चीन के अंतिम रिपोर्टर को भी भारत ने किया देश से बाहर, 1980 के बाद पहली बार दिल्ली में नहीं रहा चीनी पत्रकार
India-China Journalist Conflict: भारत ने चीन के आखिरी पत्रकार को भी देश से बाहर कर दिया गया है। इस महीने भारत में चीन के आखिरी पत्रकार का वीजा बढ़ाने से भारत सरकार ने इनकार कर दिया। जिसके बाद अब ना तो भारत के ही एक भी पत्रकार चीन में बचे हैं और ना ही चीन के पत्रकार ही अब भारत में बचे हैं।
भारत और चीन के बीच पत्रकारों को लेकर चल रहे विवाद पर नजदीकी नजर रखने वालों के मुताबिक, चीन की आधिकारिक शिन्हुआ समाचार एजेंसी के रिपोर्टर ने लगभग एक सप्ताह पहले नई दिल्ली छोड़ दी है, यानि अब चीन का एक भी पत्रकार भारत में नहीं बचा है।

भारत में चीन का एक भी पत्रकार नहीं
साल 1980 के बाद, जब से दोनों देशों के बीच के संबंध सामान्य हुए, ये पहला ऐसा मामला है, जब ना भारत का एक भी पत्रकार चीन में है और ना ही चीन का ही एक भी पत्रकार भारत में है।
हालाकं, फिलहाल प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया समाचार एजेंसी का एक भारतीय रिपोर्टर बीजिंग में है, जिनका वीजा भी चीन ने नहीं बढ़ाया है।
इससे पहले चीनी विदेश मंत्रालय ने 12 जून को कहा था, कि भारतीय रिपोर्टर, "अभी भी चीन में काम कर रहा है और सामान्य रूप से रह रहा है" लेकिन उसने आगे कहा, कि अगर भारत "आखिरी चीनी पत्रकार" का वीजा नहीं बढ़ाया, तो वह जवाबी कदम उठा सकता है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा, कि "साल 2020 से, भारतीय पक्ष ने भारत में रहने के लिए चीनी पत्रकारों के वीजा को बढ़ाना बंद करना शुरू कर दिया और इसकी वजह से भारत में तैनात चीनी पत्रकारों की संख्या 14 से घटकर सिर्फ 1 रह गई है।"
क्या है भारत-चीन पत्रकार विवाद?
ब्लूमबर्ग की इसी महीने की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि चीन की सरकार ने बीजिंग में रहने वाले भारतीय पत्रकार को देश छोड़ने के लिए कह दिया है। भारतीय पत्रकार को 30 जून तक बीजिंग छोड़ना होगा।
आपको बता दें, कि 2023 की शुरूआत में भारत के चार पत्रकार चीन में काम कर रहे थे, लेकिन अप्रैल महीने में चीन ने दो भारतीय पत्रकारों का वीजा फ्रीज कर दिया और उन्हें चीन से जाने के लिए कह दिया। वहीं, बाकी बचे 2 भारतीय पत्रकारों में से एक पत्रकार को इस महीने 11 जून को चीन छोड़ना पड़ा और अब चीन में मौजूद आखिरी भारतीय पत्रकार को 30 जून तक चीन से बाहर निकलना होगा।
यानि, पीटीआई के पत्रकार के चीन से बाहर निकलने दे बाद दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाले दो पड़ोसी देशों में एक दूसरे देशों का एक भी पत्रकार नहीं रह जाएगा।
विवाद के पीछे की वजह क्या है?
दरअसल, चीन में रहने वाले भारतीय पत्रकार सिर्फ राजधानी बीजिंग में रहकर इतने बड़े विशाल देश से जानकारियां हासिल नहीं कर सकते हैं, लिहाजा वो अलग अलग हिस्सों से फ्रीलांसर रखते रहे हैं। लेकिन, चीन ने फ्रींलांसर रखने पर कुछ प्रतिबंध लगा दिए। चीन ने कहा, कि एक भारतीय पत्रकार सिर्फ चार सहायक रख सकता है और उन सहायकों की नियुक्ति भी चीन की सरकार की तरफ से की जाएगी।
इसके बाद ही ये विवाद बढ़ता चला गया और भारत ने भी चीन के एक्शन पर रिएक्शन दिया और चीनी पत्रकारों का वीजा की अवधि को बढ़ाना बंद कर दिया। लिहाजा, 1980 के बाद ये पहला मौका है, जब भारत में चीन का एक भी पत्रकार नहीं होगा। पिछले दिनों, दोनों ही देश एक दूसरे पर पत्रकारों के साथ अनुचित व्यवहार का आरोप लगा चुके हैं। हालांकि, भारत ने कहा था, कि भारत में चीनी पत्रकार उसी तरह से काम करते हैं, जैसे दूसरे देशों के पत्रकार काम करते हैं, लेकिन बीजिंग में रहने वाले भारतीय पत्रकारों को आजादी नहीं है।
भारत में जासूसी का आरोप
भारत के प्रमुख विदेश नीति विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने कहा है, कि "चीन ने सभी भारतीय पत्रकारों को निष्कासित कर दिया है और भारत ने चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया है। लेकिन, यह किसका हानि या लाभ है?"
उन्होंने लिखा है, कि "चीनी राज्य मीडिया के पत्रकार अक्सर भारत में जासूस के रूप में काम करते रहे हैं। अमेरिका ने 2020 में इसी तरह के कारण से चीनी राज्य मीडिया के पत्रकारों पर कार्रवाई की थी।" उन्होंने कहा, कि "बीजिंग स्थित भारतीय पत्रकार शायद ही कभी ऑन-द-स्पॉट रिपोर्टिंग करते थे। इसके बजाय, उनकी रिपोर्ट पर चायनीज कम्युनिस्ट पार्टी की की प्रचार शाखा ग्लोबल टाइम्स सहित चीनी राज्य मीडिया की बातें होती थीं। ऐसा लगता है कि चीन का मानना है, कि चीनी पत्रकार के निष्कासन से भारतीय मीडिया की चीनी राज्य मीडिया पर निर्भरता पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"












Click it and Unblock the Notifications