
हालांकि, कोविड संकट के बाद छोटी और मध्यम आकार की कंपनियां अभी भी कई झटकों से उबर रही हैं, जिनमें नई आयकर दरें और 2,000 रुपये के नोट को वापस लेने से लगा धक्का भी शामिल है।
लेकिन, एक्सपर्ट्स का कहना है, कि भारत अब उस मोड़ पर आ चुका है, जहां से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का शहर शुरू होता है और आने वाले वक्त में भारतीय मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री में जोरदार निवेश होने वाली है।
-
Lucknow Petrol Crisis: पेट्रोल की किल्लत? बाइक में सिर्फ ₹200-कार में ₹1000 का तेल! DM बोले- मांग 35% बढ़ी -
Petrol Diesel Shortage Fact Check: सच में भारत के पास अब सिर्फ दो दिन का पेट्रोल बचा है? या 60 दिन का बैकअप? -
LPG Crisis India: रसोई गैस की किल्लत होगी खत्म! कई साल बाद भारत ने ईरान से खरीदा एलपीजी, कब पहुंचेगा भारत? -
Middle East Crisis पर PM मोदी ने CM संग बुलाई इमरजेंसी मीटिंग, क्या है सरकार का 7 एम्पावर्ड ग्रुप्स प्लान? -
फ्रांस में गूंजेगा भारत का नाम! 'एवियन समिट' में शामिल होंगे PM Modi, G7 बैठक में जयशंकर-बैरो की बड़ी बातचीत -
बांग्लादेश के राजदूत रियाज़ हामिदुल्लाह ने भारत के साथ संवेदनशील मुद्दों के सौहार्दपूर्ण समाधान का आह्वान किया। -
LPG GAS Crisis Big News: Delhi के लिए खुशखबरी! इन 7 कैटेगरी में बंटा कमर्शियल LPG कोटा 20% से बढ़ाकर 50% हुआ -
Worlds Most Polluted Cities: दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में भारत अव्वल, दिल्ली को पछाड़ इस शहर ने मारी बाजी -
MP News : किसान के निमंत्रण पर ग्राम मोइली पहुंचे सीएम डॉ. मोहन यादव, सादगी के साथ मनाया जन्मदिन -
UDAN 2.0 Scheme: देश में 100 नए एयरपोर्ट बनाए जाएंगे, केंद सरकार ने उड़ान-2.0 योजना को दी मंजूरी -
Delhi: गैस किल्लत पर भड़कीं आम आदमी पार्टी, दिल्ली विधानसभा के बाहर विधायकों ने किया प्रदर्शन -
बिहार में होगी टीवीएफ की फिल्म ‘शिव-शक्ति’ की शूटिंग, युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण और काम का मौका












Click it and Unblock the Notifications