खालिस्तानी आतंकी पन्नून की हत्या की साजिश की होगी जांच, भारत ने बनाई हाई-लेवल कमेटी, अमेरिका का प्रेशर?
India Sets High-Level Committee on Pannun: भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा है, कि भारत ने संगठित अपराधियों, बंदूक चलाने वालों, आतंकवादियों और अन्य लोगों के बीच सांठगांठ से संबंधित कुछ इनपुट साझा करने के बाद, अमेरिकी सरकार द्वारा उठाई गई सुरक्षा चिंताओं पर गौर करने के लिए, एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता बागची ने कहा, कि "इनपुट दोनों देशों के लिए चिंता का कारण है और उन्होंने आवश्यक फॉलोअप कार्रवाई करने का फैसला किया है।"

भारत ने बनाई हाई-लेवल कमेटी
अरिंदम बागची ने कहा, कि "द्विपक्षीय सुरक्षा सहयोग पर अमेरिका के साथ चर्चा के दौरान, अमेरिकी पक्ष ने संगठित अपराधियों, बंदूक चलाने वालों, आतंकवादियों और अन्य लोगों के बीच सांठगांठ से संबंधित कुछ इनपुट साझा किए।"
उन्होंने आगे बताया, कि भारत इस तरह की सूचनाओं को गंभीरता से लेता है और संबंधित विभाग इस मुद्दे की जांच कर रहे हैं। बागची ने कहा, "हमने संकेत दिया, कि भारत ऐसे इनपुट को गंभीरता से लेता है, क्योंकि वे हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा हितों पर भी असर डालते हैं, और संबंधित विभाग पहले से ही इस मुद्दे की जांच कर रहे थे।"
विदेश मंत्रालय ने तब कहा था, कि भारत सरकार ने अमेरिकी समकक्षों द्वारा उठाए गए प्रासंगिक मुद्दों पर गौर करने के लिए 18 नवंबर को एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था।
बागची ने कहा, कि "इस संदर्भ में, यह सूचित किया जाता है कि 18 नवंबर 2023 को भारत सरकार ने मामले के सभी प्रासंगिक पहलुओं को देखने के लिए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। भारत सरकार जांच समिति के निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक अनुवर्ती कार्रवाई करेगी।"
भारतीय विदेश मंत्रालय का यह बयान, पश्चिमी समाचार मीडिया आउटलेट्स के इस दावे के कुछ दिनों बाद आया है, कि अमेरिका ने अमेरिकी धरती पर खालिस्तानी अलगाववादी-आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नून को खत्म करने की योजना को नाकाम कर दिया। कट्टरपंथी अलगाववादी समूह सिख फॉर जस्टिस का नेतृत्व करने वाला सिंह भारत में एक नामित आतंकवादी है। अमेरिका के न्याय विभाग और संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) ने ऐसे दावों पर कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने अमेरिकी धरती पर एक खालिस्तानी अलगाववादी शख्स गुरपतवंत सिंह पन्नून की हत्या की साजिश को नाकाम कर दिया। इतना ही नहीं, अखबार ने ये भी दावा किया, कि साजिश में शामिल होने की चिंताओं पर अमेरिका ने भारत को चेतावनी जारी की है, जिसके जवाब में दिल्ली ने कहा, कि वह ऐसे इनपुट को "गंभीरता से" लेता है और ऐसे मुद्दों की संबंधित विभागों द्वारा "पहले से ही जांच की जा रही है।"
इससे पहले, सितंबर महीने में, कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जब हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत पर आरोप मढ़े थे, उसके बाद भारत की तरफ से काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी गई थी और भारतीय विदेश मंत्रालय ने आरोपों को "बेतुका और प्रेरित" बताया था। वहीं, जब कनाडा ने जब एक भारतीय डिप्लोमेट को देश से बाहर निकाला, उसके बाद भारत ने भी एक कनाडाई डिप्लोमेट को बाहर निकाल दिया। वहीं, बाद में जाकर भारत ने ना सिर्फ वीजा सर्विस रोक दी, बल्कि 40 से ज्यादा कनाडाई कर्मचारियों को भी देश से बाहर निकाल दिया।
लिहाजा, कहा जा रहा था, कि कनाडा और अमेरिका के एक ही तरह के आरोपों को लेकर भारत की प्रतिक्रिया अलग अलग है। लेकिन, कनाडा में भारतीय राजदूत संजय कुमार वर्मा ने कहा है, कि भारत की प्रतिक्रिया इसलिए अलग अलग है, क्योंकि कनाडा ने बगैर कोई सबूत दिए, भारत को सीधा गुनहगार ठहरा दिया, जबकि अमेरिका की तरफ से ऐसे सबूत दिए गये हैं, जिनमें भारक के 'कुछ नागरिकों' पर साजिश रचने के संकेत हैं।












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