जापानी विदेश मंत्री के सामने जयशंकर ने US पर कसा तंज, मोदी के दौरे के एक महीने में ही क्यों बदले भारत के सुर?
India-Japan Ties: जापान के विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी के सामने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका पर तंज कसा है और जापान को यारों का यार बताया है। भारतीय विदेश मंत्री ने सार्वजनिक मंच से जो तेवर दिखाया है, उसके बाद सवाल उठ रहे हैं, कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका के राजकीय दौरे के एक महीने बाद ही, भारत के सुर क्यों बदल गये हैं।
गुरुवार को जापान-इंडिया फोरम से बोलते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कुछ ऐसी बातें कही हैं, जिसे अमूमन सार्वजनिक मंचों से नहीं कहा जाता है। भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि भारत हमेशा से अमेरिका से हथियार खरीदना चाहता रहा है, लेकिन ये अमेरिका है, जिसने भारत को हथियार बेचने में 'हिचकिचाहट' दिखाई है।

भारत दौरे पर जापानी विदेश मंत्री
जापानी विदेश मंत्री योशिमासा हयाशी ने शुक्रवार को कहा है, कि स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लक्ष्य को हासिल करने में भारत एक "अनिवार्य" भागीदार है और जापान दोनों पक्षों के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का विस्तार करने के लिए, सभी क्षेत्रों में नई दिल्ली के साथ सहयोग को गहरा करने का इरादा रखता है।
वहीं, ग्लोबल साउथ पर भारत के फोकस की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, कि स्वतंत्र और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बनाए रखने का आह्वान, महज एक नारे की तरह लग सकता है, जब तक कि विकासशील देशों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए पर्याप्त प्रतिबद्धता न जताई जाए।
भारत-जापान फोरम का आयोजन भारतीय विदेश मंत्रालय कर रहा है।
कार्यक्रम में अपनी टिप्पणी के दौरान, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जापान की दिल खोलकर तारीफ की और कहा, कि जापान की वजह से भारत में एक क्रांति आ गई है।
आपको बता दें, अमेरिका और जापान, दोनों ही देश क्वाड के पार्टनर्स हैं।
वहीं, भारतीय विदेश मंत्री ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में सहयोग का हाथ बढ़ाने के लिए भी जापान की तारीफ की है। को भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "भारत तो हमेशा से अमेरकी हथियार खरीदने का अच्छुक रहा है, लेकिन अमेरिका ने ही हिचकिचाहट दिखाई है।
भारतीय विदेश मंत्री ने गुरुवार को फोरम से कहा, कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच दो अहम समझौते हुए हैं। एक समझौता जीई 14 इंजन को लेकर है, जबकि दूसरा सौदा अमेरिकी ड्रोन को लेनहै।
भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा, कि "अमेरिका ले हथियार या सेना से संबंधित हथियार खरीदने में भारत को कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन ये अमेरिका है, जो पिछले कई सालों से भारत को हथियार सौंपने से हे हिचकिता रहा है।"
एस. जयशंकर ने अमेरका पर तंज कसते हुए कहा, कि परमाणु सौदा होने के बाद अमेरिका की भारक को लेकर हिचक कम हुई है। आपको बता दें, कि साल 2008 में मनमोहन सरकार के दौरान भारत-अमेरिका के बीत परमाणु सौदा हुआ था।

जयशंकर ने की जापान की तारीफ
एस. जयशंकर ने जापान की तारीफ करते हुए कहा, कि "मुझे लगता है कि जापान ने वास्तव में भारत में कई क्रांतियां शुरू की हैं। मारुति क्रांति है, जहां यह सिर्फ सुजुकी कार के आने के बारे में नहीं था, और यह सिर्फ एक कार के आने के बारे में नहीं था, बल्कि वास्तव में यह एक रास्ता था पूरी जीवनशैली का, यह एक सोच थी, यह एक औद्योगिक संस्कृति थी, जिसने बहुत कुछ बदल दिया।"
जयशंकर ने कहा, "दूसरी क्रांति मेट्रो क्रांति थी। मुझे लगता है कि इसका भारत के शहरी बुनियादी ढांचे पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ा है।"
बुलेट ट्रेन परियोजना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, कि "तीसरी क्रांति बन रही है, जो हाई-स्पीड रेल है। इसलिए मुझे लगता है कि जब हम उस परियोजना को पूरा करेंगे, तो लोग भारत में देखेंगे, कि इसका कितना बड़ा प्रभाव है।" ये बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद को जोड़ेगा।
वहीं, चौथी क्रांति इमर्जिंग, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और सेमिकंडक्टर सेक्टर में होने वाली है।
भारतीय विदेश मंत्री ने आगे कहा, कि "मुझे लगता है कि यह वास्तव में शांतिकाल का सहयोग है, जो तब होता है, जब आपकी परीक्षा होती है। क्योंकि यदि आप संबंध बनाने और क्षमताओं और आरामदायक और संरचनाओं को स्थापित करने के लिए हर दिन काम नहीं करते हैं, तो उस वक्त, जब कुछ ज्यादा गंभीर स्थिति आती है, तो फिर मैं इसे कैसे संभाल सकता हूं, जब मैं किसी अच्छे दिन को नहीं संभाल सकता, तो मैं बुरे दिन को कैसे संभाल सकता हूं।"












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