Hormuz Toll: ईरान को 20 लाख डॉलर देकर होर्मुज पार कर रहा भारतीय जहाज? वायरल दावों पर सरकार ने क्या कहा?
Strait of Hormuz Transit Fee: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर इन दिनों काफी चर्चा है। सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि ईरान इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से 20 लाख डॉलर (2 मिलियन डॉलर) वसूल रहा है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस रास्ते पर काफी निर्भर है, इसलिए यह सवाल उठना लाजिमी था कि क्या भारत भी यह भुगतान कर रहा है?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इन दावों पर स्थिति साफ की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारत की प्राथमिकता हमेशा से इस समुद्री मार्ग का 'सुरक्षित और स्वतंत्र' होना रही है।

Strait of Hormuz Crisis: क्या ईरान वसूल रहा है 20 लाख डॉलर?
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी के बयानों से इन चर्चाओं को हवा मिली। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान अपनी ताकत दिखाने के लिए कुछ जहाजों से ट्रांजिट शुल्क के रूप में 20 लाख डॉलर ले रहा है। फरवरी के अंत में शुरू हुए तनाव के बाद से यह रास्ता तेल और गैस टैंकरों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालांकि, यह शुल्क किन देशों या किन खास जहाजों पर लागू है, इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
Middle East Conflict Hindi: भारत के भुगतान पर विदेश मंत्रालय की सफाई
भारत सरकार ने स्पष्ट रूप से उन दावों को खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि भारत ने अपने जहाज निकालने के लिए ईरान को पैसे दिए हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत और ईरान के बीच पैसे के लेनदेन को लेकर कोई बात नहीं हुई है। सरकार ने उन खबरों को निराधार बताया है जिनमें भारत द्वारा ट्रांजिट शुल्क चुकाने की बात कही गई थी। भारत ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में बिना किसी रुकावट के आवाजाही का समर्थन किया है।
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Hormuz Strait Toll News: ईरान-भारत संबंधों का असर
ईरान ने भारत को एक 'मित्र देश' के रूप में देखते हुए इस रास्ते से आवागमन की अनुमति दी है। डिप्लोमैटिक स्तर पर भारत और ईरान के संबंध मजबूत रहे हैं, यही वजह है कि अन्य देशों के मुकाबले भारतीय जहाजों को वहां प्राथमिकता या रियायत मिलने की उम्मीद रहती है। केंद्र सरकार का कहना है कि भविष्य में अगर ऐसी कोई स्थिति (टोल की मांग) बनती है, तो उस पर उसी समय विचार किया जाएगा। फिलहाल, भारतीय ध्वज वाले जहाज सुरक्षित रूप से वहां से गुजर रहे हैं।
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का महत्व और भारत
भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर है। हमारे कुल ऊर्जा आयात का लगभग 90 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। हाल के दिनों में भारतीय ध्वज वाले 8 एलपीजी टैंकर इस रास्ते से गुजरे हैं। भारत के लिए यह रास्ता न केवल व्यापारिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम है। इसीलिए भारत लगातार मांग कर रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सभी के लिए सुरक्षित और स्वतंत्र रखा जाए ताकि वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो।












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