भारत-चीन के बीच नदियों पर अहम समझौता

भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री ली केकियांग के बीच ग्रेट हॉल ऑफ पीपुल में हुई बैठक में दोनों देशों की सीमाओं से होकर बहने वाली नदियों से संबंधित एक समझौता ज्ञापन पर दोनों देशों ने हस्ताक्षर किए।
सूत्रों के मुताबिक, यह समझौता भारत के लिए बहुत बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है, क्योंकि चीन ने पहली बार नदी के तटवर्ती इलाके में बसे देश के रूप में भारत के अधिकार पर सहमति व्यक्त की है। सूत्रों ने बताया कि भारत द्वारा ब्रह्मपुत्र पर चीन के बांध बनाए जाने को लेकर लगातार उठाए जा रहे मुद्दे कारण इस बार चीन ने इसे ज्यादा तवज्जो दी है।
बीजिंग ने हालांकि कहा है कि उसके द्वारा ब्रह्मपुत्र पर बनाए गए बांध नदियों के प्रवाह को रोकने वाले नहीं हैं। समझौते के तहत दोनों देशों ने "दो देशों के बीच बहने वाली नदियों एवं उससे संबद्ध प्राकृतिक संसाधनों तथा पर्यावरणीय संपत्तियों के नदी के तटवर्ती इलाके में बसे देशों के लिए महत्व को रेखांकित किया है।"
समझौते के तहत दोनों देशों ने बाढ़ के समय नदी से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान की अवधि को 15 दिन अतिरिक्त बढ़ाए जाने पर भी सहमति व्यक्त की है। अब दोनों देश एक जून की बजाय एक 15 मई से 15 अक्टूबर तक सूचनाओं का आदान-प्रदान करेंगे।
समझौते के अनुसार, "दोनों देश एक-दूसरे की सीमाओं से होकर बहने वाली नदियों पर आपसी सहयोग को बढ़ाने, बाढ़ के समय नदियों के जलस्तर से संबंधित आंकड़ों पर विद्यमान प्रणाली के तहत सहयोग करने एवं आपदा प्रबंधन तथा आपसी हितों से जुड़े अन्य मुद्दों पर विचारों का आदान प्रदान करने पर सहमत हैं।"
सूत्र ने बताया कि इससे पहले चीन, भारत द्वारा उठाई जा रही चिंता पर विचार करने पर सहमत नहीं था, लेकिन इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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