Special Report: क्या है चीन के खिलाफ भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का ज्वाइंट ‘मिसाइल प्रोग्राम’
चीन को रोकने की तैयारी शुरू हो चुकी है। अमेरिका के कहने पर भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने लॉंग रेज स्ट्राइक मिसाइलों का परीक्षण और तैनाती शुरू कर दी है।
वाशिंगटन/नई दिल्ली: काफी लंबे वक्त से भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया अपनी लंबी दूरी की मिसाइल मारक क्षमता के लिए अमेरिका पर निर्भर रहा है। जापान के पास हवा में ही किसी मिसाइल को पहचानने और उसे उड़ाने की क्षमता है लेकिन दुश्मन के मिसाइल लॉन्च पैड सिस्टम को ध्वस्त करने की क्षमता नहीं है। जिसके बाद अब भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने अपनी लंबी दूरी की मिसाइल मारक क्षमता को और विकसित करने का काम शुरू कर दिया है और माना जा रहा है जल्द ही QUAD (क्वाड्रिलेटरल सिक्योरिटी डायलॉग कंट्रीज) अपनी अपनी मिसाइल क्षमताओं को एकसाथ परखेंगे। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर अचानक ये चारों देश अपनी अपनी मिसाइल क्षमताओं का विस्तार और उसकी जांच करना क्यों शुरू कर चुके हैं और चारों देश अभी डिफेंस पॉलिसी में अचानक बदलाव क्यों कर रहे हैं और सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या ये काम करेगा? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये कि क्या चारों देशों ने चीन के खिलाफ युद्ध की तैयारी शुरू कर दी है?

जापान का मिसाइल शक्ति परीक्षण
जापान, भारत और ऑस्ट्रेलिया ने लंबी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण करना अचानक बहुत तेजी से शुरू कर दिया है। परीक्षण के साथ तीनों देश दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त करने की प्लानिंग पर तेजी से काम कर रहे हैं।
मिसाइल सिस्टम को मजबूत करने के लिए जापान ने अपनी IZUMU और KAGA हेलीकॉप्टर को F-35B फाइटर जेट्स में मोडीफाई करना शुरू कर दिया है जिसे जापान के एयरक्राफ्ट कैरियर पर तैनात किया जाएगा। वहीं, जापान सेल्फ एयर डिफेंस सिस्टम ने F-35A फाइटर जेट्स की खरीदारी तेजी के साथ शुरू कर दी है जिसपर 500 किलोमीटर रेंज की ज्वाइंट स्ट्राइक मिसाइल (JSM) एंटी शिप मिसाइल की तैनाती करने की प्लानिंग जापान कर रहा है वहीं जापान 900 किलोमीटर रेंज की ज्वाइंट स्टेंडऑफ एयर टू सरफेस मिसाइल (JASSM) और 900 किलोमीटर रेंज की लॉन्ग रेंज एंटी शिप मिसाइल की तैनाती भी F-35A एयरक्राफ्ट पर करने जा रहा है। जापान ने घरेलू निर्मित सरफेस टू सरफेस मार करने वाली 12 मिसाइलों की क्षमता भी बढ़ाकर 200 किलोमीट से 900 किलोमीटर रेंज करने जा रहा है। और अगर संभव हुआ तो जापान भविष्य में इन मिसाइलों की रेंज बढ़ाकर 1500 किलोमीटर तक करने की प्लानिंग कर रहा है।
इसके साथ ही जापान 2000 किलोमीचर रेंज की एंटी शिप मिसाइल भी विकसित कर रहा है। जापान में क्योस्कू और सेंकाकू के बीच की दूरी एक हजार किलोमीटर और नॉर्थ और साउथ जापान के बीच की दूरी करीब 3 हजार किलोमीटर है, लिहाजा जापान के पास आधिकारिक तौर पर एक हजार से 3 हजार किलोमीटर रेंज की मिसाइल निर्माण करने की योग्यता है।

हर तीसरे दिन भारत का मिसाइल परीक्षण
भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी मिसाइल मारक क्षमताओं में काफी तेजी के साथ वृद्धि की है। भारत ने न्यूक्लियर मिसाइल क्षमताओं को भी विकसित कर लिया है। लेकिन, 2010 के बाद भारत ने पारंपरिक मिसाइल क्षमता विकसित करने पर काफी ज्यादा फोकस किया है। इंडियन आर्मी ने 2014 में 17 कॉर्प्स को भारत-चीन सीमा पर लगाया है जो तिब्बत इलाके तक मार करने में पूरी तरह से सक्षम है। वहीं, गलवान में भारत-चीनी सेना के बीच हुए संघर्ष के बाद भारत ने असाधारण तरीके से अपनी मिसाइल शक्ति बढ़ाने का काम किया है। पिछले साल जून में गलवान घाटी में भारत और चीन की सेना के बीच हिंसक झड़प हुआ था और पिछले साल सितंबर महीने से भारत ने चीन सीमा पर लॉंग रेंज मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है। सितंबक 2020 के बाद भारत हर तीसरे दिन एक लॉन्ग रेंज मिसाइल का परीक्षण और उसकी तैनाती कर रहा है।

जापान की तरह भारत भी एक हजार से 2 हजार किलोमीटर रेंज की मिसाइल का परीक्षण और तैनाती कर रहा है तो भारत सुपरसोनिक मिसाइल बनाने के बाद अब हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की तरफ आगे बढ़ चला है। इस वक्त भारत में हाइपरसोनिक मिसाइल का निर्माण चल रहा है। हाइपरसोनिक मिसाइल की खासियत ये होती है कि इसकी गति ध्वनि की गति से ज्यादा होती है। फिलहाल ये टेक्नोलॉजी सिर्फ अमेरिका और चीन के पास ही है। इसके साथ ही भारत ब्रम्होस मिसाइल, शौर्य मिसाइल, निर्भय मिसाइल का भी परीक्षण कर तैनाती कर चुका है। हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल (HSTDV) टेक्नोलॉजी पर भारत अभी काम कर रहा है। सबसे खास बात ये है कि फिलहाल विश्व में HSTDV टेक्नोलॉजी वाला देश रूस, अमेरिका और चीन ही हैं। वहीं, जापान, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीयन देश भी इस टेक्नोलॉजी को प्राप्त करने की दिशा में कोशिश कर रहे हैं।
यानि, अमेरिका के पास तो पहले से ही लंबी दूरी तक मार करने के साथ साथ दुश्मन की मिसाइल प्रणाली को ध्वस्त करने की क्षमता है मगर अब भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान एक साथ लॉंग रेज मिसाइल प्रणाली विकसित करने पर तेजी से काम कर रहे हैं।

एक साथ बदला 4 देशों का डिफेंस प्रोग्राम
भारत, ऑस्ट्रेलिया और जापान ने अचानक अपने डिफेंस प्रोग्राम को बदल दिया है तो ताइवान, वियतनाम, फिलिपिंस और साउथ कोरिया ने भी अपने हथियारों के जखीरे को बढ़ाना शुरू कर दिया है। जिसके बाद सवाल ये उठ रहे हैं कि आखिर अचानक ऐसा क्या होगा कि ये छोटे देश भी हथियार इकट्ठा करने लगे हैं?
इस सवाल का बस एक ही जबाव है। और वो जबाव है चीन। चीन लगातार पड़ोसी देशों की जमीन पर अपना हक जमाता जा रहा है और चीन की विस्तारवादी नीति से हर देश गुस्से में है। साल 2000 के बाद से चीन के कई जहाज लगातार जापान के समुन्द्री इलाके में घुसपैठ कर रहे हैं तो हिंद महासागर में भी चीन नजर जमाए बैठा है। वहीं, भारत और चीन सीमा विवाद में भी चीन ने भारतीय जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की थी। वहीं, पिछले 10 सालों में चीन के ज्यादातर डिफेंस प्लान जापान और भारत को ध्यान में रखकर ही तैयार किए गये हैं लिहाजा भारत और जापान के लिए चीन के खिलाफ जल्द से जल्द मिसाइल और हथियार विकसित करना बेहद जरूरी हो गया है।
दरअसल, पिछले लंबे वक्त से अमेरिका के सहयोगी और मित्र देश स्ट्राइक कैपेबिलिटी के लिए उसपर ही निर्भर रहते थे। जब चीन अपनी मिलिट्री ताकत के साथ उन देशों की समुन्द्री क्षेत्र में दाखिल होता था तो ये देश चीनी सेना को अपनी डिफेंस कैपेबिलिटी से रोक तो लेते थे मगर स्ट्राइक क्षमता का इस्तेमाल जबावी हमला करने में नहीं कर पाते थे। अमेरिका के मित्र देशों को जब लंबी दूरी तक मार करने वाले न्यूक्लियर मिसाइलों की जरूरत होती थी तो उन्हें अमेरिका पर ही निर्भर होना पड़ता था। जिसकी वजह से चीन की हिमाकत और बढ़ती चली गई। दूसरी तरफ चीन लगातार विस्तारवाद में लगा है पड़ोसी देशों की जमीन हो या समुन्द्र, उसे कब्जाने में लगा हुआ है। जिसके बाद अब अमेरिका ने अपने दोस्त देशों को साफ तौर पर कहा है कि वो अपनी अपनी लॉंग रेंज स्ट्राइक केपेबिलिटिज को बढ़ाए और अमेरिका के कहने के बाद जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत ने लंबी दूरी तक मार करने वाली स्ट्राइक केपेबिलिटीज को बढ़ाना शुरू कर दिया है।

मिसाइल प्रोग्राम से चीन पर कितना असर?
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि लॉंग रेज स्ट्राइक केपेबिलिटी के साथ ऑफेंस-डिफेंस कॉम्बिनेशन चीन के खिलाफ सबसे बेहतरीन स्ट्रेटजी है। अभी तक सभी देश चीन के खिलाफ सिर्फ डिफेंसिव स्ट्रेटजी पर ही काम कर रहे थे और चीन को मुंहतोड़ जबाव देने से ही उसकी गति पर प्रहार हो सकता है।
दरअसल, जब जब चीन के खिलाफ दूसरे देश नरम पड़े हैं, चीन ने उसका फायदा उठाया है और चीन अतिक्रमण के लिए एक निश्चित पैटर्न का इस्तेमाल करता है। साउथ चायना शी के Paracel Islands को चीन ने 1950 में तब हथिया लिया था जब फ्रांस ने इंडोनेशिया से अपनी सेना को हटा लिया था। वहीं, 1970 में जैसे ही अमेरिका ने वियतनाम से अपनी सेना को हटाया, चीन ने पूरे Paracel Islands पर कब्जा कर लिया। वहीं, 1980 में जैसे ही रूस ने वियतनाम से अपनी सेना को कम किया, ठीक वैसे ही चीन ने स्पार्टली आईलैंड के 6 फीचर्स पर कब्जा जमा लिया। वहीं जब 1990 में फिलिपिंस से अमेरिकन सेना वापस चली गई, ठीक उसी समय चीन ने Mischief Reef पर कब्जा कर लिया। लिहाजा, डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि आप चीन को एक पल के लिए भी विस्तार करने का मौका नहीं दे सकते। और अगर कोई देश एक बार किसी क्षेत्र पर कब्जा कर ले तो उसे वापस लेना नामुमकिन सरीखा हो जाता है। लिहाजा, चीन के पड़ोसी देशों को बेहद सतर्कता से चीन को जबाव देने की जरूरत है। चीन के घमंड को ताकत के साथ ही खत्म किया जा सकता है।

डिफेंस एक्सपर्ट्स का कहना है की चीन को रोकने का सबसे अच्छा तरीका ये है कि कई देश मिलकर चीन के खिलाफ कई फ्रंट खोल दें ताकि चीन को कई मोर्चों पर लड़ाई करने के लिए तैयार होना पड़े। ऐसी स्थिति में चीन फौरन बैकफुट पर आ जाएगा। सिर्फ अगर जापान और भारत लॉंग रेन्ज स्ट्राइक क्षमता हासिल कर ले तो चीन को कई मोर्चों पर रक्षात्मक मुद्रा में आना पड़ेगा। वहीं, अगर इसके बाद भी चीन इंडिया-चायना बॉर्डर पर भारतीय जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो उसे अपनी मिलिट्री ताकत में काफी ज्यादा इजाफा करना पड़ेगा क्योंकि जापान उसे दूसरे मोर्चे से चुनौती देने के लिए खड़ा रहेगा।

लॉन्ग रेन्ज स्ट्राइक मिसाइल से फायदा
डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन की विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए सभी देशों को लॉन्ग रेंज मिसाइल सिस्टम विकसित करना ही पड़ेगा। अगर भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका मिलकर चीन को सभी चॉक प्वाइंट्स या स्ट्रेट्स प्वाइंट्स को अपनी मिसाइल रेंज से निशाने पर रख ले तो फिर चीन की हिम्मत नहीं होगी वो किसी भी देश की जमीन पर पैर रखे। वहीं, अगर हिमालयन क्षेत्र में भारत-चीन सीमा को लेकर बात की जाए तो भारत को स्ट्रेटजी बनाकर चीन को रोकना होगा। भारत सरकार को चाहिए कि भारत-चीन सीमा क्षेत्र में भारी संख्या में ब्रिज, सुरंग, टनल, और एयरपोर्ट का निर्माण करे और लगातार मिसाइलों की तैनाती करे ताकि चीन कोई भी दुस्साहस भरा कदम उठाने की हिम्मत नहीं करे। वहीं, अब QUAD देशों ने अपनी लॉंग रेज मिसाइल क्षमता को अचानक बड़े पैमाने पर विस्तार देना शुरू कर दिया जिससे चीन टेंशन में आ चुका है और माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में चीन को इसी से जल्द ही रोका जा सकेगा।












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