आने वाली है आर्थिक मंदी, बड़े बड़े देश होंगे धाराशाई, भारत पर कितना असर, सर्वे रिपोर्ट में जानिए
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि, कौन कौन से एशियाई देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकते हैं और किन देशों पर आर्थिक मंदी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
नई दिल्ली, जुलाई 26: आर्थिक जगत से भारत के लिए एक अच्छी खबर है। खबर ये है, कि ब्लूमबर्ग की लेटेस्ट रिपोर्ट में सर्वे के आधार पर कहा गया है कि, कई एशियाई देशों की अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा बढ़ रहा है और उच्च कीमतें केंद्रीय बैंकों को अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की गति को तेज करने के लिए मजबूर कर रही हैं और दर्जन भर देश भीषण आर्थिक संकट में फंस सकते हैं।

आर्थिक मंदी पर बड़ा सर्वे
ब्लूमबर्ग की सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि, भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका, जो बेहद खराब आर्थिक संकट से गुजर रहा है, वो अगले साल आर्थिक मंदी की चपेट में भी आ जाएगा। पिछले सर्वेक्षण में पता चला था कि, श्रीलंका के आर्थिक मंदी में फंसने के चांस 33 प्रतिशत है, जबकि लेटेस्ट सर्वे में पता चला है, कि श्रीलंका के आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना 85 प्रतिशत है। इसके साथ ही अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि, न्यूजीलैंड के आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना 33 प्रतिशत, ताइवान 20 प्रतिशत, ऑस्ट्रेलिया 20 प्रतिशत और फिलीपींस के आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना 8 प्रतिशत तक है। रिपोर्ट में पता चला है कि, इन देशों के रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए लगातार ब्याज दरें बढ़ा रहे हैं।

एशियाई देशों को लेकर क्या है संभावना?
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि, कौन कौन से एशियाई देश आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकते हैं और किन देशों पर आर्थिक मंदी का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। रिपोर्ट में अर्थशास्त्रियों ने कहा है कि, चीन के आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना 20 प्रतिशत है, जबकि 25 प्रतिशत संभावना दक्षिण कोरिया और 25 प्रतिशत ही जापान के भी आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना है। यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में एशियाई अर्थव्यवस्थाएं काफी हद तक लचीली बनी हुई हैं। वहीं, हांगकांग के आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना 20 प्रतिशत, पाकिस्तान के 20 प्रतिशत, मलेशिया 13 प्रतिशत, वियतनाम 10 प्रतिशत, थाइलैंड 10 प्रतिशत, फिलीपींस 8 प्रतिशत, इंडोनेशिया 3 प्रतिशत और भारत शून्य प्रतिशत।

जर्मनी और फ्रांस सबसे ज्यादा प्रभावित
मूडीज एनालिटिक्स इंक के मुख्य एशिया प्रशांत अर्थशास्त्री स्टीवन कोचरन ने कहा कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है, जिससे उस क्षेत्र के बाकी हिस्सों पर असर पड़ा है। सामान्य तौर पर, एशिया में मंदी का जोखिम लगभग 20-25% है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के आर्थिक मंदी में उफंसने की संभावना करीब 40 प्रतिशत है, जबकि यूरोप के आर्थिक मंदी में फंसने की संभावना 50-55% है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स का मॉडल अगले 12 महीनों के भीतर अमेरिकी मंदी की संभावना को 38% पर रखता है, जो कुछ महीने पहले लगभग 0% था। उस मॉडल में हाउसिंग परमिट और उपभोक्ता सर्वेक्षण डेटा से लेकर 10 साल और 3 महीने के ट्रेजरी यील्ड के बीच के अंतर तक कई तरह के कारक शामिल हैं।

आर्थिक मंदी आने के मिल रहे हैं संकेत
यूक्रेन में संघर्ष शुरू होने के बाद से ही तेल के सप्लाई चेन में भारी व्यवधान जारी है, जिससे कच्चे तेल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी से वृद्धि हुई है। यूक्रेन संघर्ष से पहले, कच्चा तेल लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल था और फरवरी के अंत में एक सप्ताह से भी कम समय में बढ़कर 115 डॉलर हो गया था। वहीं, मार्च के अंत में कीमतों में मामूली गिरावट देखी गई, और यह अप्रैल की शुरुआत में USD100 से नीचे चली गई। लेकिन बीते कई दिनों से यह 96 बैरल प्रति अमेरिकी डॉलर पर ट्रेंड कर रही है। कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट को संभावित मंदी की बढ़ती आशंकाओं के साथ-साथ विभिन्न केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक मौद्रिक नीति को सख्त करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

विश्व बैंक ने जारी की चेतावनी
विश्व बैंक ने आर्थिक प्रगति को लेकर एक बयान दिया है। विश्व बैंक के बयान में कहा गया है कि साल 2022 के आखिर तक दुनिया की आर्थिक प्रगति कम होने की आशंका है। इसलिए ज्यादातर देशों को आर्थिक मंदी की तैयारी कर लेनी चाहिए। पूरी दुनिया ज्यादा महंगाई और कम विकास दर से जूझ रही है, जिसकी वजह से 1970 के दशक जैसी मंदी आ सकती है। दुनियाभर में इसका असर दिखने भी लगा है।

करोड़ों लोगों पर बेरोजगारी का खतरा
न सिर्फ गूगल बल्कि फेसबुक ने भी भर्ती प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। वहीं, अमेजन ने कहा कि इस साल मार्च 2022 तक कंपनी के साथ 16 लाख से ज्यादा कर्मचारी जुड़ चुके हैं। अप्रैल में कंपनी के पास जरूरत से ज्यादा कर्मचारी हो गए। ऐसा इसलिए क्योंकि कोरोना के दौरान लीव पर गए कुछ कर्मचारी वापस लौट आए हैं। ऐसे में फिलहाल रिक्रूटमेंट प्रक्रिया रोक दी गई है। इसके अलावा एपल, फेसबुक, माइक्रोसॉफ्ट, नेटफ्लिक्स, टेस्ला, ट्विटर जैसी कंपनियों ने भी अपने यहां होने वाली भर्तियों पर फिलहाल रोक लगा दी है। दुनिया में इस समय साढ़े 20 करोड़ लोगों के बेरोजगार होने का खतरा मंडरा रहा है।
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