Iran America War: ईरान से जंग में बर्बाद हुआ अमेरिका! घायल सैनिकों ने बताया ट्रंप सरकार ने साथ नहीं दिया
Iran America War: ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर होते ही ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कुवैत बेस पर हुए हमले में बचे अमेरिकी सैनिकों ने मीडिया के सामने आकर सरकार के दावों की हवा निकाल दी है। सैनिकों का आरोप है कि प्रशासन ने न केवल हमले की गंभीरता को छिपाया, बल्कि सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी झूठ बोला।
जहां सरकार इसे एक मामूली चूक बता रही थी, वहीं सैनिकों ने इसे ईरान की एक बड़ी रणनीतिक जीत और अपनी भारी हार करार दिया है। यह खुलासा अमेरिकी सेना के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर करता है।

Kuwait Base Attack: रक्षा मंत्री के दावों की सच्चाई
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया था कि कुवैत का वह बेस पूरी तरह से 'किलेबंद' और सुरक्षित था। उन्होंने हमले को एक मामूली ड्रोन दुर्घटना बताया था, जिसमें ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। लेकिन हमले में घायल सैनिकों ने इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि सुरक्षा के नाम पर वहां सिर्फ टीन-शेड और दीवारें थीं, जो हवाई हमले से बचाने में पूरी तरह नाकाम रहीं। सैनिकों ने इसे प्रशासन द्वारा अपनी नाकामी छिपाने की कोशिश बताया है।
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खुफिया जानकारी को किया गया नजरअंदाज
इंटरव्यू में 103वीं सस्टेनमेंट कमांड के एक जवान ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि उन्हें हमले की जानकारी पहले से थी। खुफिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई थी कि ईरान इस बेस को निशाना बना सकता है। इसके बावजूद, उच्च अधिकारियों और प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जवान ने बताया कि जब वे सुबह के काम में व्यस्त थे, तभी शाहेद ड्रोनों ने हमला कर दिया। अगर समय रहते सावधानी बरती जाती, तो 6 सैनिकों की जान बचाई जा सकती थी।
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हमले का वह भयानक मंजर
1 मार्च 2026 को हुआ यह हमला इतना भीषण था कि 6 जवानों की मौके पर ही मौत हो गई और 20 से ज्यादा घायल हुए। सैनिकों के मुताबिक, शाहेद ड्रोनों ने ताबड़तोड़ वार किए और चारों तरफ सिर्फ आग की लपटें दिखाई दे रही थीं। यह हमला तब हुआ था जब अमेरिका ने ईरान के सुप्रीम लीडर को निशाना बनाया था। सैनिकों ने स्वीकार किया कि उस दिन वे ईरान के सामने पूरी तरह असहाय थे और यह उनकी सेना की एक बड़ी हार थी।
ध्वस्त हुआ अमेरिकी सैन्य बेस
कुवैत के दक्षिणी छोर पर स्थित यह बेस अब पूरी तरह तबाह हो चुका है। सैनिकों ने बताया कि यह इलाका शुरू से ही ईरान के रडार पर था, फिर भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। खुले मैदान में तैनात 60 सैनिकों के पास हवाई हमले से बचने का कोई रास्ता नहीं था। अब जब जंग थम गई है, तो ये सैनिक दुनिया को सच बता रहे हैं कि कैसे उन्हें बिना तैयारी के मौत के मुंह में धकेल दिया गया और बाद में सरकार ने झूठ बोला।
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