Explainer: भारत के लिए खुल सकती है दुनिया की सबसे बड़ी तेल की दुकान, क्या कौड़ियों के दाम बिकेगा पेट्रोल?
Venezuela India Oil Trade: दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला पर कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील देने का अमेरिका का पिछले महीने का फैसला, भारतीय रिफाइनरों के लिए एक बहुत बड़ा मौका बना रहा है, जिनके पास लैटिन अमेरिकी देश से भारी कच्चे तेल को परिष्कृत करने की क्षमता है। लिहाजा, यह भारत को अपने कच्चे तेल आयात बास्केट में और विविधता लाने में भी मदद कर सकता है।
अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत ने साल 2019 में ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद कर दिया था, जिसका गंभीर असर भारत में तेल की कीमतों पर पड़ा था। हालांकि, यूक्रेन युद्ध के बाद भारत की स्थिति गंभीर हो सकती थी, लेकिन रूस ने डिस्काउंट पर कच्चे तेल की आपूर्ति कर भारत को बड़े संकट से बचा लिया।

हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों में नरमी के बाद भी वेनेजुएला की सरकारी स्वामित्व वाली तेल कंपनी, पेट्रोलियोस डी वेनेजुएला (पीडीवीएसए) को अपनी उत्पादन करने की पुरानी क्षमता में लौटने में और कम से कम 3 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) के अपने ऐतिहासिक स्तर पर लौटने में, कुछ समय लगेगा, फिर भी भारत के लिए ये एक बहुत बड़ा मौका बना रहा है, क्योंकि इससे भारत के लिए एक और तेल की दुकान खुल जाएगी।
वेनेजुएला से तेल खरीदेगा भारत?
बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है, कि 2024 में होने वाला वेनेजुएला ष्ट्रपति चुनाव कितने निष्पक्ष होते हैं, क्योंकि यही वह आधार है, जिसके आधार पर मौजूदा राष्ट्रपति निकोलस मादुरो अमेरिकियों के साथ समझौता करने में कामयाब हुए हैं। अगर राष्ट्रपति चुनाव निष्पक्ष होते हैं, तो फिर उसके खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह से हट जाएंगे, लेकिन अगर चुनाव में धांधली की गई, तो प्रतिबंध और कड़े कर दिए जाएंगे।
अर्जेंटीना, उरुग्वे, पैराग्वे और वेनेजुएला में काम कर चुके पूर्व भारतीय राजदूत आर. विश्वनाथन ने कहा, कि भारतीय रिफाइनरों के लिए मौकों को अगर छोड़ भी दें, तो भारत पिछले कई महीनों से सस्ते रूसी तेल खरीदने का आनंद ले रहा है।
रूसी तेल पर G7 देशों (कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका) ने प्राइस कैप लगा रखा है और इस प्राइस कैप के तहत जो भी देश 60 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा कीमत पर रूसी तेल खरीदेगा, वो पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का शिकार बनेगा, लिहाजा भारत भी रूस से 60 डॉलर प्रति बैरल से कम कीमत पर रूसी तेल खरीद रहा है, जिससे भारत सरकार को घरेलू तेल की कीमतों को स्थिर रखने में काफी मदद मिली है।
भारत, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है, जो अब तेल बाजार में एक अद्वितीय खिलाड़ी बन चुका है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारतीय तेल कंपनियां कम कीमत पर रूसी तेल खरीदकर उसे यूरोपीय बाजारों में बेच रही हैं, जिससे तेल कंपनियों को काफी फायदा हुआ है।
पूर्व भारतीय राजदूत आर. विश्वनाथन ने कहा, "विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और तेल एवं पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की हालिया टिप्पणियां दर्शाती हैं कि हम इस संबंध में कितने सहज हैं।"
जयशंकर ने इस महीने कहा था, कि रणनीतिक तेल खरीद से कीमतों को कम करने, देशों की ऊर्जा मांगों को पूरा करने और शायद वैश्विक मुद्रास्फीति को कम करने में मदद मिलने के बाद भारत, दुनिया से "धन्यवाद की प्रतीक्षा कर रहा है"। इससे पहले, पुरी ने कहा था, कि भारत "जहां भी तेल सस्ता होगा वहां से खरीदेगा", यह देखते हुए कि इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) ने अतीत में वेनेजुएला का तेल खरीदा है, एक बार फिर से वेनेजुएला से तेल खरीदने की उम्मीद बढ़ गई है।

फिर भारत में काफी सस्ता होगा तेल?
द प्रिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जामनगर, बरौनी और अन्य क्षेत्रों में भारतीय रिफाइनरियों ने वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील का स्वागत किया है, जो लंबे समय से सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है।
वहीं, उद्योग जगत के एक नेता ने कहा, "जामनगर में रिफाइनरियां सबसे कच्चे कच्चे तेल को परिष्कृत कर सकती हैं, इसलिए वहां निश्चित रूप से एक अवसर है।" रूसी यूराल के विपरीत, वेनेजुएला के कच्चे तेल में सल्फर की मात्रा ज्यादा होती है और इसे परिष्कृत करना कठिन होता है, लेकिन भारतीय तेल कंपनियों के पास वेनेजुएला के तेल को रिफाइन करने की क्षमता है।
2017 में और उससे पहले के कुछ वर्षों में, रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) के सकल रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) ने सिंगापुर के तेल बेंचमार्क को पीछे छोड़ दिया था, जो उद्योग स्रोत के अनुसार, उस समय हुआ था, जब भारतीय तेल कंपनियों के पास चुनने के लिए तेल स्रोतों का "बुफे" था। यानी वेनेजुएला, ईरान, इराक, सऊदी अरब से भारत तेल खरीदता था।
आपको बता दें, कि सकल रिफाइनिंग मार्जिन वह होता है, जो एक कंपनी कच्चे तेल के प्रत्येक बैरल को ईंधन में बदलने से कमाती है।
वेनेजुएला और ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद, भारत की क्रूड बास्केट में बदलाव आया। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद, रूस भारत का प्रमुख स्रोत बन गया। उद्योग सूत्रों ने कहा, कि मॉस्को के साथ रुपये में होने वाला व्यापार भी भारक के लिए एक वरदान रहा है।
रूस, वर्तमान में भारत के लिए शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता है, इस साल अप्रैल से सितंबर तक औसतन 1.76 मिलियन बीपीडी तेल का निर्यात करता है। वहीं, रूस के बाद इराक और सऊदी अरब सबसे ज्यादा भारत को तेल बेचता है।
अमेरिका ने 2017 में वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाने शुरू किए थे और 2019 में प्रतिबंधों को काफी सख्त कर दिया गया, जिसके बाद से भारत को वेनेजुएला से तेल खरीदना बंद करने पर मजबूर होना पड़ा।

वेनेजुएला से तेल खरीदने पर कितना फायदा?
2017 और 2019 में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला पर प्रतिबंध लगाने से पहले, भारत ने लगातार लैटिन अमेरिकी देश से कच्चा तेल खरीदा।
साल 2012 के बाद भारत ने वेनेजुएला से तेल खरीदने में काफी ज्यादा इजाफा किया और चीन को छोड़कर वेनेजुएला से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाला सबसे बड़ा एशियाई खरीददार बन गया। 2012 में वेनेजुएला, भारत को कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता था। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पीक वर्ष 2014-2015 था, जब भारत ने 22,000 टन से ज्यादा वेनेज़ुएला कच्चे तेल का आयात किया था।
2013-2014 में, कई भारतीय कंपनियां, वेनेजुएल से तेल आयात बढ़ाने की इच्छुक थीं। विदेश मंत्रालय (एमईए) के एक दस्तावेज़ से पता चलता है, कि आरआईएल, जो लगभग 300,000 बीपीडी वेनेजुएला तेल का आयात कर रहा था, उसने इसे 400,000 बीपीडी तक बढ़ाने का इरादा किया था।
इसके अलावा, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और मित्तल एनर्जी इन्वेस्टमेंट्स, पंजाब में अपनी भटिंडा रिफाइनरी में प्रसंस्करण के लिए वेनेजुएला से दो मिलियन टन तेल आयात करना चाहते थे।

2012 से 2015 तक वेनेज़ुएला में राजदूत के रूप में काम करने वाली स्मिता पुरूषोत्तम के अनुसार, उनके कार्यकाल के दौरान भारत और वेनेजुएला के बीच 'माल के लिए तेल' वाला मैकेनिज्म था, यानि भारत वेनेजुएला से तेल खरीदता था, और वेनेजुएला भारत से सामान खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद स्थिति बदल गई।
अमेरिकी प्रतिबंधों ने वेनेजुएला में चीन को सबसे बड़ा खिलाड़ी बना दिया है और चीन, वेनेजुएला से और भी ज्यादा तेल खरीद रहा है, लिहाजा एक वक्त जो बढ़त भारत के पास थी, वो अब चीन के पास है। हालांकि, एक बार फिर अगर वेनेजुएला का दुकान भारत के लिए खुलता है, तो निश्चित तौर पर भारत फिर से वेनेजुएला से तेल खरीद पाएगा, हालांकि अब भारत में तेल की कीमतों पर इसका कितना असर हो सकता है, ये भविष्य की बात होगी।












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