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India-Pakistan: जयशंकर के इस्लामाबाद पहुंचते ही पाकिस्तान का यूटर्न, भारत के सामने रखा बातचीत का प्रस्ताव

India-Pakistan: शंघाई सहयोग संगठन (SCO Summit) के शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए विदेश मंत्री एस जयशंकर के इस्लामाबाद पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद पाकिस्तान ने मंगलवार को कहा है, कि यह भारत को तय करना है, कि वह सम्मेलन के दौरान पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय बैठक करना चाहता है या नहीं।

पाकिस्तान के योजना एवं विकास मंत्री अहसान इकबाल ने कहा, कि एससीओ बैठक के मेजबान के रूप में इस्लामाबाद मेहमानों की पसंद के अनुसार ही काम करेगा।

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उन्होंने कहा, "हम प्रस्ताव नहीं दे सकते। हमें मेहमानों के हिसाब से चलना होगा। अगर मेहमान द्विपक्षीय बैठक चाहते हैं, तो हमें निश्चित रूप से बहुत खुशी होगी।" इकबाल इस सवाल का जवाब दे रहे थे, कि क्या पाकिस्तान भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच द्विपक्षीय बैठक का प्रस्ताव रखना चाहेगा? उन्होंने कहा, "मेजबान होने के नाते हम वास्तव में किसी पर यह दबाव नहीं डाल सकते कि वे द्विपक्षीय बैठक चाहते हैं या नहीं।"

भारत और पाकिस्तान ने द्विपक्षीय बैठक से कर चुके हैं इनकार

दोनों पक्षों ने एससीओ सरकार प्रमुखों के शिखर सम्मेलन के दौरान जयशंकर और उनके पाकिस्तानी समकक्ष इशाक डार के बीच किसी भी द्विपक्षीय वार्ता से पहले ही इनकार कर दिया है।

यह पूछे जाने पर कि क्या पाकिस्तान भारत के साथ व्यापार संबंधों को बहाल करना चाहेगा? इकबाल ने सीधा जवाब नहीं दिया, लेकिन कहा कि दोनों पक्षों को लाहौर घोषणा की भावना के अनुसार चलना चाहिए। लाहौर घोषणा पर 21 फरवरी 1999 को तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और उनके पाकिस्तानी समकक्ष नवाज शरीफ के बीच वार्ता के बाद हस्ताक्षर किए गए थे। इसे भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जाता था।

इकबाल ने कहा, "अगर हम लाहौर घोषणा की भावना के अनुसार चलते हैं, तो मुझे लगता है कि ऐसी कोई समस्या नहीं होगी जिसे हम साथ मिलकर हल नहीं कर सकते।"

पाकिस्तान के ऑफर का मतलब क्या है?

पाकिस्तान के मंत्री का ये बयान काफी महत्वपूर्ण है और साफ तौर पर इस बयान के मायने ये हैं, कि वो अपने पुराने स्टैंड से पीछे हट रहा है, जिसमें उसने कहा था, कि 'जब तक भारत जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की फिर से बहाली नहीं करता है, पाकिस्तान, भारत के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा।'

लेकिन, जयशंकर के सामने अप्रत्यक्ष तौर पर बातचीत का प्रस्ताव रखना, भारत को लेकर शहबाज शरीफ की सरकार की सोच में परिवर्तन को दर्शाता है और इससे संभावना बनती है, कि आने वाले वक्त में दोनों ही देशों के बीच द्विपक्षीय बातचीत संभव हो सकती है।

हालांकि, भारत का स्टैंड अभी भी साफ है, कि "जब तक पाकिस्तान, भारत में आतंकवाद को प्रोत्साहन देता रहेगा, किसी भी तरह की बातचीत नहीं होगी।"

दूसरी तरफ, जयशंकर की पाकिस्तान यात्रा को इस्लामाबाद में भारत की तरफ से उठाया गया सकारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह लगभग नौ वर्षों में पहली बार है जब भारत के विदेश मंत्री ने पाकिस्तान की यात्रा की है, जबकि दोनों पड़ोसियों के बीच कश्मीर मुद्दे और पाकिस्तान से उत्पन्न सीमा पार आतंकवाद को लेकर संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं।

विदेश मंत्री बुधवार को एससीओ काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट (सीएचजी) शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। पाकिस्तान का दौरा करने वाली आखिरी भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज थीं। वह 8 से 9 दिसंबर 2015 को अफगानिस्तान पर 'हार्ट ऑफ एशिया' सम्मेलन में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद गई थीं। पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में फरवरी 2019 में भारत के युद्धक विमानों द्वारा पाकिस्तान के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादी प्रशिक्षण शिविर पर बमबारी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध गंभीर तनाव में आ गए थे।

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