India-Russia Relation: भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने को रूस तैयार, जयशंकर से मिले रूसी उप प्रधानमंत्री
रूस-भारत व्यापार संवाद को संबोधित करते हुए रूस के उप प्रधानमंत्री मंटुरोव ने कहा, यूरेशियन आर्थिक आयोग के साथ मिलकर हम भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत को तेज करने की उम्मीद कर रहे हैं।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने मंगलवार को नई दिल्ली में रूस के उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव से मुलाकात की। डेनिस मानतुरोव दोदिवसीय भारत के दौरे पर आए हुए हैं। दो दिनों में यह जयशंकर और मंटुरोव के बीच दूसरी मुलाकात है। मंटुरोव रूस के उद्योग और व्यापार मंत्री भी हैं।
रूसी उप प्रधानमंत्री और व्यापार मंत्री ने रूस-भारत बिजनेस डायलॉग को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देश यूरेशियन इकोनॉमिक कमीशन के साथ मिलकर मुक्त व्यापार समझौता करने के लिए बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि रूस, भारत के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय चैंबर ऑफ कॉमर्स और रूस भारत बिजनेस काउंसिल द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में रूसी मंत्री ने कहा कि हम दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय समझौते पर हस्तारक्षर करने की कोशिश कर रहे हैं। रूसी उप प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और रूस एयर कनेक्टविटी बढ़ाने पर भी फोकस कर रहे हैं।
रूसी मंत्री ने कहा कि कोरोना की वजह से लॉजिस्टिक प्रभावित हुआ है, साथ ही पश्चिमी देशों द्वारा रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाने से कई देशों में महंगाई बढ़ी है। प्रतिबंधों के चलते अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट, कार्गो और वित्तीय लेनदेन में दिक्कतें बढ़ी हैं।
भारत-रूस व्यापार संवाद कार्यक्रम को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा, 'हमने वर्ष 2025 से पहले 30 बिलियन अमरीकी डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को पार कर लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ये बढ़ना जारी रहेगा। जयशंकर ने कहा कि भारत और रूस को दोनों पक्षों के व्यवसायों को प्रेरित करने की आवश्यकता है।
इससे एक दिन पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत-रूस के रिश्ते प्रमुख वैश्विक संबंधों में सबसे 'स्थायी' हैं। इसके साथ ही उन्होंने व्यापार असंतुलन के मुद्दे से निपटने और द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने की जरूरत को भी रेखांकित किया।
जयशंकर ने कहा कि ऐसे समय में जब रूस एशिया की ओर अधिक देख रहा है, रूसी संसाधन एवं प्रौद्योगिकी भारत की प्रगति में मजबूत योगदान कर सकते हैं। जयशंकर ने भारत और रूस के बीच आर्थिक सम्पर्क में व्यापार असंतुलन की समझने योग्य चिंताओं का उल्लेख किया और कहा कि इस मुद्दे से त्वरित आधार पर निपटने की जरूरत है।












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