देपसांग-डेमचोक में जमा सैनिकों का डिसइंगेजमेंट, चीन के साथ सैन्य स्तर की बैठक में भारत की रणनीति समझिए
India-China Military Talk: भारत अगले सप्ताह की शुरुआत में चीन के साथ होने वाल शीर्ष स्तरीय सैन्य वार्ता के अगले दौर के दौरान, एक बार फिर रणनीतिक रूप से स्थित, देपसांग मैदानों के साथ-साथ पूर्वी लद्दाख के डेमचोक में सेना की वापसी के लिए दबाव डालेगा।
रक्षा सूत्रों ने शुक्रवार को कहा, कि कोर कमांडर-स्तरीय वार्ता का 19वां दौर 14 अगस्त को चुशुल-मोल्डो सीमा मीटिंग प्वाइंट पर भारतीय पक्ष में होगा। ये बैठक करीब चार महीनों के बाद हो रही है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व 14 कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल रशीम बाली करेंगे और इसमें विदेश मंत्रालय और आईटीबीपी के अधिकारी भी शामिल होंगे, जबकि चीनी पक्ष का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य जिला प्रमुख करेंगे।
भारत-चीन सैन्य स्तर की बातचीत
भारत और चीन के बीच ये वार्ता ऐसे समय में हो रही है, जब मौजूदा गर्मियों में पूर्वी लद्दाख से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक फैली 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीन की सैन्य गतिविधि बढ़ रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सैन्य गतिवधियां बढ़ने की बात कही गई है।
पिछले महीने 24 जुलाई को ब्रिक्स की नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर स्तरीय बैठक के दौरान भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी को स्पष्ट रूप से बता दिया था, कि अप्रैल-मई 2020 में चीन ने एलएसी मं जो किया, उसने एलएसी के पश्चिमी क्षेत्र की स्थिति में "रणनीतिक विश्वास" के साथ-साथ, दोनों देशों के बीच के रिश्ते में विश्वास के "सार्वजनिक और राजनीतिक आधार" को भी खत्म कर दिया है।
वहीं, अभी तक कोर कमांडर स्तर के बीच की गई बातचीत में जितने भी प्रस्तावों का आदान-प्रदान किया गया है, उनमें चीन ने अब तक देपसांग के मैदानों और डेमचोक में चार्डिंग निंगलुंग नाला (सीएनएन) ट्रैक जंक्शन पर सेना की वापसी की भारत की मांग को खारिज कर दिया है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एक भारतीय सूत्र ने बताया है, कि "देखते हैं, कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी अगले सप्ताह हमारे प्रस्तावों पर सहमत होती है या नहीं! पूर्वी लद्दाख सीमा पर सैनिकों की वापसी डी-एस्केलेशन और डी-इंडक्शन की दिशा में पहला कदम होगा। समग्र द्विपक्षीय संबंधों में सुधार तभी संभव है, जब एलएसी पर शांति बहाल हो।"
आपको बता दें, कि मुख्य असहमति 16,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक टेबल-टॉप पठार डेपसांग बुल्गे को लेकर है, जहां पीएलए सक्रिय रूप से भारतीय सैनिकों को लगभग 18 किलोमीटर अंदर रोक रही है, जिसे भारत अपना क्षेत्र मानता है।
पूर्वी लद्दाख में दोनों सेनाओं के 50,000 से ज्यादा सैनिक भारी हथियार प्रणालियों के साथ तैनात हैं, जहां सैन्य टकराव अब चौथे वर्ष में है।
चीन ने पिछले तीन वर्षों में बंकरों, चौकियों, तोपखाने की स्थिति, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों, रडार साइटों और गोला-बारूद भंडारण के मामले में अपनी सैन्य स्थिति को मजबूत किया है। वहीं, भारत ने भी लगातार सैनिकों को तैनाती की है।
भारत के सामने स्थित होटन, काशगर, गर्गुंसा, शिगात्से, होपिंग, लिंग्झी और ल्हासा-गोंगगर जैसे सभी चीनी हवाई अड्डों को भी नए और विस्तारित रनवे, मजबूत शेल्टर और अतिरिक्त लड़ाकू विमानों, बमवर्षकों, AWACS, ड्रोन और टोही विमानों के लिए ईंधन डंप के साथ एडवांस किया गया है। इसके अलावा, चीन अब भारत के सामने सात से आठ नए हवाई क्षेत्र और हेलीपोर्ट भी बना रहा है।
इसके अलावा चीन, सिक्किम-अरुणाचल प्रदेश सीमा पर भी अपनी ताकत दिखा रहा है, जिसकी वजह से ही 9 दिसंबर को महत्वपूर्ण तवांग सेक्टर के यांग्त्से में दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प भी हुई थी। बीजिंग ने तब अरुणाचल प्रदेश में 11 स्थानों के नाम बदल दिए थे, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया था।












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