चीन के खिलाफ रॉकेट फोर्स का गठन कर रहा भारत, सुरंगों का काम शुरू, जानें कैसी होगी महाविनाशक ताकत
चीन ने 2017 के बाद से ही काफी तेजी से रॉकेट फोर्स का निर्माण शुरू कर दिया था और आज उसका रॉकेट फोर्स दुनिया में सबसे ताकतवर बन चुका है। सैन्य एक्सपर्ट्स लंबे वक्त से रॉकेट फोर्स को लेकर चर्चा कर रहे हैं।

India's rocket force: भारत को हिमालय और हिंद महासागर में चीन लगातार चुनौती दे रहा है और पिछले कुछ सालों में दोनों देशों के बीच के तनाव में भारी इजाफा हुआ है। नौबत तो युद्ध तक की बन चुकी है, लेकिन चीन पिछले कई सालों से भारत को घेरने के लिए भारी तैयारी कर रहा है, जिसमें उसका सबसे बड़ा रणनीतिक हथियार रॉकेट फोर्स है। लिहाजा, ऐसी खबर है, कि ड्रैगन को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए भारत ने भी रॉकेट फोर्स के गठन के लिए काम करना शुरू कर दिया है।

ड्रैगन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी
पिछले हफ्ते स्वराज्य की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए भारत कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों (SRBMs) को स्टोर करने के लिए सीमावर्ती राज्यों में मल्टी फंक्शनल भंडारण सुरंगों का निर्माण कर रहा है, और भारत जल्द ही कम दूरी तक सटीक मार करने वाली प्रलय सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तैनाती करने वाला है। स्वराज्य ने सूत्रों के हवाले से बताया कि, भारत की तरह से ऐसी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जो किसी भी हमले की स्थिति में इन मिसाइलों को सुरक्षित रखेंगी और इन सुरंगों के जरिए भारत सटीकता के साथ फौरन दुश्मन को अपना निशाना बना सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने प्रलय मिसाइल का इस्तेमाल चीन के साथ साथ पाकिस्तान से लगती सीमा रेखा पर भी करने का फैसला लिया है। जिसका मुख्य लक्ष्य दुश्मन की सैन्य भंडारन क्षमता होगी।

चीन के पास सबसे बड़ी मिसाइल फोर्स
दरअसल, भारत को मिसाइल फोर्स बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी है, क्योंकि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स (PLARF), जिसे पहले सेकेंड आर्टिलरी फोर्स के रूप में जाना जाता था, उसके पास दुनिया की सबसे बड़ी जमीन आधारित पारंपरिक मिसाइल फोर्स है। पीएलए की दूसरी आर्टिलरी फोर्स से पीएलएआरएफ तक का विकास किया गया है। जिससे चीन अब अपनी नौसेना, वायुसेना और थलसेना के जरिए इस्तेमाल कर सकता है। चीन ने साल 2017 से 2019 के बीच के तीन सालों में अपनी मिसाइल क्षमता में 33 प्रतिशत का इजाफा किया है, जिससे रॉकेट पर चीन की बढ़ती निर्भरता का पता चलता है। मिलिट्री एक्सपर्ट्स का कहना है, कि अगर भारत के साथ युद्ध की स्थिति बनती है, तो युद्ध के प्रारंभिक चर में चीन, अपने मिसाइलों के जरिए भारत के कमान सेंटर्स, नियंत्रण केन्द्रों, हवाई ठिकानों, मिलिट्री फोर्स ठिकानों, रसद सामग्री ठिकानों और अन्य बुनियादी ठिकानों को नष्ट करने की कोशिश करेगा। ताकि, युद्ध शुरू होते ही भारत को बैकफुट पर धकेला जा सके।

भारत कैसे दे सकता है मुंहतोड़ जवाब
भारत के पास इस तरह के हमले का जवाब देने के लिए जमीन से लॉन्च करने वाली मिसाइलें हैं, लेकिन अगर चीन से तुलना की जाएगा और अगर अगर सर्विस को देखा जाए, तो भारत के पास गंभीर तौर पर सीमित विकल्प फिलहाल मौजूद हैं। भारतीय थल सेना और वायु सेना, दोनों के पास जमीन पर आधारित ब्रह्मोस मिसाइलें हैं, लेकिन संयुक्त अभियान या संयुक्त क्षमताओं की कमी का मतलब यह है, कि उनका बेहतर उपयोग नहीं किया जा सकता है। लिहाजा, भारत के मिलिट्री एक्सपर्ट्स लगातार रॉकेट फोर्स के गठन की मांग करते आए हैं, जिसपर अब भारत ने काफी तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। भारत के पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल मनोज नरवणे भी कह चुके हैं, कि भविष्य में सैन्य संघर्ष का स्वरूप पूरी तरह से अलग होने वाला है। ऐसी रिपोर्ट है, कि चीन भी काफी तेजी से ऐसे इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास कर रहा है, जिसमें सैन्य अड्डों के अलावा रेलवे लाइन्स भी शामिल हैं, जिनके जरिए हथियारों का ट्रांसपोर्टेशन काफी आसानी से किया जा सके। ऐसे में भारत भी काफी तेजी से इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुरंगों का निर्माण कर रहा है।

मिसाइल क्षमताओं का तेजी से विकास
भारत ने पिछले कुछ सालों में अपनी मिसाइलों का तेजी से विकास करना शुरू कर दिया है और भारत ने चीन के साथ ताजा सीमा तनाव के बीच अपनी परमाणु-सक्षम अग्नि-5 मिसाइल का रात्रि परीक्षण किया है। सूत्र का दावा है, कि अग्नि-5 भारत की सबसे दुर्जेय मिसाइलों में से एक है, जो 5,000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने में सक्षम है और चीन के सबसे उत्तरी हिस्सों में मार करने में सक्षम है। सूत्रों का कहना है कि, चीनी घुसपैठ से पता चलता है, कि चीन एकतरफा तरीके से सीमा की यथास्थिति को बदलने की कोशिश कर रहा है। इसमें पिछले आक्रमणों का भी उल्लेख किया गया है, जैसे कि 2020 के गलवान संघर्ष, जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे, और 2016 में इसी तरह की एक घटना हुई थी जिसमें 250 चीनी सैनिकों ने घुसपैठ किया था, लेकिन कोई झड़प नहीं हुई थी। द डिप्लोमेट की नवंबर 2021 की एक रिपोर्ट में रॉकेट फोर्स बनाने पर बात की गई थी और सैन्य एक्सपर्टच सौरव झा ने लिखा था, कि चीन और भारत के बीच सैन्य विषमता, रॉकेट फोर्स स्थापित करने के लिए प्राथमिक चालक थी।

चीन के रॉकेट फोर्स की क्षमता क्या है?
इसी महीने फॉरेन पॉलिसी के एक लेख में सैन्य एक्सपर्ट, सुशांत सिंह ने लिखा है कि चीन के साथ भारत का आर्थिक उलझाव, हिमालय में चीन की घुसपैठ पर कूटनीतिक प्रतिक्रिया का अभाव, चीन के नेतृत्व वाले बहुपक्षीय शिखर सम्मेलन में भाग लेना और चीन के नेतृत्व वाले सैन्य अभ्यास में भाग लेना, चीन के खिलाफ निर्णायक लड़ाई में भारत की कमियों को दर्शा सकता है। चीन के रॉकेट फोर्स के पास इस वक्त अनुमानित तौर पर 300 के करीब परमाणु बम और करीब 2500 बैलिस्टिक मिसाइलें हो सकती हैं। इसके साथ ही चीन के पास करीब 90 इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें भी हो सकती हैं। इसके साथ ही चीन के रॉकेट फोर्स में करीब डेढ़ लाख जवान हो सकते हैं, जो चीन की अपार क्षमता को दर्शाता है। चीन के मिसाइल फोर्स का मुख्यालय हैदान जिले के किंघाई में है और चीनी मिसाइलें सेकंड्स में अपने टारगेट को तबाह कर सकती हैं। यानि, चीन की मिसाइल क्षमता अत्यधिक विनाशक है।

भारत को कैसा रॉकेट फोर्स बनाना होगा?
सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, भारत को भी चीन की आक्रामकता का जवाब देने और युद्ध के लिए लिए किसी भी वक्त तैयार होने के लिए विशालकाय रॉकेट फोर्स का निर्माण करना होगा, जिसमें कम से कम 50 से 70 हजार सैनिकों को रखना होगा। इसके अलावा भारत को अपने पूर्वी और पश्चिमी मोर्चे पर बैलिस्टिक मिसाइल ब्रिगेट की तैनाती करनी होगी। इस वक्त देखा जाए, तो भारत के पास रोड-मोबाइल टैक्टिकल मिसाइलों का अभाव है और भारत के पास अभी सिर्फ शौर्य और प्रहार मिसाइलें ही हैं, लिहाजा भारत को ऐसे मिसाइलों की संख्या बढ़ाने की जरूरत होगी। यानि, भारत को भी चीन की तरह अपने मिसाइल जखीरे को बढ़ाने की जरूरत होगी, जिसकी तैयारी भारत ने शुरू कर दी है।
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