भारत-बांग्लादेश ने डॉलर को कहा टाटा, बाय-बाय, दोनों देशों के बीच रुपये-टाका में व्यापार करने पर बनी सहमति
भारत के साथ अब तक 35 देश रुपए में ट्रेड करने में अपनी रूचि दिखा चुके हैं। बांग्लादेश उन 19 देशों में शामिल हो गया है, जो भारतीय रुपये में दोनों देशों के बीच के व्यापार में डॉलर को बाहर रखने के लिए सहमत हो गए हैं।

बांग्लादेश अब भारतीय रुपये में व्यापार करने पर सहमत हो गया है। इसके साथ ही वह भारतीय रुपये में द्विपक्षीय व्यापार करने वाला 19वां देश बन गया है। दोनों देश डॉलर छोड़ने और ट्रांजिक्शन के लिए अपनी स्थानीय मुद्राओं का उपयोग करने के लिए महीनों से बातचीत कर रहे थे।
आपको बता दें कि भारत सरकार डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए भारतीय मुद्रा में व्यापार करने पर ध्यान दे रही है। मोदी सरकार की कोशिश भारतीय मुद्रा को अधिक से अधिक देशों में स्वीकृति दिलाने की है। पिछले कुछ समय में भारत सरकार ने कई देशों के साथ समझौता कर भारतीय रुपए में कारोबार आरंभ करने की पहल शुरू की है।
इसी क्रम में भारत और बांग्लादेश ने वाणिज्यिक लेनदेन को लेकर ये ऐतिहासिक फैसला किया है। अब दोनों देशों ने निर्णय लिया है कि अब से वे भारतीय रुपये और बांग्लादेशी टाका में वाणिज्यिक लेनदेन करेंगे। गौरतलब है कि इससे पहले तक दोनों देशों में अमेरिकी डॉलर में लेनदेन होता था।
द फर्स्ट पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक देश के बाहर लेनदेन की सुविधा के लिए दो भारतीय बैंक भारतीय स्टेट बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और दो बांग्लादेशी बैंक सोनाली और ईस्टर्न बैंक में वोस्ट्रो और नोस्ट्रो खाते खोले जाएंगे। इससे दोनों देशों के बीच टाका-रुपये में लेन-देन किसी तीसरी मुद्रा को शामिल किए बिना होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत और बांग्लादेश के और बैंक भी धीरे-धीरे इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे। दोनों देशों के बीच रुपये-टका में भुगतान से अमेरिकी डॉलर पर दबाव कम होगा। इससे दोनों देशों को फायदा पहुंचेगा।
बांग्लादेश बैंक के कार्यकारी निदेशक और प्रवक्ता मोहम्मद मेजबुल हक ने कहा कि उनके देश के व्यापारियों ने भारत के साथ रुपये और टाका में व्यापार को करने के निर्णय का स्वागत किया है। उन्हें लगता है कि इस व्यवस्था से व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मांग सबसे अधिक है। भारत भी अधिकतर चीजों के आयात-निर्यात के लिए डॉलर में भुगतान करता है। इसके लिए भारत को अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं।
हालांकि, जिस तेजी से भारत, भारतीय मुद्रा में व्यापार करने के लिए समझौते कर रहा है, आने वाले समय में भारत की डॉलर पर निर्भरता कम होती चली जाएगी।












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