‘जिनके पास तेल के भंडार हैं, वो हमें उपदेश ना दें’... रूसी तेल पर आर-पार की ‘लड़ाई’ के मूड में भारत सरकार
भारत सरकार की तरफ से रूसी तेल पर हो रही राजनीति पर कहा गया है कि, ‘वैध ऊर्जा लेनदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए’।
नई दिल्ली, मार्च 19: रूस से भारी डिस्काउंट पर तेल खरीदने के ऑफर को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना और अमेरिका से मिली 'चेतावनी' का भारत ने दो-टूक जवाब दिया है और भारत सरकार ने साफ तौर पर कहा है, कि वो देश, जिनके पास तेल के भंडार हैं, और जिन देशों में तेल की कोई किल्लत नहीं हैं, वो हमें तेल को लेकर सलाह नहीं दें। भारत की ये सख्ती उस वक्त आई है, जब अमेरिका समेत तमाम पश्चिमी देश भारत पर रूस के खिलाफ बयान देने के लिए प्रेशर बना रहे हैं।

पश्चिमी देशों को दो-टूक
भारत सरकार की तरफ से कहा गया है कि, ''वैध ऊर्जा लेनदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए''। भारत की तरफ से शुक्रवार को पश्चिमी देशों पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि, "तेल आत्मनिर्भरता वाले देश या रूस से खुद तेल आयात करने वाले लोग विश्वसनीय रूप से प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत नहीं कर सकते हैं''। भारत का इशारा साफ तौर पर ब्रिटेन और जर्मनी देशों की तरफ है, जो पिछले कई दशकों से रूस से तेल खरीद रहे हैं और यूक्रेन संकट के बाद भी रूस से तेल और गैस खरीदने पर प्रतिबंध लगा नहीं पाए हैं। जर्मनी ने तो रूस से तेल खरीदने पर बैन लगाने से साफ हाथ उठा दिए हैं, तो ब्रिटेन की तरफ से अभी तक विचार ही किए जा रहे हैं।

भारत की तीखी प्रतिक्रिया
भारत की तीखी प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है, जब भारत की शीर्ष तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) ने 30 लाख बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदा है, जिसे रूस ने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय दरों पर भारी छूट के साथ भारत को दिया है। 24 फरवरी को यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद ये पहला मौका था, जब भारत ने रूस के साथ कोई व्यापारिक लेन-देन किया हो और जब पुतिन को 'अलग-थलग' करने के लिए पश्चिमी देश लगातार हाथ-पैर मार रहे हैं और भारत के न्यूट्रल रहने को लेकर भी अमेरिकी और ब्रिटिश सांसदों के लगातार बयान सामने आ रहे हैं। आपको बता दें कि, शुक्रवार को फाइनेंशिय टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, दुनिया में तेल की तीसरा सबसे बड़ा आयातक देश भारत, मार्च में रूसी तेल का चौथा सबसे बड़ा उपभोक्ता बन जाएगा।

रूस से कितना तेल खरीदता है भारत?
रूस ने अब तक अकेले मार्च में भारत को एक दिन में 360,000 बैरल तेल का निर्यात किया है, जो 2021 के औसत से लगभग चार गुना अधिक है। रिपोर्ट में कमोडिटी डेटा और एनालिटिक्स फर्म केप्लर का हवाला देते हुए कहा गया है कि, रूस मौजूदा शिपमेंट शेड्यूल के आधार पर पूरे महीने के लिए एक दिन में 203,000 बैरल भारत को बेचने की तरफ काम कर रहा है। दिल्ली के सूत्रों ने कहा है कि, ''तेल आत्मनिर्भरता वाले देश या रूस से खुद तेल आयात करने वाले देश विश्वसनीय रूप से प्रतिबंधात्मक व्यापार की वकालत नहीं कर सकते हैं। भारत के वैध ऊर्जा लेनदेन का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए।"

85% तेल आयात पर निर्भर है भारत
आपको बता दें कि, भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए आयात पर अत्यधिक निर्भर है। भारत सरकार के एक सूत्र ने कहा कि, 'कच्चे तेल की हमारी जरूरत का करीब 85 फीसदी (5 मिलियन बैरल प्रतिदिन) आयात करना पड़ता है।' वहीं, आपको बता दें कि, अकसर 'तेल' को लेकर भारत के साथ राजनीति की जाती रही है और कई बार तेल आयात को लेकर भारत को 'ब्लैकमेल' करने की भी कोशिश की जाती रही है। भारत अपनी जरूरतों का ज्यादातर तेल आयात पश्चिम एशिया (इराक 23%, सऊदी अरब 18%, संयुक्त अरब अमीरात 11%) से करता है। अमेरिका भी अब भारत (7.3%) के लिए कच्चे तेल का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। चालू वर्ष में अमेरिका से आयात में काफी वृद्धि होने की संभावना है, संभवत: लगभग 11% और इसकी बाजार हिस्सेदारी 8% होगी।

ईरान पर प्रतिबंध से भारत पर गंभीर असर
ईरान और वेनेजुएला पर प्रतिबंधों के कारण मौजूदा स्थिति का जिक्र करते हुए भारत सरकार के आधिकारिक सूत्र ने कहा कि, ''भू-राजनीतिक डेवलपमेंट ने हमारी ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां पेश की हैं। स्पष्ट कारणों से हमें ईरान और वेनेजुएला से तेल का आयात बंद करना पड़ा है। वैकल्पिक स्रोत अक्सर अधिक कीमत पर आते हैं।" यानि, अधिकारी का साफ कहना था कि, ईरान से तेल खरीदना भारत को सस्ता पड़ता था, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए प्रतिबंध की वजह से भारत को नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं, सूत्र ने कहा कि, "यूक्रेन संघर्ष के बाद तेल की कीमतों में उछाल ने अब हमारी चुनौतियों में इजाफा किया है। प्रतिस्पर्धी सोर्सिंग के लिए दबाव स्वाभाविक रूप से बढ़ गया है'।

‘रूस से कम ही तेल खरीदता है भारत’
सूत्र ने कहा कि, "रूस भारत को कच्चे तेल का मामूली आपूर्तिकर्ता रहा है और भारत अपनी जरूरत का एक प्रतिशत से 2 प्रतिशत के बीच में तेल का आयात रूस से करता रहा है और रूस से तेल खरीदने के मामले में भारत अब तक टॉप-10 में भी शामिल नहीं है। वहीं, रूस से तेल खरीदने को लेकर अभी तक 'सरकार से सरकार' व्यवस्था भी नहीं है।'' दुनिया भर के विभिन्न देशों, विशेषकर यूरोप द्वारा रूसी तेल या गैस की खरीद की जा रही है। सूत्र ने कहा कि, ''रूस के कुल प्राकृतिक गैस निर्यात का 75% ओईसीडी यूरोप (जैसे जर्मनी, इटली, फ्रांस) को है। यूरोपीय देश (जैसे नीदरलैंड, इटली, पोलैंड, फिनलैंड, लिथुआनिया, रोमानिया) भी रूसी कच्चे तेल के बड़े आयातक हैं।

‘अपनी जरूरतों का ध्यान रख रहा भारत’
सूत्र ने बताया कि, ''रूस पर हालिया समय में लगाए गये प्रतिबंधों ने रूस को डिस्काउंट पर तेल आयात करने के लिए 'मजबूर' किया है, लेकिन अभी तक भी रूसी तेल कंपनियों को, जब यूरोपीय संघ के चैनल 'स्विफ्ट' से भुगतान लेते हैं, उन्हें अभी तक भी 'स्विफ्ट' से बाहर नहीं किया गया है''। यानि, आप पश्चिमी देशों का दोमुंहा रवैया को समझ सकते हैं, कि अपने स्वार्थ के लिए पश्चिमी देशों को लिए अभी भी कोई 'दीन-ईमान' नहीं है। सूत्र ने बताया कि, "भारत को प्रतिस्पर्धी ऊर्जा स्रोतों पर ध्यान केंद्रित करते रहना होगा। हम सभी तेल उत्पादक कंपनियों के ऐसे प्रस्तावों का स्वागत करते हैं। भारतीय व्यापारी भी सर्वोत्तम विकल्प तलाशने के लिए वैश्विक ऊर्जा बाजारों में काम करते हैं''।

‘’रूस से तेल खरीदने से इनकार नहीं’’
गुरुवार को, भारत ने रूस से रियायती कच्चे तेल की खरीद से इंकार नहीं किया, यह कहते हुए कि वह तेल के एक प्रमुख आयातक के रूप में हर समय सभी विकल्पों को देखता है। वहीं, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि, ''भारत अपनी अधिकांश तेल आवश्यकताओं का आयात करता है और भारत की जरूरत तेल आयात से ही पूरा होता है इसलिए हम हमेशा वैश्विक ऊर्जा बाजारों में सभी संभावनाएं तलाश रहे हैं क्योंकि इस स्थिति मे भी हम अपनी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं''।
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