‘बुरे लोग’ नहीं ‘काबिल’ भारतीय की जरूरतः ऑस्ट्रिया ने भारत संग किया करार, कहा अचानक बढ़ गए अवैध प्रवासी
ऑस्टियाई विदेश मंत्री ने कहा कि बीते साल ऑस्ट्रिया में अवैध रूप से आने वाले भारतीयों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ था। ऑस्ट्रिया में भारतीय नागरिकों के शरण के लिए आवेदनों की संख्या 2021 में 600 से बढ़कर 18,000 पहुंच गई

Image: Twitter/ @DrSJaishankar
ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री अलेक्जेंडर शालेनबर्ग ने कहा कि बीते साल अवैध अप्रवासियों के रूप में ऑस्ट्रिया पहुंचने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि देखी गई। ऑस्ट्रिया के विदेश मंत्री ने यह टिप्पणी भारत के साथ माइग्रेशन और मॉबिलिटी पार्टनरशिप एग्रीमेंट पर दस्तखत करने के तुरंत बाद की। इस समझौते को उन्होंने दोनों देशों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बताया। शालेनबर्ग ने यूक्रेन में चल रहे संघर्ष को हल करने के लिए बातचीत का आह्वान किया और भारत को 'शांति' और 'तर्क' की आवाज के रूप में वर्णित किया।

एक साल में 30 गुना बढ़ा आंकड़ा
विदेश मंत्री शालेनबर्ग ने कहा कि यह समझौता ऑस्ट्रिया के लिए 'सामरिक महत्व' का है। उन्होंने कहा कि बीते साल एक लाख से भी अधिक लोग थे जिन्हें ऑस्ट्रिया की नागरिकता चाहिए थी। इसके साथ ही ऑस्टियाई विदेश मंत्री ने कहा कि बीते साल ऑस्ट्रिया में अवैध रूप से आने वाले भारतीयों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ था। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रिया में भारतीय नागरिकों के शरण के लिए आवेदनों की संख्या 2021 में 600 से अचानक बढ़कर 18,000 तक पहुंच गई।

ऑस्ट्रिया को अच्छे लोगों की जरूरत
ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री शालेनबर्ग ने कहा कि हमें पलायन या आप्रवास से दिक्कत नहीं है। हम तो चाहते हैं कि लोग हमारे यहां आएं। हमें लोगों की जरूरत है लेकिन हमें ‘बुरे लोग' नहीं चाहिए। असल समस्या अवैध अप्रवासन है। यही ऐसी चीज है जिसकी हमें जरूरत नहीं है। हमें राज्यों द्वारा नियंत्रित आव्रजन की आवश्यकता है, न कि संगठित अपराध और मानव तस्करों द्वारा अनियंत्रित आप्रवास की।
समझौते से ऑस्ट्रिया को होगा फायदा
ऑस्ट्रियाई मंत्री ने कहा कि अब समझौते के मुताबिक भारत सरकार भारत से अवैध अप्रवासियों को वापस अपने देश बुला लेगी और हम भारत से अच्छे छात्र, विद्वान और कुशल श्रमिक अपने देश आने देंगे। ऑस्ट्रियाई विदेश मंत्री ने भारत को एक ‘मित्र' और ‘भागीदार' के रूप वर्णित किया जो कि नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का पालन करता है।

सर्बिया ने बिना वीजा के एंट्री बंद की
गौरतलब है कि 2022 तक सर्बिया में भारतीयों की बिना वीजा के भी एंट्री थी। इसलिए अधिकांश भारतीय जिन्हें यूरोप में एंट्री लेनी होती थी वे सर्बिया जाकर ही यूरोप में घुस पाते थे। बीते करीब सात आठ वर्षों से भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान आदि देशों से मानव तस्कर लोगों को यूरोप में घुसाने के लिए बाल्कन देशों का इस्तेमाल काफी करने लगे थे। यूरोपीय संघ के देशों के दबाव के कारण सर्बिया को भारतीयों के लिए मिलने वाली यह सुविधा हाल ही में बंद करनी पड़ी है। नए नियम के मुताबिक 1 जनवरी 2023 से सर्बिया की यात्रा करने वाले लोगों को वीजा की जरूरत होगी।
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